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मोरपंखी के पौधे से इलाज: कैंसर कोशिकाओं का काल बनेगा यह हर्बल रसायन, दवा बनाने को वैज्ञानिकों ने बढ़ाया कदम

Mon, 05 Oct 2026 11:32 AM IST
Bhupendra Singh विनीत चतुर्वेदी, अमर उजाला, लखनऊ
विनीत चतुर्वेदी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Mon, 05 Oct 2026 11:32 AM IST
सार

फेफड़ों का कैंसर हर्बल इन्हेलर से काबू में आएगा। सीमैप के वैज्ञानिकों ने थूजा यानी मोरपंखी के पौधे से कैंसर की दवा बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। आगे पढ़ें विस्तार से... 

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CIMAP Scientists have taken steps towards developing cancer drug from Thuja plant also known as Morpankhi
थूजा/मोरपंखी पौधा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फेफड़ों के कैंसर की दवा अब खास हर्बल इन्हेलर के जरिये सीधे फेफड़ों तक पहुंचाने की तैयारी है। लखनऊ स्थित केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) के वैज्ञानिकों ने थूजा पौधे से मिले बीटा-थुजाप्लिसिन रसायन को फेफड़ों के कैंसर की कोशिकाओं के नियंत्रण में बेहद असरदार पाया है। चूहों पर हुए परीक्षण में इस रसायन ने कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि रोकने के साथ उन्हें नष्ट करने में भी असर दिखाया है।

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अब वैज्ञानिक इसे हर्बल इन्हेलर के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। उम्मीद के मुताबिक परिणाम मिले तो यह दुनिया का पहला हर्बल कैंसररोधी-इन्हेलर हो सकता है। सीमैप की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आभा मीणा के नेतृत्व में डॉ. शोएब लुकमान, डॉ. रत्ना शेखर और अनुराग माथुर की टीम ने दो साल की मेहनत के बाद यह कामयाबी हासिल की।

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कैंसर सेल को चुन कर किया खत्म

शोध में बीटा-थुजाप्लिसिन ने लंग कैंसर की एच-460 और ए-549 कोशिकाओं को चुनकर निशाना बनाया, जबकि स्वस्थ एल-132 कोशिकाओं पर इसका असर बहुत कम रहा। इसकी मात्रा बढ़ने के साथ कैंसर कोशिकाओं के जीवित रहने की क्षमता घटी और उनका अंधाधुंध बढ़ना रुक गया। साथ ही कैंसर कोशिकाओं के फैलने (माइग्रेशन और इनवेजन) की क्षमता भी कम हुई। शोध में पाया गया कि बीटा-थुजाप्लिसिन ने ओडीसी एंजाइम की गतिविधि घटाई, जो कैंसर कोशिकाओं के तेजी से बढ़ने में मदद करता है।

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कैंसर से मौतों में लंग कैंसर घातक फेफड़ों का कैंसर दुनिया में कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण है। इसकी मृत्यु-दर भी सर्वाधिक है। उत्तर प्रदेश में हर साल लंग कैंसर के करीब 15-18 हजार नए मामलों का अनुमान लगाया जाता है।

इन्हेलर से फेफड़ों तक कैंसर की दवा, आसान नहीं राह

डॉ. आभा मीणा ने बताया कि इन्हेलर के जरिये कैंसररोधी दवा को सीधे फेफड़ों तक पहुंचाने की योजना है। इससे कैंसर प्रभावित हिस्से तक सीधे स दवा पहुंचाने की संभावना बढ़ेगी और शरीर के दूसरे अंगों पर नेगेटिव असर कम किया जा सकेगा। सबसे बड़ी चुनौती दवा को श्वासनली (ट्रैकिया) से फेफड़ों तक सुरक्षित पहुंचाना है। रसायन की सही मात्रा, फार्मूलेशन, फेफड़ों में दवा के वितरण और सुरक्षा की जांच बाकी है।

थूजा पौधे के बारे में जानें 

थूजा (मोरपंखी) सरू परिवार का सदाबहार शंकुधारी पौधा है। इसका वैज्ञानिक नाम प्लैटिक्लाडस ओरिएंटेलिस है। इसकी मूल उत्पत्ति चीन, कोरिया और रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्रों में मानी जाती है। भारत में यह मुख्यतः सजावटी पौधे के रूप में घरों, बागीचों में लगाया जाता है।

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