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AI: एआई पर अंधविश्वास न करें, इसे टूल बनाएं... विशेषज्ञों ने सुझाए इसके सही इस्तेमाल के तरीके

अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 28 Jan 2026 01:45 PM IST
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सार

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) और छत्रपति शाहू जी महाराज विवि, कानपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित एआई मंथन में विशेषज्ञों ने चर्चा की और कहा कि इसका इस्तेमाल एक टूल की तरह करें। उन्होंने इसके सही इस्तेमाल के तरीके भी बताए।

Discussion on AI in AKTU: Don't blindly trust AI, make it a tool
राज्यपाल ने देखी प्रदर्शनी व रोबोट 'विद्युत' - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) का इस्तेमाल बेहद आसान है, लेकिन हमें इस पर अंधा विश्वास नहीं करना चाहिए। इसमें भी गलतियां होती हैं। बेहतर परिणाम के लिए इसका इस्तेमाल टूल की तरह करना चाहिए। कलाम सेंटर के संस्थापक सृजन पाल सिंह ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) में विश्वविद्यालय और छत्रपति शाहू जी महाराज विवि, कानपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित एआई मंथन के दौरान ये बातें कहीं।

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सृजन पाल सिंह ने कहा कि एलन मस्क के मुताबिक आने वाले समय में हर घर में दो रोबोट होंगे, लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारा दिमाग रोबोट या एआई से एक लाख गुना ज्यादा तेजी से काम करता है। हमारा दिमाग पांच लाख आईफोन से ज्यादा तेजी से प्रोसेसिंग करता है।
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1500 टेराबाइट वाली हार्ड डिस्क से ज्यादा क्षमता हमारे दिमाग में है। एआई बिना कमांड के काम नहीं कर सकता है। इंसानी दिमाग खुद सृजन करता है। इमोशंस नहीं होने के कारण एआई निर्णय लेने में गलती करता है। एआई से रोजगार खत्म होने पर उन्होंने कहा कि कुछ जॉब तो बदलेंगे, लेकिन यह पूरी तरह व्यक्ति का स्थान नहीं ले सकता।

एआई प्रयोग के बेहतर तरीके
- एआई एप को सही निर्देश दें
- सही कंटेस्ट, फार्मेट व लेंथ बताएं
- एआई से तैयार सामग्री दोबारा चेक करें

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के नोटिफिकेशन से उत्पादकता प्रभावित

एआई मंथन में राइस फाउंडेशन दिल्ली के संस्थापक मधुकर वार्ष्णेय ने कहा कि हम दैनिक जीवन में गूगल मैप, यूट्यूब चैटबोट, इंस्टाग्राम, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनके नोटिफिकेशन ऑन रखते हैं, जिससे हमारी उत्पादकता प्रभावित हो रही है। मीडिया प्रबंधन व सोशल मीडिया में एआई की उपयोगिता सत्र में उन्होंने कहा कि ज्यादातर यूजर्स काम के बीच नोटिफिकेशन देखने लगते हैं और फिर उसी में उलझ जाते हैं।

अंतरराष्ट्रीय शोध का हवाला देते हुए बताया कि नोटिफिकेशन की वजह से हर 20-30 सेकंड में यूजर्स डिस्ट्रैक्ट होते हैं, इसलिए इसे बंद रखना चाहिए। मधुकर ने कहा कि सोशल मीडिया नशा बन गया है। यह हमारी मानसिक अशांति बढ़ा रहा है। हमें खाने, चाय के समय सोशल मीडिया का प्रयोग बंद करना होगा। उन्होंने कहा कि एआई आपकी रुचि जानकर उससे जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराता है। एआई मानव से ही सीखता है। लिहाजा आप सृजनात्मकता और बुद्धिमत्ता से इसका बेहतर प्रयोग कर सकते हैं। 

सोशल मीडिया के इस्तेमाल में सावधानी
व्यक्तिगत डेटा एआई से साझा न करें, जरूरी चैनल सब्सक्राइब कर इस्तेमाल करें, बच्चों की रचनात्मकता बढ़ाने पर ध्यान दें, बच्चों को गुड और बैड इंटरनेट के बारे में बताएं, मेडिटेशन से दिमाग को सही दिशा मिलेगी।

600 एआई डाटा लैब बना रहे, फेलोशिप भी दे रहेः अभिषेक सिंह

दो दिवसीय मंथन के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अभिषेक सिंह ने कहा कि एआई कॅरिकुलम के जरिये उच्च शिक्षा में अहम बदलाव लाया जा सकता है। एआई के मामले में अमेरिका और चीन काफी आगे हैं। हमें इस गैप को तेजी से कम करना होगा। एआई को बनाने के लिए सुपर कंप्यूटर की जरूरत होती है। आज विश्व अमेरिका के मॉडल पर निर्भर है। भारत अपने मॉडल पर काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि एआई में काम करने वाले छात्रों को फेलोशिप दी जा रही है। देशभर में 600 डाटा लैब बना रहे हैं, ताकि छोटे शहरों के छात्रों को डाटा साइंटिस्ट बनाया जा सके। ध्यान देने की जरूरत है कि छात्र किस एआई टूल का प्रयोग कर रहे हैं। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विभिन्न विभागों की समस्याएं विश्वविद्यालयों में भेजकर समाधान के लिए प्रयास करना चाहिए। नई नीतियों को तेजी से बनाने के साथ ही लागू करने पर जोर देने की जरूरत है।

आईआईटी खड़गपुर के प्रो. पीपी चक्रवर्ती ने कहा कि आत्मनिर्भर एआई भारत के लिए सबसे जरूरी है। कार्यशाला में प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल, एकेटीयू कुलपति प्रो. जेपी पांडेय, आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक डिपार्टमेंट की विशेष सचिव व यूपीडेस्को की एमडी नेहा जैन, नरेंद्र भूषण, पंधारी यादव, विनीता दीक्षित, डॉ. अहलाद कुमार और डॉ. सुधीर एम बोबडे ने भी विचार रखे। 

एआई शोध व नवाचार के लिए अहम

कानपुर विवि के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि प्रदेश की उच्च शिक्षा एआई के जरिये नए प्रतिमान स्थापित करेगी। प्रदेश सरकार एआई विश्वविद्यालय को स्थापना करने जा रही है जो एआई के शोध और नवाचारों के लिए एक अहम कदम है।

27 राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षक बने छात्र
एआई मंथन में 27 राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपति, रजिस्ट्रार, परीक्षा नियंत्रक व 10-10 शिक्षक एक छात्र के रूप में शामिल हो रहे हैं। कई सत्रों में जब विशेषज्ञों ने इसका प्रयोग कराया तो वे फोन व कॉपी-पेन से सवालों को छात्र की तरह हल करते दिखे। राज्यपाल दिनभर आयोजन में रहीं। 

रोबोट 'विद्युत' देगा लाइव जानकारी, खुद चार्ज भी हो जाएगा
एआई मंथन में कैलाश इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी गोरखपुर के छात्रों के रोबोट "विद्युत" ने खूब आकर्षित किया। बीटेक फाइनल ईयर के छात्र अंकित कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने 4.5 लाख रुपये में यह रोबोट मंगाया है। यह रोबोट कहीं से भी कंट्रोल किया जा सकता है। आपको यह लाइव फीड भी भेजेगा। यह 10-15 किलो तक सामान ले जा सकता है। एक बार चार्ज होने पर यह 4.30 घंटे चलेगा और 10 फीसदी बैटरी रहने पर खुद ही चार्जिंग ले लेगा।

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