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Lucknow News: 106 वर्ष पुराने लविवि की पहली सीएसआर नीति जारी
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लविवि
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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय ने अपनी पहली कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) नीति जारी की है। इसका उद्देश्य उद्योग जगत और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के सहयोग से उच्च शिक्षा, नवाचार और सामाजिक विकास को बढ़ावा देना है। नई नीति के तहत छात्रों के लिए छात्रवृत्ति, आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं और शोध संसाधनों के विस्तार का मार्ग प्रशस्त होगा।
106 वर्ष पुराने विश्वविद्यालय को एनएएसी की ओर से ए प्लस प्लस ग्रेड प्राप्त है। कार्य परिषद ने नीति के दिशा-निर्देशों को मंजूरी दे दी है और इसके क्रियान्वयन के लिए एक विशेष सीएसआर सेल का गठन किया गया है। कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने कहा कि यह नीति केवल वित्तीय सहयोग का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और नवाचार की दिशा में साझा भागीदारी का प्रयास है।
नीति के तहत कॉर्पोरेट संगठन विश्वविद्यालय के बंदोबस्ती कोष, बुनियादी ढांचे और छात्र कल्याण योजनाओं में योगदान दे सकेंगे। इससे परिसर के आधुनिकीकरण के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर्स और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में अत्याधुनिक अनुसंधान को भी बल मिलेगा। यह साझेदारी कंपनी अधिनियम- 2013 की धारा 135 के तहत पात्र कंपनियों को राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनाएगी।
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गरीब और मेधावी छात्रों को मिलेगा सहारा
कॉर्पोरेट घराने मेधावी तथा आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए छात्रवृत्तियां शुरू कर सकेंगे। साथ ही विभिन्न विभागों में संचालित शोध परियोजनाओं को वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा सकेगी। सीएसआर फंडिंग से रोबोटिक्स और पर्यावरण विज्ञान जैसे विषयों में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की योजना है।
इसके अलावा स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक प्रयोगशालाओं और नए हॉस्टलों के निर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा। स्टार्टअप इनक्यूबेशन केंद्रों को मजबूत करने तथा छात्रों में उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करने के लिए उद्योग जगत का सहयोग लिया जाएगा।
कंपनियों को भी मिलेंगे अकादमिक अवसर
सीएसआर के तहत सहयोग करने वाली कंपनियों के अधिकारियों को अंशकालिक पीएचडी में प्रवेश का अवसर मिलेगा। उनके शोध का पूरा खर्च संबंधित कंपनी वहन करेगी। इससे उद्योगों को अपनी समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान तलाशने में मदद मिलेगी। कंपनियां अपने अनुभवी विशेषज्ञों को विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में भी नियुक्त कर सकेंगी। विश्वविद्यालय को प्राप्त सीएसआर राशि पर आयकर अधिनियम की धारा 80जी के तहत कर छूट का प्रावधान भी रहेगा।
106 वर्ष पुराने विश्वविद्यालय को एनएएसी की ओर से ए प्लस प्लस ग्रेड प्राप्त है। कार्य परिषद ने नीति के दिशा-निर्देशों को मंजूरी दे दी है और इसके क्रियान्वयन के लिए एक विशेष सीएसआर सेल का गठन किया गया है। कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने कहा कि यह नीति केवल वित्तीय सहयोग का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और नवाचार की दिशा में साझा भागीदारी का प्रयास है।
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नीति के तहत कॉर्पोरेट संगठन विश्वविद्यालय के बंदोबस्ती कोष, बुनियादी ढांचे और छात्र कल्याण योजनाओं में योगदान दे सकेंगे। इससे परिसर के आधुनिकीकरण के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर्स और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में अत्याधुनिक अनुसंधान को भी बल मिलेगा। यह साझेदारी कंपनी अधिनियम- 2013 की धारा 135 के तहत पात्र कंपनियों को राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनाएगी।
गरीब और मेधावी छात्रों को मिलेगा सहारा
कॉर्पोरेट घराने मेधावी तथा आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए छात्रवृत्तियां शुरू कर सकेंगे। साथ ही विभिन्न विभागों में संचालित शोध परियोजनाओं को वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा सकेगी। सीएसआर फंडिंग से रोबोटिक्स और पर्यावरण विज्ञान जैसे विषयों में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की योजना है।
इसके अलावा स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक प्रयोगशालाओं और नए हॉस्टलों के निर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा। स्टार्टअप इनक्यूबेशन केंद्रों को मजबूत करने तथा छात्रों में उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करने के लिए उद्योग जगत का सहयोग लिया जाएगा।
कंपनियों को भी मिलेंगे अकादमिक अवसर
सीएसआर के तहत सहयोग करने वाली कंपनियों के अधिकारियों को अंशकालिक पीएचडी में प्रवेश का अवसर मिलेगा। उनके शोध का पूरा खर्च संबंधित कंपनी वहन करेगी। इससे उद्योगों को अपनी समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान तलाशने में मदद मिलेगी। कंपनियां अपने अनुभवी विशेषज्ञों को विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में भी नियुक्त कर सकेंगी। विश्वविद्यालय को प्राप्त सीएसआर राशि पर आयकर अधिनियम की धारा 80जी के तहत कर छूट का प्रावधान भी रहेगा।