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धर्मांतरण मामला: दिल्ली धमाके के बाद छापे के डर से डॉ खालिदा ने छोड़ी थी नौकरी, एसटीएफ की जांच में अहम खुलासा

Tue, 03 Nov 2026 09:50 AM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Tue, 03 Nov 2026 09:50 AM IST
सार

केजीएमयू धर्मांतरण और संदिग्ध गतिविधियों के मामले में एसटीएफ की जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है। इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में कार्यरत डॉ. खालिदा नसीम ने दिल्ली धमाके के तुरंत बाद डर के कारण नौकरी छोड़ दी थी, क्योंकि उन्हें जांच एजेंसियों की रडार पर आने और छापों का अंदेशा था।

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Conversion case Dr. Khalida left her job fearing raids after Delhi blasts STF investigation reveals facts
केजीएमयू में धर्मांतरण।

विस्तार

राजधानी लखनऊ स्थित केजीएमयू धर्मांतरण प्रकरण की जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ। इंटीग्रल विश्वविद्यालय में कार्यरत डॉ. खालिदा नसीम ने दिल्ली धमाके के वक्त जो नौकरी छोड़ी थी, उसकी वजह डर था। उनको अंदेशा था कि जांच एजेंसियों की रडार पर वह न आ जाएं। उनको भी छापे का डर था। ये तथ्य एसटीएफ की जांच में आया था। अब सवाल है कि आखिर ऐसा उनका क्या कनेक्शन था कि वह इसको लेकर दहशत में थीं। अगर जांच एजेंसी आगे तफ्तीश करती हैं तो इसका जवाब मिल पाएगा।
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दरअसल, एसटीएफ की जांच में सामने आया था कि डॉ नसीम खान इंटीग्रल विवि में कार्यरत हैं। इसके पहले वह केजीएमयू में थे। जांच में सामने आया कि उन्होंने डॉ. खालिदा से निकाह किया था। खालिदा भी पहले केजीएमयू में थीं, फिर इंटीग्रल विवि में नौकरी जॉइन कर ली थी। 
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हैरानी की बात ये है कि जब वर्ष 2025 में दिल्ली में लाल किला के पास धमाका हुआ था तो उसी दौरान खालिदा ने नौकरी छोड़ दी थी। इसको एसटीएफ ने बेहद गंभीरता से रिपोर्ट में लिखा है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ न कुछ कनेक्शन इसमें रहा है। शायद खालिदा और शाहीन के बीच। जिस वह से उन्होंने कार्रवाई के डर से नौकरी छोड़ी थी।
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तमाम डॉक्टर एक ही ग्रुप से जुड़े थे

धर्मांतरण मामले में डॉ. रमीज जेल भेजा गया था। पुलिस की जांच में सामने आया था कि वह और ब्लास्ट की वारदात की आरोपी शाहीन के भाई के साथ एक ही ग्रुप में जुड़े हुए थे। सूत्रों के मुताबिक, रमीज के साथ वाले सभी इस ग्रुप का हिस्सा था। इसी से शायद खालिदा का कोई कनेक्शन रहा है। अब उनकी भूमिका किसी घटना की साजिश आदि में है या नहीं इस बारे में जांच रिपोर्ट में नहीं लिखा गया है। हां ये जरूर है कि उसमें लिखा है कि घटना के वक्त ही खालिदा ने नौकरी छोड़ी थी।

छह वर्ष में हुईं की घटनाएं

एसटीएफ की जांच में सामने आया कि वर्ष 2006 से 2012 के बीच धर्मांतरण की घटनाएं केजीएमयू में हुईं। इसमें तत्कालीन पीएस टू वीसी की भूमिका अहम बताई गई है। चूंकि ये प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है। अगर इस पर आगे कोई एजेंसी विस्तृत जांच करती है या केस दर्ज किया जाता है तो धर्मांतरण के खेल की और परतें खुलेंगे। जिम्मेदारों पर कानूनी शिकंजा भी कसेगा।
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