सुना है क्या: 'राजधानी की अलग कहानी', साथ ही 'सेहत महकमे में संक्रमण व सिर्फ कवर पेज ही तो बदलना है' के किस्से
यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'राजधानी की अलग कहानी' की कहानी। इसके अलावा 'सेहत महकमे में संक्रमण' और 'सिर्फ कवर पेज ही तो बदलना है' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...
राजधानी की अलग कहानी
चर्चाओं में रहने वाले एक नौकरशाह पश्चिम से सीधे राजधानी में मलाईदार ओहदे पर पहुंचे हैं। पश्चिम में तैनाती के दौरान हर तरह के मामलों में सुर्खियों में छाए रहने वाले नौकरशाह सोच रहे थे कि नई तैनाती के बाद पिछले मामले ठंडे हो जाएंगे। फिलहाल ऐसा होता नहीं दिख रहा। सिर मुंडाते ही ओले पड़े वाली कहावत चरितार्थ हो रही है क्योंकि पिछले कारनामे उनका पीछा छोड़ने को तैयार नहीं दिख रहे। विभागीय साथियों का कहना है कि अभी संकट टला नहीं है।
सेहत महकमे में संक्रमण
बारिश शुरू होते ही सेहत महकमे में खलबली मची हुई है। इसकी वजह संक्रामक बीमारियां नहीं बल्कि इन बीमारियों को रोकने की जिम्मेदारी निभाने वाले हैं। वे भी मौसम की तरह बदल रहे हैं। कोई बीमारी के बहाने गायब है तो कोई घूमने के लिए छुट्टी ले चुका है। ऐसे में जो लोग बचे हैं। वे यही दुहाई दे रहे हैं कि देखिए यहां का संक्रमण कब खत्म होता है।
सिर्फ कवर पेज ही तो बदलना है
प्रदेश में युवाओं का कौशल निखार कर उनको रोजगार के लिए तैयार करने की कवायद चल रही है लेकिन कई स्तर पर अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं। इसका कारण जिम्मेदार विभाग की कार्यप्रणाली है। हाल ही में नए सत्र में विभाग की ओर से प्रदेशभर में दिशानिर्देश भेजने की कवायद की जा रही है। इसमें एक अधिकारी ने नए नियमों का हवाला दिया तो दूसरे ने कहा कि सिर्फ कवर पेज ही तो बदलना है। ज्यादा नियमों में फंसेंगे तो हो चुका काम। इस पर वहां उपस्थिति एक अन्य अधिकारी ने कहा कि ऐसे तो निखर चुका युवाओं का कौशल।