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Coronavirus Vaccine: क्यों रोक दिया गया ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन का ट्रायल? जानें क्या है परीक्षण की पूरी प्रक्रिया

Wed, 09 Sep 2020 04:34 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Wed, 09 Sep 2020 04:34 PM IST
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Coronavirus Vaccine updates in hindi Oxford AstraZeneca Covid 19 vaccine study paused after one illness Coronavirus vaccine making and trial process
Oxford vaccine trial update - फोटो : Pixabay/Amarujala

वैसे तो दुनिया के कई देश और कंपनियां कोरोना वायरस के लिए वैक्सीन बनाने का काम कर रही हैं, लेकिन इस रेस में सबसे आगे एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन को माना जा रहा था। लेकिन अब इसके ट्रायल के अचानक रोकना पड़ा है। इसके तीसरे यानी अंतिम चरण का ट्रायल चल रहा है, जिसमें करीब 30 हजार लोग शामिल हैं। उम्मीद जताई है कि बाजार में सबसे पहले आने वाले वैक्सीन में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन हो। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा दूसरी बार हुआ है जब ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में कोरोना की वैक्सीन के ट्रायल को रोका गया है। आइए जानते हैं कि आखिर ट्रायल को क्यों रोका गया है और वैक्सीन के परीक्षण की पूरी प्रक्रिया क्या है। 

Coronavirus Vaccine updates in hindi Oxford AstraZeneca Covid 19 vaccine study paused after one illness Coronavirus vaccine making and trial process
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मानव परीक्षण में शामिल एक व्यक्ति अचानक बीमार पड़ गया, जिसकी वजह से ट्रायल को रोकना पड़ा। एस्ट्राजेनेका का कहना है कि यह एक सामान्य रुकावट है, क्योंकि परीक्षण में शामिल व्यक्ति की बीमारी के बारे में अभी तक कुछ भी पता नहीं चल पाया है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया क्या है? 

दरअसल, किसी भी बीमारी के लिए वैक्सीन बनाने की शुरुआत जानवरों से की जाती है। वैज्ञानिक सबसे ज्यादा परीक्षण बंदरों और चूहों पर ही करते हैं। उन्हें पहले वैक्सीन की खुराक दी जाती है और देखा जाता है कि उससे प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पैदा होती है या नहीं। इसमें सफल होने के बाद 'फेज-1 सेफ्टी ट्रायल्स' शुरू होता है यानी वैक्सीन बनाने के पहले चरण की शुरुआत होती है, जिसे मानव परीक्षण कहते हैं।  

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Coronavirus Vaccine updates in hindi Oxford AstraZeneca Covid 19 vaccine study paused after one illness Coronavirus vaccine making and trial process
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

ट्रायल के पहले चरण में क्या होता है? 

पहले चरण के ट्रायल के लिए 18 से 55 साल तक के कुछ ऐसे व्यक्तियों को चुना जाता है, जो पूरी तरह से स्वस्थ हों यानी उन्हें किसी तरह की कोई बीमारी न हो। उसके बाद उन्हें कम मात्रा में वैक्सीन की खुराक दी जाती है और उससे शरीर में बनने वाली प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया की जांच की जाती है। इसमें कई दिन या महीने भी लग सकते हैं। इसके नतीजे सकरात्मक निकलने के बाद ही दूसरे चरण की शुरुआत होती है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

दूसरे चरण के ट्रायल में क्या होता है? 

ट्रायल के दूसरे चरण में 100 लोगों के एक समूह को वैक्सीन की खुराक दी जाती है, जिसमें बच्चों और बुजुर्गों को भी शामिल किया जा सकता है। दरअसल, ऐसा यह देखने के लिए किया जाता है कि कहीं वैक्सीन का असर बच्चों, बुजुर्गों और युवाओं में अलग-अलग तो नहीं हो रहा है। इस ट्रायल प्रक्रिया में डॉक्टरों द्वारा नियमित तौर पर उन लोगों की जांच की जाती है, जिन्हें वैक्सीन दी गई है कि उनमें इसका कोई साइड-इफेक्ट तो नहीं हो रहा और उससे इम्यूनिटी विकसित हुई है या नहीं। फिर होता ही तीसरे यानी अंतिम चरण की शुरुआत। 

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