लखनऊ। कभी त्याग की टीस ने आंखें नम कर दीं, तो कभी एक अनजान मेहमान ने रिश्तों की असली परिभाषा पर सोचने को मजबूर कर दिया। गोमतीनगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में शनिवार को आयोजित नाट्य संध्या रचनादृश्य में मंचित दो नाटकों ‘ठेस’ और ‘अपरिचित’ ने अपनी संवेदनशील कहानियों और दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया। पहला नाटक ‘ठेस’ प्रेम, त्याग, विश्वास और आत्मसम्मान की ऐसी कहानी लेकर आया, जिसने परिवार के लिए सब कुछ न्योछावर करने वाली स्त्री के मौन दर्द को मार्मिक ढंग से सामने रखा। वहीं ‘अपरिचित’ ने आधुनिक विज्ञान और पारिवारिक मूल्यों के बीच उठते सवालों को संवेदनशीलता से प्रस्तुत करते हुए दर्शकों को सोचने पर मजबूर किया। रूपाली चंद्रा, राजीव रंजन सिंह और राजीव त्रिपाठी के सशक्त अभिनय ने दोनों कहानियों को जीवंत बना दिया। भारतीयम और शिवांजना एंटरटेनमेंट के संयुक्त तत्वावधान में प्रस्तुत किए गए दोनों नाटकों को राजीव रंजन सिंह के निर्माण, आशुतोष शुक्ल के लेखन और वरिष्ठ रंगनिर्देशक गोपाल सिन्हा के निर्देशन ने और प्रभावशाली बना दिया। कार्यक्रम में पद्मश्री डॉ. विद्या विंदु सिंह और पद्मश्री डॉ. अनिल रस्तोगी को भारतीयम के संस्थापक पुनीत अस्थाना ने सम्मानित किया।

नाटकों ने संवेदनशील कहानियों और दमदार अभिनय से दिल जीत लिया।

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