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पांच मार्च को संगीत की परीक्षा : लिखित और व्यावहारिक अभ्यास एक-दूसरे से जुड़े, संगीत के मूल तत्व जरूर पढ़ें
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उधमपुर। संगीत विषय में लिखित और व्यावहारिक अभ्यास एक-दूसरे से जुड़े होते हैं इसलिए वादी स्वर, संवादी स्वर, स्वर व्यवस्था, रागों की विशेषताएं और संगीत के मूल तत्वों को ध्यान से पढ़ें। परीक्षार्थियों को वार्षिक परीक्षा में बेहतर परिणाम हासिल करने का मूल मंत्र संगीत शिक्षक ने दिया।
जम्मू कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन की पांच मार्च को कक्षा 10वीं की संगीत विषय की परीक्षा होने जा रही है। इसे लेकर शिक्षकों ने विद्यार्थियों को विशेष दिशा-निर्देश और महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, ताकि छात्र बेहतर प्रदर्शन कर सकें। विद्यार्थियों को केवल रटने के बजाय समझ पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
शिक्षकों ने छात्रों को सलाह दी कि विद्यार्थी प्रैक्टिकल में जो भी राग, गीत या ताल का अभ्यास कर चुके हैं उसी आधार पर थ्योरी की तैयारी करें। प्रैक्टिकल में सीखे गए विषयों का आत्मचिंतन करें और उन्हें स्पष्ट व सटीक शब्दों में लिखने का अभ्यास करें। इससे उत्तर प्रभावशाली बनेंगे और अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। उत्तर लिखते समय साफ-सुथरी लिखावट, सही परिभाषाएं और उदाहरण का विशेष ध्यान रखें। महत्वपूर्ण शब्दों को रेखांकित करने से परीक्षक पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
विद्यार्थी प्रैक्टिकल पर ध्यान दें, जितना हो सके उसे दोहराएं। अनावश्यक तनाव न लें, नियमित पुनरावृत्ति करें और आत्मविश्वास के साथ परीक्षा में शामिल हों। सही तैयारी और संतुलित अभ्यास से संगीत विषय में उत्कृष्ट अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।
- यश कुमार, सहायक प्राध्यापक।
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जम्मू कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन की पांच मार्च को कक्षा 10वीं की संगीत विषय की परीक्षा होने जा रही है। इसे लेकर शिक्षकों ने विद्यार्थियों को विशेष दिशा-निर्देश और महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, ताकि छात्र बेहतर प्रदर्शन कर सकें। विद्यार्थियों को केवल रटने के बजाय समझ पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
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शिक्षकों ने छात्रों को सलाह दी कि विद्यार्थी प्रैक्टिकल में जो भी राग, गीत या ताल का अभ्यास कर चुके हैं उसी आधार पर थ्योरी की तैयारी करें। प्रैक्टिकल में सीखे गए विषयों का आत्मचिंतन करें और उन्हें स्पष्ट व सटीक शब्दों में लिखने का अभ्यास करें। इससे उत्तर प्रभावशाली बनेंगे और अधिक अंक प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। उत्तर लिखते समय साफ-सुथरी लिखावट, सही परिभाषाएं और उदाहरण का विशेष ध्यान रखें। महत्वपूर्ण शब्दों को रेखांकित करने से परीक्षक पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
विद्यार्थी प्रैक्टिकल पर ध्यान दें, जितना हो सके उसे दोहराएं। अनावश्यक तनाव न लें, नियमित पुनरावृत्ति करें और आत्मविश्वास के साथ परीक्षा में शामिल हों। सही तैयारी और संतुलित अभ्यास से संगीत विषय में उत्कृष्ट अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।
- यश कुमार, सहायक प्राध्यापक।