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Build 2026 Lucknow Live: सीएम के सलाहकार अवनीश अवस्थी बोले- यूपी में 20 हजार करोड़ के काम जमीन पर उतरे
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Fri, 09 Oct 2026 11:52 AM IST
Bhupendra Singh
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Bhupendra Singh
Updated Fri, 09 Oct 2026 11:52 AM IST
खास बातें
UP infrastructure conclave 2026 Live Updates in Hindi: लखनऊ में अमर उजाला बिल्ड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव में उत्तर प्रदेश के विकास की दिशा पर मंथन जारी है। स्वास्थ्य, एक्सप्रेसवे, ऊर्जा, औद्योगिक निवेश, रियल एस्टेट, एमएसएमई और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों पर विशेषज्ञ चर्चा कर रहे हैं। प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने पर विचार रख रहे हैं।
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अपनी बात रखते सीएम के सलाहकार अवनीश अवस्थी।
- फोटो : अमर उजाला
लाइव अपडेट
11:50 AM, 09-Oct-2026
सौर ऊर्जा और बायोगैस उत्पादन पर जोर
पैनल डिस्कशन के चर्चा में सामने आया कि उत्तर प्रदेश अब नवीकरणीय ऊर्जा, कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) उत्पादन और औद्योगिक निवेश के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। कृषि अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। वहीं, गोरखपुर में करीब 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश से कई परियोजनाओं की योजना बनाई जा रही है। प्रदेश में पहली बार लौह अयस्क का खनन कर उससे स्टील उत्पादन तक का एकीकृत तंत्र विकसित करने की दिशा में भी काम हो रहा है। यह बातें अमर उजाला के मंच पर वक्ता ने कहीं।सौर ऊर्जा और बायोगैस उत्पादन पर जोर
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। इसके साथ ही कंप्रेस्ड बायोगैस उत्पादन के क्षेत्र में भी प्रदेश आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार, देश में सीबीजी उत्पादन करने वाली इकाइयों की संख्या के लिहाज से उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्यों में शामिल है।उन्होंने कहा कि कृषि अपशिष्ट और अन्य जैविक कचरे का बेहतर प्रबंधन कर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सकता है। इस दिशा में अभी काफी संभावनाएं हैं और प्रदेश को इनका लाभ उठाने के लिए व्यवस्थित प्रयास करने होंगे। मुख्यमंत्री की नई औद्योगिक नीति से भी इस क्षेत्र को गति मिलने की उम्मीद है।
अनियोजित शहरी विस्तार पर नियंत्रण जरूरी
वक्ता ने कहा कि प्रदेश में शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में केवल नगर निगमों ही नहीं, बल्कि नगर पालिकाओं और टाउन एरिया में भी क्षमता निर्माण और नियोजन पर ध्यान देना होगा। शहरों के बाहरी क्षेत्रों में हो रहे अनियोजित विकास को नियंत्रित करना जरूरी है, ताकि आधारभूत सुविधाओं का विस्तार व्यवस्थित ढंग से किया जा सके। शहरी विकास के लिए योजनाएं बनाने के साथ जमीन पर उनके प्रभावी क्रियान्वयन और बेहतर परिणामों पर भी जोर देना होगा।कानून-व्यवस्था में सुधार से बढ़ा निवेशकों का भरोसा
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। पहले उद्योगों और कारोबारियों के सामने सुरक्षा को लेकर जो चिंताएं थीं, उनमें कमी आई है। अब निवेशक प्रदेश में कारोबार और औद्योगिक परियोजनाएं स्थापित करने के लिए आगे आ रहे हैं।उन्होंने कहा कि मुंबई और अहमदाबाद जैसे वित्तीय केंद्रों में भी उत्तर प्रदेश, खासकर गोरखपुर को लेकर निवेशकों के बीच उत्साह दिखाई देता है। बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों से बातचीत में भी प्रदेश के प्रति बदला हुआ नजरिया सामने आता है। उन्होंने इस बदलाव का श्रेय सरकार के उन प्रयासों को दिया, जिनके तहत कानून-व्यवस्था और औद्योगिक माहौल को बेहतर बनाने के लिए मिशन मोड में काम किया गया।
गोरखपुर में 25 हजार करोड़ के निवेश की योजना
वक्ता ने बताया कि गोरखपुर में करीब 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश से जुड़ी कई परियोजनाओं पर योजना बनाई जा रही है। इनमें लौह अयस्क के खनन से लेकर स्टील उत्पादन तक की पूरी औद्योगिक शृंखला विकसित करने का प्रस्ताव शामिल है।उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में उपलब्ध लौह अयस्क का इस्तेमाल कर प्रदेश में ही लोहा और स्टील तैयार करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल हो सकती है। इससे कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पाद तक की औद्योगिक व्यवस्था विकसित होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
पर्यावरण अनुकूल औद्योगिक विकास पर जोर
उन्होंने कहा कि नई औद्योगिक परियोजनाओं की योजना बनाते समय पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना जरूरी है। प्रस्तावित परियोजनाओं में टिकाऊ विकास, पर्यावरण अनुकूल तकनीक और कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम रखने पर ध्यान दिया जा रहा है।प्रदेश में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। सौर ऊर्जा, बायोगैस, खनन और स्टील उत्पादन जैसे क्षेत्रों में निवेश उत्तर प्रदेश को औद्योगिक विकास की नई दिशा दे सकता है।
11:44 AM, 09-Oct-2026
एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर
अवस्थी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे का निर्माण केवल आवागमन की सुविधा तक सीमित नहीं है। इनका इस्तेमाल औद्योगिक विकास, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा देने के लिए भी किया जा रहा है। एक्सप्रेसवे के आसपास औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में विकसित किए गए 27 औद्योगिक क्लस्टर पूरी तरह बुक हो चुके हैं। इससे राज्य में निवेशकों की रुचि और औद्योगिक इकाइयों के लिए विकसित हो रहे अवसरों का पता चलता है।
जेवर एयरपोर्ट के आसपास भी बढ़ रहीं औद्योगिक गतिविधियां
उन्होंने जेवर में बन रहे नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास विकसित हो रहे औद्योगिक परिदृश्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में विभिन्न कंपनियां निवेश और औद्योगिक परियोजनाओं को आगे बढ़ा रही हैं। ट्रैक्टर निर्माण समेत अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी कंपनियों की रुचि बढ़ रही है।अवस्थी ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठकों में जिलों में चल रही परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा होती है। सरकार की कोशिश है कि औद्योगिक विकास का लाभ केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश या एनसीआर तक सीमित न रहे, बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों में भी निवेश पहुंचे।
हर जिले तक पहुंच रहा निवेश
अवनीश अवस्थी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में निवेश परियोजनाओं का विस्तार अलग-अलग जिलों तक हो रहा है। मिर्जापुर समेत कई क्षेत्रों में बड़े निवेश की संभावनाएं हैं। सरकार का लक्ष्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ाना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करना है।उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे, हवाई अड्डे, औद्योगिक क्लस्टर और बेहतर लॉजिस्टिक्स नेटवर्क मिलकर उत्तर प्रदेश को निवेश के लिए मजबूत आधार दे रहे हैं। औद्योगिक विकास के इस मॉडल से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति मिलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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11:35 AM, 09-Oct-2026
13 हजार से बढ़कर 33 हजार हुईं पंजीकृत फैक्ट्रियां
अमर उजाला के मंच पर मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी ने कहा कि उत्तर प्रदेश तेजी से औद्योगिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से लेकर एक्सप्रेसवे, औद्योगिक गलियारों, लॉजिस्टिक्स क्लस्टर और निवेश परियोजनाओं तक बड़े पैमाने पर काम हो रहा है। वर्ष 2017 में प्रदेश में करीब 13 हजार पंजीकृत फैक्ट्रियां थीं, जिनकी संख्या अब बढ़कर लगभग 33 हजार हो गई है। प्रदेश में विकसित किए गए 27 औद्योगिक क्लस्टर पूरी तरह बुक हो चुके हैं। यह बातें अवनीश अवस्थी ने अमर उजाला के आयोजन में कहीं।उन्होंने अपनी बात की शुरुआत अमर उजाला से अपने जुड़ाव का जिक्र करते हुए की। उन्होंने कहा कि वह अमर उजाला नियमित रूप से पढ़ते हैं और दिन की शुरुआत में सबसे पहले इसी अखबार को पढ़ना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा कि अखबार में जमीनी स्तर से जुड़ी खबरें महत्वपूर्ण होती हैं।
13 हजार से बढ़कर 33 हजार हुईं पंजीकृत फैक्ट्रियां
अवनीश अवस्थी ने कहा कि किसी प्रदेश में औद्योगीकरण की स्थिति का आकलन वहां पंजीकृत फैक्ट्रियों की संख्या से भी किया जा सकता है। वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में लगभग 13 हजार फैक्ट्रियां पंजीकृत थीं, जबकि अब इनकी संख्या करीब 33 हजार हो गई है। यह प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों के बढ़ने का संकेत है।उन्होंने कहा कि राज्य में उद्योगों के साथ मैन्युफैक्चरिंग, निवेश और औद्योगिक गलियारों के विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार निवेश परियोजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं, ताकि निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारकर रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकें।
ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह से निवेश परियोजनाओं को गति
उन्होंने बताया कि प्रदेश में निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। उनके अनुसार, करीब 20 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम जमीन पर उतर चुका है। इनमें से 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं में फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं और रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं।उन्होंने कहा कि निवेश परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकार लगातार समीक्षा कर रही है। आने वाले ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह में भी नई परियोजनाओं की शुरुआत की तैयारी है। इससे प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को और गति मिलने की उम्मीद है।
11:07 AM, 09-Oct-2026
सरकार ने आज स्वास्थ्य को अपनी प्रायोरिटी बनाया है
अनुप्रिया पटेल ने बताया कि उत्तर प्रदेश में करीब 15 करोड़ आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं। लगभग 13 करोड़ लोगों के इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड इन आईडी से जोड़े जा चुके हैं। प्रदेश में छह लाख से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों और सुविधाओं तथा 12 लाख से अधिक डॉक्टरों के पंजीकरण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत 100 माइक्रोसाइट विकसित करने की घोषणा की है। इनके माध्यम से छोटे अस्पतालों, नर्सिंग होम, क्लीनिक, फार्मेसी और जांच केंद्रों को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।एंटीबायोटिक के दुरुपयोग से बढ़ रहा खतरा
केंद्रीय मंत्री ने एंटीबायोटिक दवाओं के अनियंत्रित इस्तेमाल पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लोग मामूली बीमारी या संक्रमण होने पर डॉक्टर की सलाह के बिना खुद दवाएं लेने लगते हैं। कई बार एंटीबायोटिक का पूरा कोर्स भी नहीं करते। इससे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की समस्या बढ़ती है, जो भविष्य में स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।उन्होंने कहा कि लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक नहीं लेनी चाहिए और निर्धारित उपचार को लेकर चिकित्सकीय निर्देशों का पालन करना चाहिए। जलवायु परिवर्तन और नए रोगजनकों से पैदा होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों से निपटने के लिए भी तैयारी जरूरी है।
बीमारी की निगरानी और जांच नेटवर्क मजबूत करना जरूरी
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए रोग निगरानी तंत्र और प्रयोगशालाओं के नेटवर्क को मजबूत करना होगा। कोरोना महामारी ने देश में जांच सुविधाओं और आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने की जरूरत स्पष्ट की। इसी दिशा में प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि जिला अस्पतालों में पब्लिक हेल्थ लैब स्थापित करने, जांच सुविधाओं का विस्तार करने और स्वास्थ्य आपातकाल के दौरान विभिन्न संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है। प्रदेश जैसे बड़े राज्य में इन व्यवस्थाओं को मजबूत करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
सरकारी प्रयासों के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी भी जरूरी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार केवल सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है। इसमें निजी अस्पतालों, विशेषज्ञ संस्थानों, डायग्नोस्टिक सेंटर, मेडिकल डिवाइस निर्माताओं और फार्मा क्षेत्र की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में सरकारी निवेश के साथ निजी क्षेत्र की पूंजी, विशेषज्ञता और नवाचार को जोड़ना होगा। इससे भविष्य की जरूरतों के अनुरूप स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी। हर नागरिक को किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना साझा लक्ष्य होना चाहिए। सरकार, उद्योग जगत और अन्य हितधारकों के संयुक्त प्रयासों से ही सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
10:56 AM, 09-Oct-2026
यूपी में विकास का पहिया तेजी से घूमा है- अनुप्रिया पटेल
इस मौके पर केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बीते नौ वर्षों में विकास का पहिया तेजी से घूमा है। कभी बीमारू राज्य की छवि से पहचाने जाने वाले उत्तर प्रदेश ने अब अपनी पहचान बदली है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए विकसित उत्तर प्रदेश का निर्माण जरूरी है। इसके लिए प्रदेश में विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास, मेडिकल कॉलेजों का विस्तार और हर नागरिक तक किफायती इलाज की पहुंच सुनिश्चित करनी होगी।उन्होंने कहा कि अमर उजाला ने इस आयोजन के माध्यम से उत्तर प्रदेश के व्यापारिक ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। केंद्र और राज्य सरकार प्रदेश के विकास के लिए कई योजनाएं चला रही हैं। मानव संसाधन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय बदलाव हुआ है। देश का विकास उत्तर प्रदेश के विकास से जुड़ा है। यदि उत्तर प्रदेश विकसित होगा तो देश भी विकसित भारत बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।
स्वस्थ उत्तर प्रदेश से मजबूत होगी अर्थव्यवस्था
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकसित उत्तर प्रदेश की परिकल्पना तभी साकार होगी, जब प्रदेश स्वस्थ होगा। इसके लिए विश्वस्तरीय हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना आवश्यक है। करीब 26 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में प्रत्येक नागरिक तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। स्वस्थ नागरिक ही मजबूत अर्थव्यवस्था की नींव होते हैं।उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार असंभव दिखने वाले लक्ष्यों को हासिल करने के संकल्प के साथ काम करती है। इसी सोच के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने प्रदेश के स्वास्थ्य बजट का उल्लेख करते हुए कहा कि 9.12 लाख करोड़ रुपये के कुल बजट में स्वास्थ्य के लिए करीब 55 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। केंद्र सरकार ने भी स्वास्थ्य बजट को कुल बजट के ढाई प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज से बढ़ीं सुविधाएं
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि सरकार ने मेडिकल शिक्षा और उपचार की सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया है। वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज की नीति से प्रदेश में चिकित्सा सुविधाओं को मजबूती मिली है। उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ी है और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के विस्तार पर काम हो रहा है।उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के प्रयासों से देश में एम्स की संख्या सात से बढ़कर 23 हो गई है। मेडिकल कॉलेजों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों के साथ विशेषज्ञ चिकित्सा केंद्रों और अस्पतालों का विस्तार किया जा रहा है। विधानसभा क्षेत्रों के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए भी प्रयास जरूरी हैं।
आयुष्मान भारत से करोड़ों लोगों को मिला इलाज
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य ढांचे के निर्माण के साथ लोगों को उपचार की सुविधा उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है। सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज सरकार के लिए केवल चुनावी नारा नहीं, बल्कि प्रतिबद्धता है। इसी उद्देश्य से आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना लागू की गई है।उन्होंने बताया कि देश में करीब 62 करोड़ लोग इस योजना के दायरे में हैं। लगभग 50 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं और 13 करोड़ से अधिक लोग योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में भर्ती होकर इलाज करा चुके हैं। इस पर केंद्र सरकार दो लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुकी है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी योजना का व्यापक असर दिखाई दे रहा है। प्रदेश में करीब 1.80 करोड़ परिवार योजना के लाभार्थी हैं और इसके तहत लगभग एक करोड़ लोगों का इलाज हो चुका है। सरकार का प्रयास है कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी योजना से जुड़े निजी अस्पतालों की संख्या बढ़ाई जाए, जिससे आम लोगों को मुफ्त इलाज आसानी से मिल सके।
डिजिटल हेल्थ मिशन में यूपी की उल्लेखनीय प्रगति
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के माध्यम से देश में डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक नागरिक की विशिष्ट स्वास्थ्य पहचान यानी आभा आईडी बनाई जा रही है। इससे मरीज अपनी जांच रिपोर्ट, एक्स-रे, दवाओं और अन्य मेडिकल रिकॉर्ड को एक ही डिजिटल पहचान से जोड़ सकते हैं। डॉक्टर के पास उपचार के लिए जाने पर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री उपलब्ध होने से इलाज में सुविधा होगी।10:33 AM, 09-Oct-2026
पहले यूपी में लॉ एंड आर्डर की बड़ी समस्या थी-ब्रजेश पाठक
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक
- फोटो : अमर उजाला
डिप्टी सीएम ने आगे कहा कि बिजली के मामले में हम आत्मनिर्भर हो रहे हैं। आज बिजली की कोई कमी नहीं है। बिजली के मामले में विश्व में भारत और देश में यूपी सबसे आगे है। सबसे ज्यादा सोलर पैनल यूपी में लगे हैं। ट्यूबवेलों को सोलर पैनल से जोड़ने का काम चल रहा है। परिषदीय स्कूलों की बुरी स्थिति थी। बाउंड्रीवाल टूटी रहती थी। हमने कायाकल्प के तहत स्कूलों की स्थिति बदली। आज दुनिया के निवेशक चाहते हैं कि यूपी में निवेश करें। उन्होंने निवेशकों को सरकार की तरफ से हर संभव मदद का भरोसा दिया। कहा कि आज यूपी बीमारू राज्य नहीं है।
बिजली लाइन से जुड़ा हर जिला, जेवर में बना एशिया में सबसे बड़ा एयरपोर्टः पाठक
ब्रजेश पाठक ने कहा कि सड़कों के साथ-साथ हमने रेलवे के ढांचा में बेहतरी की है। अब हर शहर बिजली की लाइन से जुड़ा है। मेल एक्सप्रेस के साथ वंदे भारत, अमृत भारत जैसी हाईस्पीड ट्रेनें तेजी से बढ़ाई जा रही हैं। ट्रेन के साथ विमान सेवाओं ने भी प्रदेश ने तरक्की की है। प्रदेश में लगातार एयरपोर्ट खुलते जा रहे हैं। जेवर में एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट खुल चुका है। आने वाले दिनों में यहां से देश-दुनिया की हर फ्लाइट उपलब्ध होगी। यह सब बदलाव प्रदेश में निवेश और रोजगार के रास्ते खोलेंगे।
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10:27 AM, 09-Oct-2026
यूपी को एक्सप्रेसवे वाला प्रदेश भी कह सकते हैं
इस मौके पर अमर उजाला लखनऊ के संपादक विजय त्रिपाठी ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज केवल बड़ा बाजार ही नहीं है, बल्कि नई जमाने की तकनीक के उत्पादन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज यूपी को एक्सप्रेसवे वाला प्रदेश भी कह सकते हैं। प्रदेश में औद्योगिक विकास के लिए छह कॉरिडोर बनाए गए हैं। यूपी में निवेशकों का बढ़ता भरोसा इस बात का उदाहरण है।उन्होंने कहा कि इसके साथ-साथ हमारे सामने चुनौतियां भी हैं। हमें यह ध्यान रखना होगा कि कितने लोगों को नौकरियां मिलीं। एमओयू से निकलकर चीजें धरातल पर दिखें। इस कार्यक्रम का उद्देश्य है कि हम सब मिलकर इस पर चर्चा करें। 2047 तक यूपी को देश का ग्रोथ इंजन बनाने की दिशा में सहयोगी बनें।
10:25 AM, 09-Oct-2026
प्रदेश के विकास गलियारों पर होगी चर्चा
आयोजन में आगे यूपीपीसीबी के सचिव संजय सिंह सौर और नवीकरणीय ऊर्जा से टिकाऊ उत्तर प्रदेश की संभावनाओं पर बात करेंगे। अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार एक्सप्रेसवे और हवाई अड्डों के माध्यम से प्रदेश के विकास गलियारों पर चर्चा करेंगे।10:08 AM, 09-Oct-2026
इन प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा
कॉन्क्लेव में स्वास्थ्य, एक्सप्रेसवे, ऊर्जा और औद्योगिक निवेश जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर एक-एक करके गहन चर्चा होनी है। रियल एस्टेट, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भी चर्चा के मुख्य बिंदु रहेंगे। लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग पर भी विशेषज्ञ विचार साझा कर रहे हैं।09:46 AM, 09-Oct-2026
Build 2026 Lucknow Live: सीएम के सलाहकार अवनीश अवस्थी बोले- यूपी में 20 हजार करोड़ के काम जमीन पर उतरे
उत्तर प्रदेश के विकास से जुड़ी परियोजनाओं और बदलती जरूरतों पर अमर उजाला बिल्ड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव का आयोजन होटल ताज में शुक्रवार को किया जा रहा है। सुबह 9:30 बजे से शुरू होने वाले आयोजन में स्वास्थ्य, एक्सप्रेसवे, ऊर्जा, निवेश और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों पर विचार-विमर्श जारी है।