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Udhampur News: वादी के लगातार गैरहाजिर रहने पर भूमि विवाद का मुकदमा खारिज
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उधमपुर। प्रधान जिला न्यायाधीश उधमपुर की अदालत ने करीब 44 कनाल 19 मरला जमीन से जुड़े एक महत्वपूर्ण दीवानी मुकदमे को वादी की लगातार गैरहाजिरी के कारण खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि वादी लंबे समय से सुनवाई के दौरान नियमित रूप से उपस्थित नहीं हो रहा था। इससे मामले की सुनवाई प्रभावित हो रही थी।
जानकारी के अनुसार गांव लड्डा तहसील मौंगरी निवासी लड्डू राम ने गांव के ही परस राम के खिलाफ वर्ष 2025 में यह मुकदमा दायर किया था। वादी का कहना था कि 3 फरवरी 2003 को दोनों पक्षों के बीच भूमि बिक्री का एक समझौता हुआ था। इसके अनुसार प्रतिवादी को लगभग 44 कनाल 19 मरला भूमि की रजिस्ट्री वादी के पक्ष में करनी थी।
वादी ने अदालत से यह भी अनुरोध किया था कि प्रतिवादी को भूमि किसी अन्य व्यक्ति को बेचने, उसकी प्रकृति बदलने, उस पर निर्माण करने या किसी तीसरे व्यक्ति को उसका कब्जा देने से रोका जाए। इसके अलावा वादी ने वैकल्पिक रूप से 2.25 लाख रुपये, एक लाख रुपये मुआवजा तथा मुकदमे के दौरान और उसके बाद 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दिलाने की भी मांग की थी।
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सुनवाई के दौरान वादी या उसकी ओर से कोई भी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, जबकि प्रतिवादी की ओर से अधिवक्ता चौधरी मोहम्मद शफी मौजूद रहे। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभिलेखों से स्पष्ट है कि वादी कई सुनवाई की तिथियों पर लगातार अनुपस्थित रहा है। बार-बार बुलाने के बावजूद उसके उपस्थित न होने से यह स्पष्ट होता है कि वह मुकदमे को आगे बढ़ाने में रुचि नहीं रखता।
इन परिस्थितियों में प्रधान जिला न्यायाधीश ने वादी की अनुपस्थिति के कारण मुकदमे को खारिज कर दिया। साथ ही मामले से जुड़े सभी लंबित आवेदन भी समाप्त कर दिए गए। अदालत ने 26 मई 2025 को जारी अंतरिम रोक संबंधी आदेश भी निरस्त कर दिया तथा मुकदमे की फाइल नियमानुसार अभिलेखागार में भेजने के निर्देश दिए।
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जानकारी के अनुसार गांव लड्डा तहसील मौंगरी निवासी लड्डू राम ने गांव के ही परस राम के खिलाफ वर्ष 2025 में यह मुकदमा दायर किया था। वादी का कहना था कि 3 फरवरी 2003 को दोनों पक्षों के बीच भूमि बिक्री का एक समझौता हुआ था। इसके अनुसार प्रतिवादी को लगभग 44 कनाल 19 मरला भूमि की रजिस्ट्री वादी के पक्ष में करनी थी।
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वादी ने अदालत से यह भी अनुरोध किया था कि प्रतिवादी को भूमि किसी अन्य व्यक्ति को बेचने, उसकी प्रकृति बदलने, उस पर निर्माण करने या किसी तीसरे व्यक्ति को उसका कब्जा देने से रोका जाए। इसके अलावा वादी ने वैकल्पिक रूप से 2.25 लाख रुपये, एक लाख रुपये मुआवजा तथा मुकदमे के दौरान और उसके बाद 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दिलाने की भी मांग की थी।
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सुनवाई के दौरान वादी या उसकी ओर से कोई भी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, जबकि प्रतिवादी की ओर से अधिवक्ता चौधरी मोहम्मद शफी मौजूद रहे। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभिलेखों से स्पष्ट है कि वादी कई सुनवाई की तिथियों पर लगातार अनुपस्थित रहा है। बार-बार बुलाने के बावजूद उसके उपस्थित न होने से यह स्पष्ट होता है कि वह मुकदमे को आगे बढ़ाने में रुचि नहीं रखता।
इन परिस्थितियों में प्रधान जिला न्यायाधीश ने वादी की अनुपस्थिति के कारण मुकदमे को खारिज कर दिया। साथ ही मामले से जुड़े सभी लंबित आवेदन भी समाप्त कर दिए गए। अदालत ने 26 मई 2025 को जारी अंतरिम रोक संबंधी आदेश भी निरस्त कर दिया तथा मुकदमे की फाइल नियमानुसार अभिलेखागार में भेजने के निर्देश दिए।