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टारगेट किलिंग से फिर लाल हुई घाटी: आतंकियों के निशाने पर आम नागरिक, छत्तीसगढ़ के मजदूर की हत्या ने बढ़ाई चिंता

Fri, 31 Jul 2026 11:15 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला, नेटवर्क कुलगाम
अमर उजाला, नेटवर्क कुलगाम Published by: Nikita Gupta Updated Fri, 31 Jul 2026 11:15 PM IST
सार

कुलगाम में आतंकियों ने छत्तीसगढ़ के एक प्रवासी मजदूर की गोली मारकर हत्या कर दी, जबकि उसका साथी गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना ने घाटी में शिक्षक, कश्मीरी पंडित, बैंक अधिकारियों और मजदूरों को निशाना बनाने वाली टारगेट किलिंग की घटनाओं पर फिर चिंता बढ़ा दी।

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Target killing in Kulgam, Jammu and Kashmir
कुलगाम में आतंकी हमला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में छत्तीसगढ़ निवासी एक प्रवासी मजदूर की आतंकियों द्वारा हत्या किए जाने की घटना ने घाटी में टारगेट किलिंग की पुरानी तस्वीर एक बार फिर सामने ला दी है। बीते कुछ वर्षों में आतंकियों ने चुन-चुनकर आम नागरिकों को निशाना बनाया है। इनमें शिक्षक, कश्मीरी पंडित, बैंक अधिकारी, पुलिसकर्मी, प्रवासी मजदूर और विभिन्न विकास परियोजनाओं में कार्यरत कर्मचारी शामिल रहे हैं।

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स्थनीय लोगों के अनुसार दोनों मजदूर ईंट भट्ठे के पास ही खड़े थे। अचानक वहां पहुंचे करीब दो आतंकियों ने उन्हें टारगेट करते हुए अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई इस गोलीबारी से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। साथी मजदूर जब तक कुछ समझ पाते, तब तक दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे। आतंकियों ने दीपक के सीने में सीधे गोलियां मारी हैं। इस कारण उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। जीएमसी अनंतनाग के डॉक्टरों के अनुसार अत्यधिक खून बहने के कारण दीपक (24) की मौत हुई है। घायल भूपेंद्र (28) की हालत भी गंभीर बनी हुई है।

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सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र को घेरा
घटना के बाद पुलिस, सेना और सीआरपीएफ की संयुक्त टीमों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली है। हमलावर आतंकियों को पकड़ने के लिए आसपास के गांवों और जंगलों में बड़े पैमाने पर सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है। वरिष्ठ पुलिस और सुरक्षा अधिकारी खुद मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं।

दक्षिण कश्मीर में बाहरी मजदूरों पर फिर गहराया खतरा
दक्षिण कश्मीर में सुरक्षाबलों को निशाना बनाने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी अनंतनाग जिले में एक बड़ा आतंकवादी हमला देखने को मिला था। अनंतनाग में सबसे हालिया आतंकी हमला 22 जुलाई 2026 को दोपहर करीब 12:30 बजे हुआ था, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था। वह हमला दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग शहर के व्यस्त और मुख्य बाजार लाल चौक पर हुआ था। उस हमले में अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में तैनात जम्मू-कश्मीर पुलिस के हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी निशाना बने थे। अब इस हमले के बाद दक्षिण कश्मीर में फिर बाहरी मजदूरों पर खतरा गहरा गया है।

कायरतापूर्ण आतंकी हमले का करारा जवाब मिलेगा : एलजी
मैंने छत्तीसगढ़ के एक मजदूर की हत्या वाले कुलगाम के जघन्य आतंकी हमले के बाद पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात और शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों से बात की। मैं इस कायरतापूर्ण आतंकी हमले की कड़ी निंदा करता हूं। मैंने सुरक्षा बलों को आतंकवादियों के खिलाफ अभियान और तेज करने तथा उन्हें जल्द से जल्द ढेर करने के निर्देश दिए हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली है।
मनोज सिन्हा, उपराज्यपाल, जम्मू-कश्मीर

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बीते पांच साल में कई बार बाहरी लोग बने आतंकियों का निशाना
दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में प्रवासी मजदूर की हत्या कोई अकेली घटना नहीं है। घाटी में आम नागरिकों को चुनकर निशाना बनाने की आतंकियों की रणनीति पिछले कई वर्षों से समय-समय पर सामने आती रही है। शिक्षक, कश्मीरी पंडित, बैंक अधिकारी, पुलिसकर्मी और फिर प्रवासी मजदूर आतंकियों के निशाने पर रहे हैं। हालिया घटना ने एक बार फिर इस खतरे को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हर बड़ी वारदात के बाद सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के दावे हुए, लेकिन टारगेट किलिंग की घटनाएं पूरी तरह नहीं थम सकीं। 2022 में ऐसी घटनाएं सबसे ज्यादा देखने को मिलीं, जब सरकारी कर्मचारी, शिक्षक और प्रवासी मजदूर लगातार आतंकियों के निशाने पर आए।

20 अक्तूबर, 2024 : सुरंग परियोजना के शिविर पर हमला, सात की मौत
गांदरबल जिले के गगनगीर में निर्माणाधीन जेड मोड़ सुरंग परियोजना के शिविर पर आतंकियों ने हमला कर सात लोगों की हत्या कर दी। मृतकों में स्थानीय डॉक्टर शाहनवाज अहमद डार के अलावा परियोजना से जुड़े छह कर्मचारी और श्रमिक शामिल थे, जो जम्मू-कश्मीर समेत विभिन्न राज्यों के रहने वाले थे। यह हमला विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के कुछ ही दिन बाद हुआ था। घटना के बाद परियोजना स्थलों की सुरक्षा बढ़ाई गई और बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया गया। बाद में सुरक्षा बलों ने इस हमले में शामिल लश्कर-ए-ताइबा के स्थानीय आतंकी जुनैद अहमद भट को मुठभेड़ में मार गिराया।

चार अप्रैल, 2024 : बिहार निवासी मजदूर की हत्या
अनंतनाग जिले में बिहार के मजदूर राजू शाह को आतंकियों ने गोली मार दी। वह निजी कंपनी में काम करता था। अस्पताल ले जाने पर उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में तलाशी अभियान चलाया गया और प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा बढ़ा दी गई।

एक जनवरी, 2023 : डांगरी में सात लोगों की जान गई
राजोरी जिले के डांगरी गांव में आतंकियों ने हिंदू परिवारों के घरों को निशाना बनाकर अंधाधुंध गोलीबारी की। अगले दिन उसी इलाके में आईईडी विस्फोट हुआ। दोनों घटनाओं में कुल सात लोगों की मौत हो गई। इसके बाद जम्मू संभाग में बड़े स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई और आतंकवाद विरोधी अभियान तेज किए गए।

दो जून, 2022 : एक ही दिन बैंक मैनेजर और मजदूर बने निशाना
राजस्थान के हनुमानगढ़ निवासी ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक विजय कुमार की कुलगाम में बैंक के भीतर घुसकर आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। उसी दिन बडगाम में बिहार के दरभंगा निवासी मजदूर दिलखुश कुमार की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई। इन दोनों घटनाओं के बाद बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर घाटी छोड़कर अपने घर लौटने लगे थे।

31 मई, 2022 : स्कूल के बाहर शिक्षिका को मारी गोली
जम्मू संभाग के सांबा जिले की रहने वाली शिक्षिका रजनी बाला की कुलगाम के गोपालपोरा स्थित सरकारी स्कूल के बाहर आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। घटना के बाद शिक्षकों और अल्पसंख्यक कर्मचारियों की सुरक्षा तथा तबादले का मुद्दा जोर-शोर से उठा।

12 मई, 2022 : तहसील कार्यालय में घुसकर कश्मीरी पंडित की हत्या
बडगाम के चदूरा तहसील कार्यालय में कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारी राहुल भट की कार्यालय परिसर के भीतर गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने कई सप्ताह तक विरोध प्रदर्शन किया और सुरक्षित स्थानों पर तैनाती की मांग उठाई। इस मामले में शामिल आतंकियों को बाद में सुरक्षा बलों ने अलग-अलग मुठभेड़ों में मार गिराया।

अक्तूबर, 2021 : प्रवासी मजदूरों को चुन-चुनकर बनाया निशाना
अक्तूबर 2021 में श्रीनगर, कुलगाम, पुलवामा और अन्य इलाकों में प्रवासी मजदूर लगातार आतंकियों के निशाने पर रहे। 16 अक्तूबर को कुलगाम के वानपोह में बिहार के दो मजदूरों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। अगले ही दिन पुलवामा में उत्तर प्रदेश और बिहार के दो मजदूरों पर हमला हुआ, जिसमें एक की मौत हो गई और दूसरा घायल हुआ। इन सिलसिलेवार हमलों के बाद सैकड़ों प्रवासी मजदूर डर के कारण घाटी छोड़कर अपने घर लौट गए, जिससे निर्माण, बागवानी और अन्य विकास कार्य भी प्रभावित हुए।

सात अक्तूबर, 2021 : स्कूल के भीतर दो शिक्षकों को उतारा मौत के घाट
श्रीनगर के ईदगाह स्थित सरकारी हायर सेकंडरी स्कूल में प्रधानाचार्य सुपिंदर कौर और शिक्षक दीपक चंद की पहचान करने के बाद आतंकियों ने गोली मार दी। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद घाटी के स्कूलों की सुरक्षा बढ़ाई गई और अल्पसंख्यक समुदाय में दहशत फैल गई।

पांच अक्तूबर, 2021 : दुकान पर बैठे फार्मासिस्ट और रेहड़ी लगाने वाले की हत्या
श्रीनगर के प्रसिद्ध फार्मासिस्ट एवं कश्मीरी पंडित माखन लाल बिंदरू की उनकी मेडिकल दुकान पर गोली मारकर हत्या कर दी गई। विपरीत हालात के बावजूद वह तीन दशक से अधिक समय तक घाटी में रहकर कारोबार करते रहे थे। इसी दिन बिहार के भागलपुर निवासी गोलगप्पा विक्रेता वीरेंद्र पासवान की भी आतंकियों ने हत्या कर दी। इन घटनाओं ने घाटी में टारगेट किलिंग को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा सुरक्षा मुद्दा बना दिया।

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