बुंदेलखंड: जहां किसानों ने दी जान, वहां जमीनों के दाम पांच गुना... एक्सप्रेस-वे, डिफेंस कॉरिडोर ने बदली तस्वीर
एक्सप्रेस-वे, सोलर परियोजनाओं और डिफेंस कॉरिडोर ने बुंदेलखंड की तस्वीर बदल दी है। परियोजनाओं के बदले किसानों को भारी मुआवजा मिला है। उनका जीवनस्तर भी बदलने लगा है।
विस्तार
बुंदेलखंड बदल रहा है। नए दौर की नई तस्वीर के साथ विकास की नई उंचाइयां छू रहा है। जहां हर साल किसान फसलों में नुकसान से तंग आकर आत्महत्या करते थे अब वहां खेतों के बीच एक्सप्रेसवे हैं। लिंक मार्गों का चौड़ीकरण है। इसके किनारे नई दुकानें हैं। दुकानों में मोबाइल से लेकर सोलर पैनल तक बिक रहे हैं। कई नई परियोजनाएं भी परवान चढ़ रही हैं। जगह- जगह प्लाटिंग चल रही है और प्रापर्टी डीलर पांच गुना तक महंगी हो चुकी जमीनों के लिए गांवों में डेरा डाले हैं, लेकिन लोग जमीन बेचने को तैयार नहीं हैं।
इटावा से शुरू होकर चित्रकूट तक बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे करीब 296 किलोमीटर है। यह जालौन के 64, चित्रकूट के 9, बांदा के 28, महोबा के 8 और हमीरपुर के 29 गांवों से गुजरा है। एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ सोलर प्रोजेक्ट लग रहे हैं। परियोजनाओं के लिए ली गई जमीनों के बदले किसानों को भारी मुआवजा मिला है। इससे पक्के मकान बन गए। घर के बाहर लग्जरी गाड़ियां खड़ी हो गईं। बुंदेलखंड एक्सप्रेस से हम चित्रकूट के गोंडा गांव पहुंचे। यहां दुकानदार विजय शंकर पटेल पहले पत्थर खदान में काम करते थे। अब उनकी अपनी दुकान है और होटल बनाने की तैयारी में है।
ये भी पढ़ें - वजूद पर संकट... फिर भी तेवर बरकरार, मायावती ने कार्यकर्ताओं में भरा जोश, दोहराया संकल्प
ये भी पढ़ें - आज से खुलेंगे स्कूल, परीक्षा व निपुण आकलन में जुटेंगे शिक्षक, 24 से सत्रीय परीक्षाएं होंगी शुरू
हमीरपुर के सरीला निवासी देवमणि यहां जमीन तलाशने आए हैं। वह बताते हैं कि एक्सप्रेसवे के हर टोल प्लाजा के आसपास प्लाटिंग करने वाले जमीन तलाश रहे हैं। मुंहमांगी कीमत देने को तैयार हैं, लेकिन किसान जमीन बेचने को तैयार नहीं है। खोही में मिले किसान बरमपुर निवासी जय नारायण सिंह बताते हैं कि पहले पहाड़ी के आसपास ढाई से तीन लाख रुपये बीघा जमीन मिल जाती थी। अब 10 से 15 लाख में भी नहीं मिल रही है। इसकी वजह वह आवागमन की सुविधा बढ़ने से खरीदारों की संख्या बढ़ना बताते हैं।
बिन मोल की मिट्टी हो गई अनमोल
बुंदेलखंड की बदलती तस्वीर देखने के लिए हमने चित्रकूट से बांदा का रुख किया। यहां के महोखर निवासी आशुतोष बताते हैं कि पिता को दो करोड़ रुपया मुआवजा मिला था। दो भाइयों में बंटवारे के बाद एक छोटा मकान बनवाया और बाकी से प्लाटिंग कर रहे हैं। जमीन के धंधे में मुनाफा खूब है। इसमें खेती न भी करें तो भविष्य में मुनाफा कमा सकें। बांदा के बेंदा गांव के पूर्व प्रधान विवेक सिंह बताते हैं कि अब गिट्टी, मोरंग का काम छोड़ कर तमाम लोग जमीन के काम में उतर रहे हैं। खेती हो या न हो, लेकिन जमीन की खरीद बढ़ी है। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के आसपास के जिलों में छोटी दुकानें अब बड़ी हो रही हैं। ढाबे बढ़ गए हैं। मैगी प्वाइंट से लेकर गेस्ट हाउस तक बन रहे हैं।
अब स्क्वायर फीट में बिक रही जमीन
यमुना और बेतवा पर फोरलेन हाईवे से खेती वाली जमीनों पर मकान बन रहे हैं। जो जमीन पांच सौ रुपये प्रति स्क्वायर फीट थी, वह 1500 से दो हजार तक पहुंच गई। हमीरपुर से कबरई के रास्ते खन्ना से आगे बढ़ते ही एक होटल पर रुके। होटल संचालक जयाशंकर लोधी पहले कानपुर में नौकरी करते थे। अब होटल चलाने के साथ उन्होंने गांव 30 लोगों को रोजगार दिया है।
बताते हैं कि पहले शाम होते ही सिर्फ ट्रकें दिखती थीं। अब 24 घंटे आवागमन है। ऐसे में तीन शिफ्ट में काम करने वालों को रखा है। बांदा से महोबा मार्ग भी फोरलेन बन रहा है। जहां क्रेसर के धूल के गुबार थे। वहां अन्य कारोबार भी बढ़ रहा है। महोबा के बारीपुरा के दयाशंकर चौरसिया बताते हैं कि एक्सप्रेस वे ही नहीं सोलर प्लांट लगाने वाले भी जमीन किराये पर ले रहे हैं। अभी तक जो जमीन खाली रहती थी, वह किराये पर जा रही है। इससे भी लोगों के पास रुपये आए हैं। कनेक्टिविटी बढ़ने से कारखाने, बाजार और होटल तैयार हो रहे हैं।
रोजगार के बढ़े अवसर
बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे से मिली रकम से लोग फोरलेन के किनारे दुकानें खोल रहे हैं। बीटेक की डिग्री लेकर झंसी में एक ब्रांड का शो रूम चलाने वाले पंकज बताते हैं कि सड़कों ने आवागमन आसान किया है। पंकज के मुताबिक पढ़े लिखे युवाओं ने नए तर्ज पर कारोबार का विकास किया है और लोगों की खरीदने की क्षमता भी बढ़ी है। यही वजह है कि दूसरे शहरों में नौकरी कर रहे कई तमाम लोग लौट रहे हैं। जमीन महंगी हो गई है, लेकिन कारोबार बढ़ा है।
