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Lucknow News: बीमा पॉलिसी के नवीनीकरण का झांसा, बीबीएयू के प्रोफेसर से 50 लाख ठगे

Sat, 24 Oct 2026 01:31 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 24 Oct 2026 01:31 AM IST
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BBAU professor swindled out of 50 lakh through a ruse involving insurance policy renewal
बीमा पॉलिसी के नवीनीकरण का झांसा, बीबीएयू के प्रोफेसर से 50 लाख ठगे
लखनऊ। लैप्स हो चुकी बीमा पॉलिसी को रिन्यू कराने का झांसा देकर साइबर जालसाजों ने बीबीएयू के प्रोफेसर दिनेश राज मोदी से छह महीने में 50.19 लाख रुपये ठग लिए। आरोपी खुद को एलआईसी के हेड ऑफिस के अधिकारी बताकर उनसे अलग-अलग शुल्कों के नाम पर रकम ट्रांसफर कराते रहे। पॉलिसी रिन्यू नहीं हुई और मांग बढ़ती गई तो प्रोफेसर को ठगी का शक हुआ। मामले में बृहस्पतिवार को साइबर क्राइम थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने 22 लाख रुपये फ्रीज करा दिए हैं।
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पीजीआई के एल्डिको-2 निवासी प्रोफेसर मोदी के मुताबिक, बीते अप्रैल में उनके पास अनजान नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने अपना नाम विक्रम सिंह बताया और खुद को दिल्ली स्थित एलआईसी के हेड ऑफिस के अकाउंट डिपार्टमेंट का कर्मचारी बताया। उसने लैप्स हो चुकी पॉलिसी रिन्यू कराने का प्रस्ताव दिया। प्रोफेसर के हामी भरने पर उसने अपने अधिकारी अनित पनवर का मोबाइल नंबर देकर व्हाट्सएप कॉल करने के लिए कहा।
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प्रोफेसर ने अनित से संपर्क किया तो उसने रिन्यूअल की प्रक्रिया के लिए पहले दो लाख रुपये मांगे। प्रोफेसर ने उसके बताए बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कर दी। इसके बाद आरोपियों ने अलग-अलग शुल्कों के नाम पर पैसे मांगना जारी रखा। 16 अप्रैल से 16 अक्तूबर के बीच उनसे करीब 48 लाख रुपये और ट्रांसफर करा लिए गए।
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इसके बावजूद पॉलिसी रिन्यू नहीं हुई। आरोपी लगातार और रकम मांगते रहे तो प्रोफेसर को संदेह हुआ। घरवालों को जानकारी देने पर उन्हें साइबर ठगी का पता चला। इसके बाद उन्होंने एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई और बृहस्पतिवार को साइबर क्राइम थाने पहुंचकर प्राथमिकी दर्ज कराई।


22 लाख रुपये फ्रीज कराए
साइबर क्राइम थाने के इंस्पेक्टर आलोक राव ने बताया कि पीड़ित की तहरीर पर दो आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। टीम ने 22 लाख रुपये फ्रीज करा दिए हैं। आरोपियों के मोबाइल नंबर ट्रेस किए जा रहे हैं।

बीमा पॉलिसी के नाम पर ठगी से ऐसे बचें

- पॉलिसी लैप्स होने या रिन्यूअल के नाम पर अनजान नंबर से आए कॉल और लिंक पर भरोसा न करें।
- प्रीमियम का भुगतान बीमा कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या एप से ही करें।

- एजेंट की पहचान और लाइसेंस की पुष्टि करें।
- कम प्रीमियम, भारी छूट या फंसी रकम तुरंत लौटाने के लालच में न आएं।
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