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UP: बरेली जेल में बंद भोजपुरी अभिनेता है फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड, फर्जी इंस्टीट्यूट चलाता था विनोद, ऐसे फंसा
Mon, 01 May 2023 11:47 AM IST
शाहरुख खान
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, लखनऊ
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 01 May 2023 11:47 AM IST
सार
फर्जी मान्यता देने के मामले का मास्टरमाइंड बरेली जेल में बंद भोजपुरी अभिनेता है। बरेली पुलिस ने भोजपुरी अभिनेता को 13 अप्रैल को स्थानीय थाने में दर्ज किए गए केस में जेल भेजा था। लखनऊ पुलिस अब उसको अपने केस में शामिल करने के लिए कोर्ट से बी-वारंट लेगी।
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विस्तार
पैरा मेडिकल संस्थानों को फर्जी मान्यता देने के मामले में पुलिस की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड एक भोजपुरी अभिनेता है। वह बरेली जेल में बंद है। दो सप्ताह पहले ही बरेली पुलिस ने उसको इसी तरह के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा है। उसका एक साथी भी शामिल है। विभूतिंखड पुलिस भी उसकी तलाश में थी।
तस्दीक करने के बाद पुलिस अब कोर्ट से बी-वारंट लेकर आरोपी को अपने केस में शामिल करेगी। बरेली पुलिस से भी पूरे प्रकरण की जानकारी लेकर दस्तावेज जुटाए हैं। उप्र स्टेट मेडिकल फैकल्टी के सचिव डॉ. आलोक कुमार ने 19 अप्रैल को विभूतिखंड थाने में एक एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप था कि स्टेट पैरा मेडिकल फैकल्टी के नाम से फर्जी वेबसाइट बनाई गई।
जिसको संचालित करने वाले लोगों ने प्रदेश में करीब सवा सौ संस्थानों को फर्जी मान्यता दे दी गई। इसका दफ्तर साइबर हाईट्स बिल्डिंग में है। पुलिस की दबिश के बाद से उसमें ताला पड़ गया था। वहां के कर्मचारियों को पुलिस ने फर्जीवाड़े की जानकारी दे थी।
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पुलिस ने तफ्तीश शुरू की तो पता चला कि बरेली निवासी विनोद यादव नाम का शख्स मास्टरमाइंड है। जब पुलिस बरेली पहुंची तो पता चला कि 13 अप्रैल को बरेली के इज्जतनगर थाने की पुलिस ने विनोद व उसके साथ जगदीश चंद्रा को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस के मुताबिक विनोद भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में भी काम कर चुका है।
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तस्दीक करने के बाद पुलिस अब कोर्ट से बी-वारंट लेकर आरोपी को अपने केस में शामिल करेगी। बरेली पुलिस से भी पूरे प्रकरण की जानकारी लेकर दस्तावेज जुटाए हैं। उप्र स्टेट मेडिकल फैकल्टी के सचिव डॉ. आलोक कुमार ने 19 अप्रैल को विभूतिखंड थाने में एक एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप था कि स्टेट पैरा मेडिकल फैकल्टी के नाम से फर्जी वेबसाइट बनाई गई।
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जिसको संचालित करने वाले लोगों ने प्रदेश में करीब सवा सौ संस्थानों को फर्जी मान्यता दे दी गई। इसका दफ्तर साइबर हाईट्स बिल्डिंग में है। पुलिस की दबिश के बाद से उसमें ताला पड़ गया था। वहां के कर्मचारियों को पुलिस ने फर्जीवाड़े की जानकारी दे थी।
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पुलिस ने तफ्तीश शुरू की तो पता चला कि बरेली निवासी विनोद यादव नाम का शख्स मास्टरमाइंड है। जब पुलिस बरेली पहुंची तो पता चला कि 13 अप्रैल को बरेली के इज्जतनगर थाने की पुलिस ने विनोद व उसके साथ जगदीश चंद्रा को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस के मुताबिक विनोद भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में भी काम कर चुका है।
फर्जी इंस्टीट्यूट चलाता था विनोद
बरेली में पीलीभीत बाईपास पर स्थित इंडियन पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट भी फर्जी मान्यता पर चल रहा था। बरेली पुलिस ने इस प्रकरण में विनोद व जगदीश को जेल भेजा था। विनोद व जगदीश मिलकर ये इंस्टीट्यूट चलाते थे। जिसमें जगदीश प्रिंसिपल था। सैकड़ों छात्र-छात्राओं के भविष्य को चौपट कर दिया।
बरेली में पीलीभीत बाईपास पर स्थित इंडियन पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट भी फर्जी मान्यता पर चल रहा था। बरेली पुलिस ने इस प्रकरण में विनोद व जगदीश को जेल भेजा था। विनोद व जगदीश मिलकर ये इंस्टीट्यूट चलाते थे। जिसमें जगदीश प्रिंसिपल था। सैकड़ों छात्र-छात्राओं के भविष्य को चौपट कर दिया।
लाखों रुपये भी कमाए। पुलिस अब पता कर रही है कि इन दोनों के अलावा अन्य किसी की भूमिका फर्जीवाड़े में है या नहीं। विभूतिखंड पुलिस ने फर्जीवाड़े संबंधी तमाम दस्तावेज, विनोद के बैंक खाते का विवरण आदि खंगालना शुरू किया है।
खातों में ट्रांजेक्शन कर फंसा
फर्जी मान्यता देने के खेल में पुलिस को अहम सुबूत मिला है। पूरा खेल ऑनलाइन था। मान्यता संबंधी जो रकम आरोपी वसूलते थे वह बैंक खाते में लेते थे। बैंक खाते के विवरण से इसका खुलासा हुआ है। पुलिस ने विवेचना में इसको साक्ष्य के तौर पर शामिल किया है। आरोपियों के खिलाफ से बेहद पुख्ता सुबूत है।
फर्जी मान्यता देने के खेल में पुलिस को अहम सुबूत मिला है। पूरा खेल ऑनलाइन था। मान्यता संबंधी जो रकम आरोपी वसूलते थे वह बैंक खाते में लेते थे। बैंक खाते के विवरण से इसका खुलासा हुआ है। पुलिस ने विवेचना में इसको साक्ष्य के तौर पर शामिल किया है। आरोपियों के खिलाफ से बेहद पुख्ता सुबूत है।