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UP: तीन साल में 12 हजार करोड़ की चोरी... शेल फर्म बनाकर आईटीसी खपाने वाले सिंडिकेट पर कार्रवाई तेज
Wed, 12 Aug 2026 10:30 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ
अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Wed, 12 Aug 2026 10:30 AM IST
सार
यूपी में प्रवर्तन कार्रवाई में गिरफ्तारी का आंकड़ा भी बढ़ा है। 2023-24 में 11 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 19 और 2025-26 में 25 हो गई। तीन वर्षों में कुल 55 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
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12 हजार करोड़ की टैक्स चोरी।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के जरिये जीएसटी चोरी करने वालों पर प्रदेश में कार्रवाई तेज हुई है। वित्त मंत्रालय के राज्यसभा में रखे आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन वित्तीय वर्षों में प्रदेश में 1356 मामलों में 12015 करोड़ की फर्जी आईटीसी पकड़ी गई। इस दौरान 55 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
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देशभर में पिछले तीन वर्षों में 1.69 लाख करोड़ से अधिक के फर्जी आईटीसी का पता लगाया गया है। इनमें यूपी की हिस्सेदारी करीब 7.07 फीसदी है। प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2023-24 में 271 मामलों में 2113 करोड़ रुपये की चोरी पकड़ी गई थी। वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 5149.69 करोड़ हो गई। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 637 मामलों में 4751 करोड़ की चोरी पकड़ी गई। यानी तीन साल में कर चोरी पकड़ने के मामले दोगुने हो गए।
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यूपी में प्रवर्तन कार्रवाई में गिरफ्तारी का आंकड़ा भी बढ़ा है। 2023-24 में 11 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 19 और 2025-26 में 25 हो गई। तीन वर्षों में कुल 55 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
फर्जी पैन-आधार से बन रही थीं कागजी कंपनियां
सिंडिकेट द्वारा चोरी या जाली पैन और आधार के जरिये फर्जी जीएसटी पंजीकरण हासिल कर कागजों पर कंपनियां खड़ी करने के मामले सामने आए हैं। फर्जी आईटीसी का नेटवर्क लोहा-इस्पात, कपड़ा, प्लास्टिक, कागज, प्लाईवुड, सीमेंट और तांबा जैसे क्षेत्रों से जुड़े मामले सामने आए हैं। सेवाओं में वर्क कॉन्ट्रैक्ट, मैनपावर सप्लाई और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्र भी इसकी चपेट में हैं।
आर्थिक अपराध विशेषज्ञ देवेन्द्र डंग का कहना है कि फर्जी आईटीसी के बढ़ते मामले पकड़ने का मतलब है कि संगठित रूप से जालसाजी करने वालों का सिंडीकेट भी लगातार बढ़ा है। कर विभाग के इस आक्रामक रुख को न्यायपालिका का भी कड़ा समर्थन मिल रहा है। न्यायालय ने इस मामले में स्पष्ट किया कि घोटाले केवल कर चोरी नहीं हैं, बल्कि देश की आर्थिक संप्रभुता पर हमला है। न्यायालय ने आर्थिक अपराधों को क्लास अपार्ट (एक अलग श्रेणी) घोषित करते हुए स्थापित किया कि ऐसे मामलों में सामान्य अपराधों की तरह उदारता नहीं बरती जा सकती।