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Lucknow News: मैकू लाल इंटर कॉलेज, अधिकारी बदलते रहे, जांच होती रही, लीज की आड़ में चलता रहा कब्जों का खेल

Mon, 13 Jul 2026 02:48 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jul 2026 02:48 AM IST
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At Maiku Lal Inter College, officials kept changing and inquiries continued, yet the game of encroachment persisted under the guise of the lease.
राम भरोसे मैकू लाल इंटर कॉलेज के अंदर का व हिस्सा जहां की गई प्लाटिंग।
रविशंकर गुप्ता
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लखनऊ। तेलीबाग स्थित राम भरोसे मैकू लाल इंटर कॉलेज की सरकारी जमीन पर लीज के नाम पर कथित बिक्री और कब्जों को लेकर पिछले 10 वर्षों में करीब 60 शिकायतें विभिन्न विभागों को भेजी गईं, लेकिन कार्रवाई न होने से पूरा मामला फाइलों में ही दबकर रह गया। शिकायतों के बाद अधिकारी जांच करने तो पहुंचे, मगर जांच का नतीजा कभी सामने नहीं आया। हर शिकायत के बाद कार्रवाई की उम्मीद जगी, लेकिन अधिकारी बदलते रहे और सरकारी जमीन पर लीज की आड़ में कब्जों का खेल चलता रहा।
प्राथमिक आकलन के मुताबिक जिस सरकारी जमीन पर लीज के नाम पर कब्जे दिए गए, उसकी अनुमानित कीमत करीब 300 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यदि जांच के लिए पहुंचे अधिकारियों ने 30 अप्रैल 1959 के सरकारी अनुबंध की शर्तों का गंभीरता से परीक्षण किया होता तो आज विद्यालय की स्थिति कुछ और होती। सबसे अधिक शिकायतें माध्यमिक शिक्षा विभाग को भेजी गईं। इसके अलावा एलडीए, आवास विकास, नगर निगम और समिति रजिस्ट्रार को भी शिकायतें भेजी गईं।
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2018 में नोटिस के बाद भी ठंडी पड़ गई कार्रवाई
राम भरोसे मैकू लाल इंटर कॉलेज की सरकारी जमीन पर हो रहे अवैध निर्माण को लेकर तत्कालीन आवास विकास परिषद के सचिव एम.पी. सिंह ने वर्ष 2018 में प्रबंधन को नोटिस जारी किया था। नोटिस की प्रति तहसीलदार को भी भेजी गई, लेकिन इसके बाद मामला आगे नहीं बढ़ा। न आवास विकास ने कार्रवाई की और न ही तहसील प्रशासन ने इस दिशा में कोई प्रभावी कदम उठाया।
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निरीक्षण हुए, लेकिन रिपोर्टों में नहीं दिखी सख्ती
विद्यालय प्रबंधन समिति के नाम दर्ज 21.125 एकड़ भूमि की सरकारी शर्तों के अनुसार इस जमीन को किसी भी दशा में बेचा नहीं जा सकता। विद्यालय को माध्यमिक शिक्षा विभाग से प्रतिवर्ष अनुदान भी मिलता है। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों ने निरीक्षण तो किए, लेकिन वे केवल औपचारिकता बनकर रह गए। यदि निरीक्षण की वास्तविक रिपोर्ट शासन को भेजी जाती, तो प्रबंधक के खिलाफ काफी पहले कार्रवाई हो सकती थी।

राम भरोसे मैकू लाल हायर सेकेंडरी स्कूल समिति के प्रबंधक श्रीकांत साहू के अनुसार 1959 में सरकार ने प्रबंधन समिति को जमीन दी थी। उसमें प्रबंधक को पावर है, इसलिए जमीन लोगों को लीज पर दी गई। इसमें माध्यमिक शिक्षा विभाग की अनुमति की भी कोई जरूरत नहीं थी। सरकार ने जो जमीन दी, उसकी मैंने कीमत चुकाई है।

प्रादेशीय मंत्री, माध्यमिक शिक्षक संघ डॉ. आर.पी. मिश्रा के अनुसार, लखनऊ ही नहीं, पूरे उत्तर प्रदेश में सहायता प्राप्त विद्यालयों की जमीन और उनके अस्तित्व पर संकट है। यदि सरकार समय रहते ठोस कानून बनाकर इन विद्यालयों को सुरक्षित नहीं करती है तो आने वाले दिनों में लोग कानूनी पेचों का फायदा उठाकर इसी तरह विद्यालयों की जमीन पर कब्जा करते रहेंगे।
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