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Lucknow News: पुराने इंजन पर ही एथेनॉल का असर, नई इंजन की गाड़ियां भर रहीं रफ्तार
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ई-20 पेट्रोल से गाड़ियों के खराब होने का किया जा रहा दावा।
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लखनऊ। पेट्रोल में एथेनॉल के मिश्रण की चर्चाएं तेज हैं। हर कोई इससे होने वाले फायदे और नुकसान को लेकर चिंतित है। उधर, मैकेनिकल इंजीनियरिंग के विशेषज्ञों का दावा है कि पांच से छह वर्ष पुराने वाहनों के इंजन पर एथेनॉल विपरीत असर डाल रहा है, लेकिन नए इंजन वाली गाड़ियां पूरी ऊर्जा के साथ रफ्तार भर रही हैं और उन पर किसी तरह का खास असर नहीं है।
हीवेट पॉलिटेक्निक में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रभारी एमपी सिंह के अनुसार, पुराने इंजनों में सामान्य पेट्रोल की जगह एथेनॉल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल इंजन के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचा रहा है। पुराने इंजन, खासकर बीएस-4, 100 प्रतिशत पेट्रोलियम आधारित ईंधन के लिए डिजाइन किए गए हैं। इससे इंजन के कई पार्ट्स प्रभावित हो रहे हैं। इसके मुख्य लक्षण और नुकसान में रबर और प्लास्टिक के हिस्सों का गलना। हाइड्रोस्कोपिक प्रकृति की वजह से नमी को सोखना और पानी का टंकी के निचले हिस्से में बैठना, जिससे जंग लगने का खतरा अधिक रहता है।
फ्यूल टैंक, कार्बोरेटर के अंदरूनी हिस्सों और धातुओं में जंग लगना। इंजन का अत्यधिक गर्म होना और माइलेज कम देना है। हालांकि, बीएस-5 और उसके बाद वाले इंजन पर एथेनॉल मिश्रित ईंधन खास असर नहीं डाल रहा है। इसमें उन्नत ईसीयू और सेंसर्स, बेहतर फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम होने से इंजन के परफॉरमेंस पर बुरा प्रभाव नहीं पड़ता, नए इंजनों के वाल्व और वाल्व सीट्स अधिक मजबूत होने की वजह से धातुओं में जंग नहीं लग रही है।
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हीवेट पॉलिटेक्निक में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रभारी एमपी सिंह के अनुसार, पुराने इंजनों में सामान्य पेट्रोल की जगह एथेनॉल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल इंजन के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचा रहा है। पुराने इंजन, खासकर बीएस-4, 100 प्रतिशत पेट्रोलियम आधारित ईंधन के लिए डिजाइन किए गए हैं। इससे इंजन के कई पार्ट्स प्रभावित हो रहे हैं। इसके मुख्य लक्षण और नुकसान में रबर और प्लास्टिक के हिस्सों का गलना। हाइड्रोस्कोपिक प्रकृति की वजह से नमी को सोखना और पानी का टंकी के निचले हिस्से में बैठना, जिससे जंग लगने का खतरा अधिक रहता है।
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फ्यूल टैंक, कार्बोरेटर के अंदरूनी हिस्सों और धातुओं में जंग लगना। इंजन का अत्यधिक गर्म होना और माइलेज कम देना है। हालांकि, बीएस-5 और उसके बाद वाले इंजन पर एथेनॉल मिश्रित ईंधन खास असर नहीं डाल रहा है। इसमें उन्नत ईसीयू और सेंसर्स, बेहतर फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम होने से इंजन के परफॉरमेंस पर बुरा प्रभाव नहीं पड़ता, नए इंजनों के वाल्व और वाल्व सीट्स अधिक मजबूत होने की वजह से धातुओं में जंग नहीं लग रही है।

ई-20 पेट्रोल से गाड़ियों के खराब होने का किया जा रहा दावा।

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