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Assembly Session Live: विधानसभा सत्र के बीच कांग्रेस का प्रदर्शन, वित्त मंत्री को चेतवानी देते हुए कही ये बात
MP Vidan Sabha Session Live Updates in Hindi: नमस्कार! अमर उजाला के लाइव ब्लॉग में आपका स्वागत है। एमपी विधानसभा के बजट सत्र का आज दूसरा दिन है। सदन के अंदर कार्यवाही शुरू हो गई है।
लाइव अपडेट
भाजपा विधायक डॉक्टर सीताराम शर्मा ने किया बड़ा दावा
भाजपा विधायक डॉक्टर सीताराम शर्मा ने राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने रोटी और आवास जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली 65 साल की सरकारों ने इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया. डॉ. सीताराम शर्मा ने कहा कि हम काम करके दिखा रहे हैं, लेकिन विपक्ष सच्ची बातें सुनने को तैयार नहीं है. उन्होंने कहा कि हम हमेशा विरासत के साथ विकास की बात करते हैं, क्योंकि बिना विरासत के विकास का कोई महत्व नहीं होता.विधानसभा सत्र के बीच कांग्रेस का प्रदर्शन
मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन विपक्ष ने सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में कथित दूषित पानी से हुई मौत के मुद्दे पर कांग्रेस विधायकों ने सदन शुरू होने से पहले प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने गंदे पानी की बोतलें लेकर गांधी प्रतिमा के सामने नारेबाजी की। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार स्वास्थ्य और पानी की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दे रही।आज अनुपूरक बजट पेश होगा
वहीं, सदन में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा तीसरा अनुपूरक बजट पेश करेंगे और राज्य का आर्थिक सर्वेक्षण भी सदन में रखा जाएगा। इसके बाद कल सत्र के तीसरे दिन सरकार मुख्य बजट पेश करेगी।
भोपाल में महिला कांग्रेस का रसोई संसद प्रदर्शन
राजधानी भोपाल में महंगाई को लेकर महिला कांग्रेस ने अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया। प्रदेश अध्यक्ष रीना बोरासी सेठिया के नेतृत्व में कार्यकर्ता सिलेंडर, खाली कड़ाही, चकला-बेलन और थालियां लेकर धरने पर बैठीं। महिलाओं ने थाली बजाकर नारेबाजी की और प्रतीकात्मक रूप से रोटियां बेलते हुए संदेश दिया कि महंगाई ने घर-घर की रसोई पर ताला लगा दिया है।
400 रुपए में सिलेंडर की मांग
महिला कांग्रेस ने मांग की कि गैस सिलेंडर की कीमत 400 रुपए की जाए। उन्होंने कहा कि उज्ज्वला योजना के कई लाभार्थी अब भी सिलेंडर भरवाने में असमर्थ हैं और ग्रामीण क्षेत्र में लोग लकड़ियां लाकर खाना पकाने को मजबूर हैं। महिला कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि 18 फरवरी को पेश होने वाले बजट में महंगाई और रसोई खर्च कम करने के ठोस उपाय नहीं किए गए, तो 19 फरवरी को वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा के आवास का घेराव किया जाएगा।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने लगाए आरोप
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने कहा कि जबकि सरकार 2047 तक दो ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की बात करती है, लेकिन उनके पास विधायकों के लिए विकास निधि के लिए 5 करोड़ रुपए देने तक का इंतजाम नहीं है।
सोहनलाल वाल्मीकि ने कहा, राज्यपाल के अभिभाषण में कमियों का भी होना चाहिए जिक्र
कांग्रेस नेता सोहनलाल वाल्मीकि ने कहा कि सरकार को चाहिए कि केवल उपलब्धियों का ही नहीं बल्कि जो कमियां हैं, उनका भी जिक्र किया जाए। उन्होंने कहा कि जिस तरह से इंदौर में हाल ही में 35 लोगों की मौत होने वाला कांड हुआ, उस पर भी चर्चा की जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने जोर दिया कि राज्यपाल के अभिभाषण में सभी महत्वपूर्ण मुद्दों का उल्लेख होना जरूरी है।बदनावर विधायक भंवर सिंह शेखावत और रामेश्वर शर्मा के बीच चर्चा का मजेदार पल
बदनावर से विधायक भंवर सिंह शेखावत ने कहा कि मोतियाबिंद का इलाज तो संभव है, लेकिन यदि मोदिया बिंद (गलत तरह से बोले गए शब्द) हो जाए तो उसका इलाज नहीं हो सकता। इस पर रामेश्वर शर्मा ने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया कि यदि समय पर भंवर सिंह जी का मोतियाबिंद का इलाज हो गया होता, तो वह हमारे साथ होते।कांग्रेस विधायक सोहन वाल्मीकि का आरोप
कांग्रेस विधायक सोहन वाल्मीकि ने कहा कि प्रदेश सरकार 2047 तक दो ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की बात कर रही है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं कर रही कि यह लक्ष्य कैसे हासिल किया जाएगा और इसके लिए संसाधन कहां से आएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नीति में लोगों को सम्मोहन जैसी व्यवस्था अपनाने पर मजबूर कर रही है।फूल सिंह बरैया के बयान पर सियासी बहस
मध्य प्रदेश विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चल रही चर्चा के दौरान सदन में हंगामा मच गया। चर्चा के दौरान विकास, शिक्षा और छात्रावासों को लेकर बहस हुई। फूल सिंह बरैया ने कहा कि प्रदेश में कुछ लोगों के लिए विकास हो रहा है, लेकिन कुछ लोगों को यह विकास नजर नहीं आता। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में शिक्षा को कमीशन से दूर रखा जाना चाहिए और शिक्षा का स्तर बनाए रखने के लिए छत्रावास जरूरी हैं।कन्या छात्रावास पर विवाद
बरैया ने यह भी बताया कि आदिवासी कन्या छात्रावास में एक भी कन्या नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्होंने जांच की मांग की थी और जांच में बताया गया कि छात्रावास कन्याओं से भरा पड़ा है। उन्होंने बरौनी कन्या आश्रम, दतिया का उदाहरण भी दिया।
विपक्ष ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेता रीति पाठक ने कहा कि कन्या छात्रावास की बात करने से पहले कन्याओं की इज्जत की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर वह पहले भी अपनी बात रख चुकी हैं। रामेश्वर शर्मा ने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस नेता ग्रंथों का अपमान बर्दाश्त करेंगे।
फूल सिंह बरैया के बयान को लेकर सदन में सियासी बहस और हंगामा शुरू हो गया। विपक्ष और समर्थक नेताओं ने अपने-अपने पक्ष से आपत्ति जताई।
राज्यपाल का अभिभाषण भविष्य के विकास रूपरेखा: अजय विश्नोई
मध्यप्रदेश विधानसभा में अजय विश्नोई ने राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सरकार की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण बीते तीन वर्षों का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की विकासात्मक रूपरेखा प्रस्तुत करता है।
उन्होंने प्रदेश में निवेश की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि विकास की रफ्तार बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश जरूरी है। प्रदेश में दो हजार किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण कार्य जारी है, जिससे अधोसंरचना को मजबूती मिलेगी।
अजय विश्नोई ने बताया कि बिजली उत्पादन के मामले में मध्यप्रदेश सरप्लस राज्य है। बिजली क्षेत्र में कई एमओयू (MOU) किए गए हैं, जिससे भविष्य में उत्पादन क्षमता और बढ़ेगी। उन्होंने दावा किया कि शहरों और गांवों में 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, जबकि किसानों को खेतों के लिए 10 घंटे विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाते हुए सभी शासकीय भवनों में सोलर पावर प्लांट लगाए जा रहे हैं।
नसबंदी अभियान पर संकट: डॉक्टरों की कमी से रफ्तार धीमी
आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और नसबंदी की धीमी रफ्तार को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। सरकार ने जहां नसबंदी के लिए डॉक्टरों की कमी स्वीकार की है, वहीं विपक्ष और सत्तापक्ष के नेताओं के बयान भी चर्चा में हैं। पूरे मामले में अलग-अलग नेताओं ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी है।
1. नसबंदी के डॉक्टरों की कमी, दूसरे राज्यों से बुलाने की तैयारी
प्रदेश में कुत्तों की नसबंदी करने वाले डॉक्टरों की संख्या कम है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर अन्य राज्यों से विशेषज्ञ डॉक्टर बुलाए जाएंगे, ताकि नसबंदी अभियान को तेज किया जा सके और आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित हो।
2. घर के पालतू नहीं, आवारा कुत्तों से समस्या
नेताओं ने स्पष्ट किया कि समस्या पालतू कुत्तों से नहीं, बल्कि सड़कों पर घूमने वाले आवारा कुत्तों से है। लगातार बढ़ रहे हमलों और रेबीज के मामलों को देखते हुए सख्त कदम उठाने की मांग की जा रही है।
3. गोपाल भार्गव का तीखा बयान
पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने कहा कि जब सरकार 80 करोड़ लोगों को राशन दे रही है और अभी भी सबको पर्याप्त संसाधन नहीं मिल पा रहे हैं, तो ऐसे में आवारा कुत्तों की आवश्यकता क्या है। उन्होंने कुत्तों की नस्ल खत्म करने तक की बात कही और डॉग लवर्स को भी बड़ी समस्या बताया।
4. एंटी रेबीज वैक्सीन पर स्वास्थ्य मंत्री का जवाब
स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि एंटी रेबीज टीके की गुणवत्ता में कोई कमी नहीं है। सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य व्यवस्थाएं सुदृढ़ की जा रही हैं।
5. कैलाश विजयवर्गीय बोले- सभी सुझावों पर होगा मंथन
वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि इस मुद्दे पर सभी पक्षों के सुझाव लिए गए हैं। सरकार व्यापक मंथन के बाद ही कोई ठोस निर्णय लेगी, ताकि मानवीय और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए समाधान निकाला जा सके।
आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सदन में तीखी बहस, पक्ष–विपक्ष आमने-सामने
भोपाल में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर विधानसभा में जोरदार टकराव देखने को मिला। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत उठाए गए इस मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
विधायक अतीक अकील ने आरोप लगाया कि शहर में कुत्तों की नसबंदी को लेकर केवल शोर मचाया गया, जबकि इसके लिए आवंटित राशि का सही उपयोग नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि आवारा कुत्तों के हमलों से छोटे-छोटे बच्चों की मौतें हुई हैं। उनका यह भी कहना था कि श्मशान घाट और कब्रिस्तान जैसे स्थान आवारा कुत्तों के अड्डे बन गए हैं। उन्होंने भोपाल के पास शेल्टर होम बनाने की घोषणा का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
वहीं विधायक बजवर सिंह शेखावत ने कहा कि आवारा कुत्तों के मामलों की जिम्मेदारी नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के पास है, लेकिन इस दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि “हमारे कुत्ता मंत्री सुन ही नहीं रहे हैं।” इस पर आपत्ति जताते हुए विधायक उमाकांत शर्मा ने कहा कि इंसान आतंकवादी होते हैं, लेकिन यहां कुत्तों को आतंकवादी बताया जा रहा है, जो उचित नहीं है।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सदन को बताया कि इस मामले में चार विभाग शामिल हैं और सभी मिलकर प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास आई स्वास्थ्य रिपोर्ट में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि कुत्ते के काटने से किसी की मौत हुई हो। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नसबंदी करने वाले डॉक्टरों की संख्या कम है और संसाधनों की कमी के कारण काम प्रभावित हो रहा है।
विपक्ष की ओर से बजट और भ्रष्टाचार को लेकर भी सवाल उठाए गए। इस बीच मंत्री प्रहलाद पटेल ने आपत्तिजनक शब्दों को कार्यवाही से हटाने की मांग करते हुए कहा कि यदि कोई आरोप है तो उसके प्रमाण सदन के पटल पर रखे जाएं, केवल हवाई आरोप नहीं लगाए जा सकते।
कुल मिलाकर, आवारा कुत्तों का मुद्दा सदन में गंभीर बहस का कारण बना रहा, जहां एक ओर बच्चों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य का सवाल उठाया गया, तो दूसरी ओर प्रशासनिक कार्रवाई और संसाधनों की कमी पर चर्चा हुई।