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अयोध्या: इस 15 अगस्त को 498 साल बाद बदलेगी राम मंदिर की परंपरा, तीन दिनों में रिकॉर्ड संख्या में पहुंचे भक्त

Mon, 10 Aug 2026 06:16 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: रोहित मिश्र Updated Mon, 10 Aug 2026 06:16 AM IST
सार

Ayodhya Ram Temple: इस 15 अगस्त को अयोध्या राम मंदिर में 498 साल बाद कोई परंपरा बदलने जा रही है। राम जन्मभूमि पर विराजमान रामलला पहली बार नाग पंचमी की बजाय सावन शुक्ल तृतीया से ही झूले पर विराजेंगे। 

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Ayodhya: This August 15, the tradition of Ram temple will change after 498 years, devotees arrived in record n
अयोध्या का राम मंदिर। - फोटो : राम मंदिर ट्रस्ट से साभार।

विस्तार

 श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में इस वर्ष सावन का झूलनोत्सव एक नई ऐतिहासिक परंपरा के साथ मनाया जाएगा। करीब 498 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद राम जन्मभूमि पर विराजमान रामलला पहली बार नाग पंचमी की बजाय सावन शुक्ल तृतीया से ही झूले पर विराजेंगे। 15 अगस्त की शाम सात बजे से शुरू होने वाला यह 12 दिवसीय उत्सव अब तक के सबसे भव्य आयोजनों में शामिल होगा। पहली बार झूलनोत्सव का लाइव प्रसारण कराने की भी तैयारी की जा रही है।

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इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि वर्ष 1528 में मुगल बादशाह बाबर के सेनापति मीर बाकी ने राम जन्मभूमि पर स्थित प्राचीन मंदिर को ध्वस्त कर वहां बाबरी ढांचा बनवाया था। इसके बाद सदियों तक यह स्थल संघर्ष और न्यायिक विवाद का केंद्र बना रहा। इस पूरे कालखंड में रामलला का झूलनोत्सव केवल परंपरा निभाने तक सीमित था। विशेषकर वर्ष 1992 के बाद जब रामलला अस्थायी टाट के मंदिर में विराजमान रहे, तब न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप लकड़ी के साधारण झूले पर प्रतीकात्मक रूप से झूलनोत्सव कराया जाता था। सुरक्षा और कानूनी प्रतिबंधों के कारण न सांस्कृतिक कार्यक्रम होते थे और न ही सार्वजनिक उत्सव का स्वरूप दिखाई देता था।
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2021 में बनवाया गया था चांदी का झूला
 नौ नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। वर्ष 2020 में अस्थायी मंदिर में पहली बार अपेक्षाकृत भव्य झूलनोत्सव आयोजित किया गया और 2021 में रामलला के लिए विशेष चांदी का झूला तैयार कराया गया। हालांकि अब तक इसकी शुरुआत सावन शुक्ल पंचमी से होती थी। इस वर्ष पहली बार यह परंपरा बदली जा रही है। अब झूलनोत्सव का शुभारंभ 15 अगस्त (सावन शुक्ल तृतीया) की शाम सात बजे होगा। निर्धारित शुभ मुहूर्त में रामलला को विशेष रूप से सुसज्जित चांदी के दिव्य झूले पर विराजमान कराया जाएगा। इस बार लगातार 12 दिनों तक श्रद्धालु झूला दर्शन कर सकेंगे। मंदिर परिसर में प्रतिदिन दो घंटे तक भक्ति संगीत, रामभजन, शास्त्रीय संगीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। पूरे परिसर को सजाया जाएगा
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तीन दिनों में तीन लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
 सावन माह शुरू होते ही रामनगरी में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। रामलला के दर्शन के लिए प्रतिदिन एक लाख से अधिक श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। बीते तीन दिनों में लगभग तीन लाख श्रद्धालु रामलला के दर्शन कर चुके हैं। 7 अगस्त को करीब 91 हजार, 8 अगस्त को लगभग 1.15 लाख और 9 अगस्त की शाम सात बजे तक करीब 97 हजार श्रद्धालुओं ने रामलला के दर्शन किए। आगामी झूलनोत्सव को देखते हुए श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है।

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