यूपी: राज्य चुनाव आयोग ने की राजनीतिक दलों के साथ बैठक, सूची के नाम मलयालम भाषा में छपने पर हुआ विवाद
SIR in UP: एसआईआर के दूसरे चरण में 6 जनवरी से 6 फरवरी तक दावे और आपत्तियां दर्ज की जा सकती हैं। सभी राजनीतिक दलों से सक्रिय रहने को कहा गया है।
विस्तार
प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ पांचवीं बार राज्यस्तरीय बैठक की। उन्होंने बताया कि सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कौन एईआरओ (सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी) किस जगह पर बैठकर सुनवाई करेगा। इसकी जानकारी सभी राजनीतिक दलों को दी जाए। अगर किसी कारण से कोई मतदाता सुनवाई में उपस्थित नहीं हो पा रहा है, तो वह अपने प्रतिनिधि के रूप में किसी को नामित कर सुनवाई के लिए भेज सकता है।
रिणवा ने प्रतिनिधियों को विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान दावे व आपत्तियों का निस्तारण और नोटिस जारी किए जाने व इस पर हो रही सुनवाई की प्रक्रिया की जानकारी दी। बताया कि जिन मतदाताओं ने अपना गणना प्रपत्र भरा है और उनका वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग नहीं हो सका है उनसे नोटिस के जरिये साक्ष्य मांगे गए हैं। ऐसे मतदाताओं की संख्या 1.04 करोड़ हैं। करीब 2.22 करोड़ ऐसे मतदाता चिह्नित हैं, जिनकी मैपिंग में तार्किक विसंगतियां पाई गई हैं। इन मतदाताओं को भी नोटिस जारी कर अभिलेखीय साक्ष्य मांगे जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि एसआईआर के दूसरे चरण में 6 जनवरी से 6 फरवरी तक दावे और आपत्तियां दर्ज की जा सकती हैं। इस अवधि में एक बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) भी प्रतिदिन 10 फॉर्म तक जमा कर सकते हैं। 6 जनवरी से 27 फरवरी तक नोटिस चरण में सुनवाई व सत्यापन के साथ दावे एवं आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। 6 मार्च को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन होगा। उन्होंने बताया कि सभी बूथों पर 31 जनवरी को प्रकाशित मतदाता सूची के मसौदा को एक बार फिर पढ़ा जाएगा।
अधिक से अधिक नए मतदाता बनाने का आह्वान
राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को नोटिस की जानकारी प्राप्त करने और डॉक्यूमेंट अपलोड करने की ऑनलाइन व्यवस्था की भी जानकारी दी गई। उन्होंने सभी दलों से एसआईआर के काम में पूर्ण सहयोग करने और अपने बीएलए के माध्यम से अधिक से अधिक फॉर्म-6 भरवाए जाने का भी आह्वान किया। बैठक में भाजपा, सपा, कांग्रेस, बसपा, आम आदमी पार्टी, अपना दल (एस) और सीपीआई(एम) के प्रतिनिधि शामिल हुए।
बूथ पर जाकर एईआरओ करें नोटिसों की सुनवाई
एसआईआर में नोटिसों की सुनवाई के लिए मतदाताओं को 8 से 10 किलोमीटर दूर सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है, राजनीतिक दलों ने इस पर आपत्ति जताई। कई वोटरों को बिना किसी त्रुटि के नोटिस जारी होने की जानकारी दी। इस पर एईआरओ को बूथ पर जाकर नोटिसों की सुनवाई करने के निर्देश दिए गए। बैठक में सामने आया कि सभी दलों के 5.75 लाख बीएलए हैं और उन्होंने करीब 20 हजार से अधिक फॉर्म ही अब तक भरवाए हैं। वहीं भाकपा (मार्क्सवादी) के 315 बीएलए हैं और इन्होंने एक भी फॉर्म नहीं भरवाया है।
वाराणसी में मसौदा मतदाता सूची में मलयालयम में नाम
वाराणसी की कैंट विधानसभा क्षेत्र की मसौदा मतदाता सूची में दो मतदाताओं के नाम मलयालम में प्रकाशित होने का मामला सामने आया है। इसको लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है, क्योंकि यूपी में मतदाता सूची हिंदी या उर्दू में ही मिलती है।
सपा के प्रतिनिधियों ने यह मामला मंगलवार को चुनाव आयोग की बैठक में उठाया। वाराणसी की कैंट विधानसभा क्षेत्र के पोलिंग बूथ संख्या 145 के क्रम संख्या 73 पर मतदाता व उसके पति का नाम मलयालम में हैं, जबकि पता हिंदी में है। इसी तरह क्रमांक-90 पर भी ब्योरा मलयालम में दर्ज है।
आयोग बोला मानवीय त्रुटि
इस बारे में मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा का कहना है कि ये मतदाता केरल से उत्तर प्रदेश में स्थानांतरित हुए हैं। उन्होंने अपना ब्योरा अंग्रेजी में भरा है, जबकि सॉफ्टवेयर ने स्थानीय भाषा हिंदी के स्थान पर पूर्व में मलयालम में दिए गए ब्योरे को ही उठा लिया। यह देखने की जिम्मेदारी ईआरओ और बीएलओ की थी, जिन्होंने इस पर गौर नहीं किया। यह मानवीय त्रुटि है।
46 विधानसभा क्षेत्रों में उर्दू में भी प्रकाशित होती है सूची
यहां बता दें कि यूपी में मतदाता सूची हिंदी में प्रकाशित होती है, जबकि 46 विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची हिंदी के साथ-साथ उर्दू में भी प्रकाशित होती है। इन 46 विधानसभा क्षेत्रों में उर्दू समझने व पढ़ने वाली आबादी अधिक है। इस तरह से यूपी में हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू (46 विधानसभा क्षेत्र) में ब्योरा लिया जाता है।
