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Lucknow News: केजीएमयू में खून की कमी दूर करने आगे आए महादानी
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केजीएमयू में रक्तदान करतीं प्रो. तूलिका चंद्रा।
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लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में ए और एबी पॉजीटिव रक्त समूह की कमी दूर करने के लिए शनिवार को कई महादानी ब्लड बैंक पहुंचे। इस संकट के संबंध में अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद डॉक्टरों और कर्मचारियों के साथ सामान्यजन ने भी रक्तदान किया। दिनभर में 30 यूनिट रक्तदान हुआ।
केजीएमयू का ब्लड एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग प्रदेश का सबसे बड़ा ब्लड बैंक है। इस समय यहां ए और एबी पॉजीटिव ब्लड ग्रुप की कमी है। इसे दूर करने के लिए शनिवार से विशेष ब्लड बैंक शिविर शुरू किया गया। पहल में विभाग की महिला संकाय की सदस्यों और कर्मचारियों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की प्रमुख प्रो. तूलिका चंद्रा की अगुवाई में लगाए गए शिविर में डॉ. किसलय मिश्रा, डॉ. शिवम आजाद, डॉ. विजय प्रताप, डॉ. अनुराग कुमार सहित कई चिकित्सकों और कर्मचारियों ने स्वैच्छिक रक्तदान किया।
पूरे सप्ताह चलेगा अभियान
केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय में पूरे सप्ताह रक्तदान अभियान चलेगा। ए और एबी पॉजिटिव रक्त समूह के चिकित्सक, एमबीबीएस, बीडीएस, नर्सिंग और पैरामेडिकल छात्र-छात्राएं मरीजों की मदद के लिए योगदान देंगे। इस दौरान कोई भी व्यक्ति रक्तदान के लिए आ सकता है।
हर तीन महीने पर दे सकते हैं खून
डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि स्वस्थ व्यक्ति हर तीन महीने में खून दे सकता है। नियमित रक्तदान से शरीर में आयरन का संतुलन बना रहता है। इससे हृदय रोगों का खतरा पांच फीसदी तक कम हो सकता है। रक्तदान के बाद शरीर कुछ ही दिनों में नया खून बनाना शुरू कर देता है, जिससे रक्त निर्माण की प्रक्रिया सक्रिय रहती है।
रक्तदान के साथ हो जाती हैं निशुल्क जांचें
रक्तदान से पहले और दान किया खून किसी को चढ़ाने से पहले भी कई जांचें की जाती हैं। इनमें एचआईवी, एचसीवी, एचबीएसएजी, सिफलिस और मलेरिया जैसी जांचें शामिल होती हैं। इनका रक्तदाता से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है।
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केजीएमयू का ब्लड एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग प्रदेश का सबसे बड़ा ब्लड बैंक है। इस समय यहां ए और एबी पॉजीटिव ब्लड ग्रुप की कमी है। इसे दूर करने के लिए शनिवार से विशेष ब्लड बैंक शिविर शुरू किया गया। पहल में विभाग की महिला संकाय की सदस्यों और कर्मचारियों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की प्रमुख प्रो. तूलिका चंद्रा की अगुवाई में लगाए गए शिविर में डॉ. किसलय मिश्रा, डॉ. शिवम आजाद, डॉ. विजय प्रताप, डॉ. अनुराग कुमार सहित कई चिकित्सकों और कर्मचारियों ने स्वैच्छिक रक्तदान किया।
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पूरे सप्ताह चलेगा अभियान
केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय में पूरे सप्ताह रक्तदान अभियान चलेगा। ए और एबी पॉजिटिव रक्त समूह के चिकित्सक, एमबीबीएस, बीडीएस, नर्सिंग और पैरामेडिकल छात्र-छात्राएं मरीजों की मदद के लिए योगदान देंगे। इस दौरान कोई भी व्यक्ति रक्तदान के लिए आ सकता है।
हर तीन महीने पर दे सकते हैं खून
डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि स्वस्थ व्यक्ति हर तीन महीने में खून दे सकता है। नियमित रक्तदान से शरीर में आयरन का संतुलन बना रहता है। इससे हृदय रोगों का खतरा पांच फीसदी तक कम हो सकता है। रक्तदान के बाद शरीर कुछ ही दिनों में नया खून बनाना शुरू कर देता है, जिससे रक्त निर्माण की प्रक्रिया सक्रिय रहती है।
रक्तदान के साथ हो जाती हैं निशुल्क जांचें
रक्तदान से पहले और दान किया खून किसी को चढ़ाने से पहले भी कई जांचें की जाती हैं। इनमें एचआईवी, एचसीवी, एचबीएसएजी, सिफलिस और मलेरिया जैसी जांचें शामिल होती हैं। इनका रक्तदाता से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है।
