गंगा एक्सप्रेसवे: चार पहिया वाहनों को देना होगा 1800 रुपये टोल टैक्स, जानिए बस और ट्रक की दरें
Ganga Expressway: गंगा एक्सप्रेसवे आज से शुरू हो गया। यूपीडा ने गंगा एक्सप्रेसवे का टोल जारी कर दिया है। प्रयागराज से लेकर मेरठ तक 1800 रुपये चुकाने होंगे।
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594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे पर वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए टोल दरें तय कर दी गई हैं। यह शुल्क एक बार की यात्रा के लिए होगा और अलग-अलग तरह के वाहनों के लिए अलग दरें रखी गई हैं। दोपहिया, तीनपहिया और पंजीकृत ट्रैक्टर के लिए कुल 905 रुपये टोल देना होगा। कार, जीप, वैन और हल्के मोटर वाहन चालकों को 1800 रुपये चुकाने होंगे। हल्के व्यावसायिक वाहन, छोटे मालवाहक वाहन और मिनी बस के लिए 2840 रुपये तय किए गए हैं। बस और ट्रक के लिए यह शुल्क 5720 रुपये रखा गया है।
भारी मशीनरी और तीन से छह एक्सल वाले बड़े वाहनों के लिए 8760 रुपये टोल देना होगा। वहीं सात या उससे अधिक एक्सल वाले बड़े वाहनों के लिए सबसे ज्यादा 11265 रुपये शुल्क तय किया गया है। यूपीडा के मुताबिक यह सभी दरें एक्सप्रेसवे के पहले टोल प्लाजा से आखिरी टोल प्लाजा तक की एकल यात्रा पर लागू होंगी।
गंगा एक्सप्रेसवे से यूपी के पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बुधवार को 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया गया। प्रदेश के 12 जिलों से होकर गुजरने वाला यह एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी के साथ-साथ पर्यटन को भी नई रफ्तार देगा। जो पूरब से पश्चिम तक धार्मिक विरासत व ईको टूरिज्म स्थलों की दूरी कम करेगा।
गंगा एक्सप्रेसवे शुरू होने से पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन आसान होगा। साथ ही जैन सर्किट, महाभारत सर्किट और कल्कि धाम, संभल व आस-पास के ईको पर्यटन स्थलों को भी नई ऊर्जा देगा। संभल में विकसित हो रहे कुरुक्षेत्र तीर्थ स्थल को भी इस एक्सप्रेसवे से पहचान मिलेगी। मेरठ, हापुड़ और लखनऊ जैसे प्रमुख स्थलों से बेहतर संपर्क होने से आध्यात्मिक और अल्पकालिक पर्यटन गंतव्य के रूप में उभरेगा।
पर्यटन व संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे पर्यटन के लिए भी एक सौगात है। यह मार्ग इन एक दर्जन से ज्यादा जिलों के पर्यटन स्थलों की यात्रा के इच्छुक श्रद्धालुओं-पर्यटकों व दूसरे राज्यों के यात्रियों को तेज और सुगम संपर्क उपलब्ध कराएगा। मेरठ का हस्तिनापुर, महाभारत काल की ऐतिहासिक विरासत और जैन धर्म के प्रमुख तीर्थ के रूप में प्रसिद्ध है। यह प्राचीन स्थल गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना का सबसे बड़ा लाभार्थी बनने जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी यूपी और अन्य क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि की उम्मीद है। हापुड़ के ब्रजघाट-गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। इससे उन्हें और गति मिलेगी। बदायूं, बुलंदशहर और शाहजहांपुर के स्थलों तक भी पहुंच अब अधिक सुगम हो जाएगी। बागपत के लाक्षागृह से जुड़े पर्यटन को भी इस कॉरिडोर से प्रोत्साहन मिलेगा। उन्नाव के नवाबगंज ईको-टूरिज्म क्षेत्र, रायबरेली व प्रयागराज के लिए भी नई संभावनाएं खुलेंगी।
