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सुना है क्या: 'कमिश्नर बहादुर का जजिया कर'...साहब ने मैनेज कर दी जांच; 'सांसद तो बड़े शातिर' के किस्से
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: आकाश द्विवेदी
Updated Sat, 31 Jan 2026 11:02 AM IST
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सार
यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
सुना है क्या/suna hai kya
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'कमिश्नर बहादुर का जजिया कर' की कहानी। इसके अलावा 'सांसद तो बड़े शातिर' और 'साहब ने मैनेज कर दी जांच' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...
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कमिश्नर बहादुर का जजिया कर
कमिश्नर बहादुर ने महोत्सव के नाम पर 10 करोड़ रुपये इकट्ठा करवाया। सभी विभागों पर जजिया कर लगाकर यह रकम वसूली गई। शिक्षा से लेकर आबकारी, गांव का विकास करवाने वालों से लेकर उद्योगपतियों तक को नहीं बख्शा गया। पुरानी कहावत है-मरता क्या नहीं करता। सो सब ने जजिया कर तो दे दिया, पर मलाल उन्हें इस बात का है कि महोत्सव पर इसमें से दो करोड़ रुपये भी खर्च नहीं हुआ। बाकी की रकम का हिसाब-किताब तो कमिश्नर बहादुर ही दे पाएंगे।
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