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नेपाल संसद में फिर उठेगा ये मुद्दा: राजतंत्र के साथ हिंदू राष्ट्र पर जोर, वार्ता के बाद राप्रपा की मुहिम तेज

Tue, 11 Aug 2026 11:30 AM IST
Sharukh Khan अतुल अवस्थी, अमर उजाला, बहराइच
अतुल अवस्थी, अमर उजाला, बहराइच Published by: Sharukh Khan Updated Tue, 11 Aug 2026 11:30 AM IST
सार

नेपाल संसद में हिंदू राष्ट्र का मुद्दा फिर से उठेगा। जनकपुर में हुई 13 सूत्री वार्ता के बाद राप्रपा ने मुहिम तेज कर दी है। राजतंत्र के साथ हिंदू राष्ट्र पर जोर है।

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Hindu nation Issue to be raised again in Nepal parliament Emphasis on Hindu nation alongside monarchy
nepal parliament - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

नेपाल में हालिया सांप्रदायिक तनाव के बाद हिंदू राष्ट्र का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। जनकपुर में गृह मंत्री सुधन गुरुंग और हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच हुई 13 सूत्रीय वार्ता में तीन महीने के भीतर हिंदू राष्ट्र के सवाल पर सर्वदलीय चर्चा की मांग सामने आने के बाद राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (राप्रपा) ने भी इस मुद्दे को संसद में उठाने की मुहिम तेज कर दी है। 
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राप्रपा लंबे समय से संवैधानिक राजतंत्र और हिंदू राष्ट्र को अपने प्रमुख राजनीतिक एजेंडे में शामिल करती रही है। राप्रपा की प्रमुख सचेतक खुश्बु ओली ने प्रतिनिधि सभा में गृह मंत्री के साथ हिंदू मोर्चे की वार्ता का हवाला देते हुए कहा कि हिंदू राष्ट्र की पुनर्स्थापना को लेकर गृह मंत्री ने प्रतिबद्धता जताई है और यह प्रतिबद्धता व्यर्थ नहीं जानी चाहिए। 
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सुनसरी की हिंसा को लेकर सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए ओली ने कहा कि संवैधानिक राजतंत्र के साथ हिंदू राष्ट्र रहने के समय नेपाल आज की तुलना में अधिक सहिष्णु और संतुलित था। उन्होंने कहा कि इस विषय पर भावनाओं के बजाय प्रमाण और गंभीर बहस के आधार पर समीक्षा होनी चाहिए।

नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ेगी राप्रपा
राप्रपा के संसदीय दल के नेता ज्ञानेंद्र शाही भी संसद के माध्यम से हिंदू राष्ट्र के मुद्दे को आगे बढ़ाने का संकेत दे चुके हैं। मार्च में सांसद पद की शपथ लेने से पहले पशुपतिनाथ मंदिर पहुंचे शाही ने कहा था कि राप्रपा आने वाले दिनों में इसी संसद के माध्यम से नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ेगी। वर्तमान प्रतिनिधि सभा में शाही के अलावा खुश्बु ओली, भरत गिरी, सरस्वती लामा और ताहिर अली भाट राप्रपा के सांसद हैं।


 
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राप्रपा अध्यक्ष राजेंद्र लिङ्देन पार्टी के मूल एजेंडे से पीछे हटने के आरोपों को खारिज कर चुके हैं। जून में उन्होंने कहा था कि पार्टी ने राजतंत्र, हिंदू राष्ट्र और भ्रष्टाचार विरोधी मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया है। इससे पहले अप्रैल में भी उन्होंने कहा था कि चुनावी हार के बावजूद राप्रपा अपने मूल विचारों से पीछे नहीं हटेगी।

बता दें कि नेपाल में 2008 में राजशाही समाप्त होने के बाद देश को धर्मनिरपेक्ष गणराज्य घोषित किया गया था। इससे पहले नेपाल दुनिया का एकमात्र आधिकारिक हिंदू राष्ट्र था। राजशाही और हिंदू राष्ट्र समर्थक संगठन धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को इसके पक्ष में आधार बनाते रहे हैं। 

वार्ता के बाद जनकपुर में थमे थे विरोध-प्रदर्शन
हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे संयुक्त हिंदू मोर्चा और सरकार के बीच एक अगस्त 2026 को धनुषा के जिला प्रशासन कार्यालय में वार्ता शुरू हुई थी। दो चरणों में हुई बातचीत के बाद उसी दिन रात 12:30 बजे 13 सूत्रीय सहमति बनी। सरकारी पक्ष का नेतृत्व गृह मंत्री सुधन गुरुंग ने किया। 

 

धनुषा के प्रमुख जिला अधिकारी प्रेम प्रसाद लुइटेल भी वार्ता में शामिल रहे। आंदोलनकारी पक्ष में संयुक्त हिंदू मोर्चा के साथ हिंदू सम्राट सेना के प्रतिनिधि थे। सहमति के बाद संयुक्त हिंदू मोर्चा ने जनकपुर में चल रहे विरोध प्रदर्शन और बंद स्थगित कर दिया था। समझौते में हिंदू राष्ट्र के सवाल पर आगे की राजनीतिक प्रक्रिया और सर्वदलीय चर्चा की मांग शामिल थी।

राप्रपा की नेपाल संसद में स्थिति
मार्च 2026 के आम चुनाव के बाद नेपाल की प्रतिनिधि सभा में राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (राप्रपा) के पांच सांसद हैं। पांच सीटों के साथ राप्रपा प्रतिनिधि सभा में छठी सबसे बड़ी पार्टी है।
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