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दूसरों को खुश करते करते खुदकुशी मत कर लीजिए : गौर गोपाल दास
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अमर उजाला संवाद में प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपाल दास ने दिए सफलता के मंत्र
लखनऊ। सफलता हर कोई चाहता है, खुश भी रहना चाहता है लेकिन जीवन की आपाधापी में सुखी जीवन का सपना पीछे छूट जाता है। जीवन में सफलता और सुख का आधार क्या होना चाहिए, इस पर विश्व प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपाल दास ने कहा कि हर किसी को खुश करना संभव नहीं है, इसलिए व्यक्ति को अपनी खुशी और मानसिक शांति को प्राथमिकता देनी चाहिए। कहा, दूसरों को खुश करते करते खुदकुशी मत कर लीजिए।
राजधानी के सेंट्रम होटल में आयोजित दो दिवसीय अमर उजाला संवाद के पहले दिन पहले सत्र की शुरुआत गौर गोपाल दास के व्याख्यान से हुई। नामचीन हस्तियों और दर्शकों से खचाखच भरे हॉल में उन्होंने कभी गीतों के जरिए तो कभी शायरी और कविताओं के जरिये दर्शकों को जीवन के गूढ़ रहस्यों से अवगत कराया। सुप्रभात लखनऊ से कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा कि शांति और सुखी जीवन का सबसे बड़ा सूत्र है कि लोगों को खुश करना बंद कर दें। इस बात को उन्होंने एक गीत के जरिये बयां किया कि कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना...। उन्होंने कहा कि डूबना अच्छा होता है, लेकिन डूबते-डूबते टूटना ठीक नहीं होता।
अपने बगीचे को पानी दो, तितलियां अपने आप आएंगी
उन्होंने कविता सुनाई - एक बचपन का जमाना था, जिसमें खुशियों का खजाना था। चाहत चांद को पाने की थी, पर दिल तितली का दीवाना था। खबर न थी सुबह की, ना शाम का ठिकाना था। थक कर आना स्कूल से, पर खेलने भी जाना था। बोले, सोशल मीडिया ने एक तरफ देश को महत्वाकांक्षी बना दिया है, दूसरी तरफ अवसाद से ग्रस्त कर दिया है। दूसरों के बगीचे में देखते-देखते अपनी घास सूख जाती है। अपनी घास और अपने बगीचे को पानी दो, तितलियां अपने आप आ जाएंगी।
चिंता और चिता में ज्यादा फर्क नहीं
गौर गोपाल दास ने कहा, हर किसी को प्रॉब्लम सोल्विंग चाहिए, चिंता में रहते हैं। चिंता और चिता में ज्यादा फर्क नहीं है। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, कोई अपने पति या पत्नी से परेशान है, कोई करियर की समस्या से। इसका एक आसान तरीका है कि अपनी जिंदगी की परेशानी को सामने रखें। पति-पत्नी को एक दूसरे से दिक्कत है तो अपने फोन के वॉलपेपर पर साथी की फोटो लगाएं और उसे देखें। समस्या को सुलझाने से ज्यादा उसे समझना जरूरी है।
लखनऊ। सफलता हर कोई चाहता है, खुश भी रहना चाहता है लेकिन जीवन की आपाधापी में सुखी जीवन का सपना पीछे छूट जाता है। जीवन में सफलता और सुख का आधार क्या होना चाहिए, इस पर विश्व प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपाल दास ने कहा कि हर किसी को खुश करना संभव नहीं है, इसलिए व्यक्ति को अपनी खुशी और मानसिक शांति को प्राथमिकता देनी चाहिए। कहा, दूसरों को खुश करते करते खुदकुशी मत कर लीजिए।
राजधानी के सेंट्रम होटल में आयोजित दो दिवसीय अमर उजाला संवाद के पहले दिन पहले सत्र की शुरुआत गौर गोपाल दास के व्याख्यान से हुई। नामचीन हस्तियों और दर्शकों से खचाखच भरे हॉल में उन्होंने कभी गीतों के जरिए तो कभी शायरी और कविताओं के जरिये दर्शकों को जीवन के गूढ़ रहस्यों से अवगत कराया। सुप्रभात लखनऊ से कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा कि शांति और सुखी जीवन का सबसे बड़ा सूत्र है कि लोगों को खुश करना बंद कर दें। इस बात को उन्होंने एक गीत के जरिये बयां किया कि कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना...। उन्होंने कहा कि डूबना अच्छा होता है, लेकिन डूबते-डूबते टूटना ठीक नहीं होता।
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अपने बगीचे को पानी दो, तितलियां अपने आप आएंगी
उन्होंने कविता सुनाई - एक बचपन का जमाना था, जिसमें खुशियों का खजाना था। चाहत चांद को पाने की थी, पर दिल तितली का दीवाना था। खबर न थी सुबह की, ना शाम का ठिकाना था। थक कर आना स्कूल से, पर खेलने भी जाना था। बोले, सोशल मीडिया ने एक तरफ देश को महत्वाकांक्षी बना दिया है, दूसरी तरफ अवसाद से ग्रस्त कर दिया है। दूसरों के बगीचे में देखते-देखते अपनी घास सूख जाती है। अपनी घास और अपने बगीचे को पानी दो, तितलियां अपने आप आ जाएंगी।
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गौर गोपाल दास ने कहा, हर किसी को प्रॉब्लम सोल्विंग चाहिए, चिंता में रहते हैं। चिंता और चिता में ज्यादा फर्क नहीं है। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, कोई अपने पति या पत्नी से परेशान है, कोई करियर की समस्या से। इसका एक आसान तरीका है कि अपनी जिंदगी की परेशानी को सामने रखें। पति-पत्नी को एक दूसरे से दिक्कत है तो अपने फोन के वॉलपेपर पर साथी की फोटो लगाएं और उसे देखें। समस्या को सुलझाने से ज्यादा उसे समझना जरूरी है।