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Lucknow: लखनऊ की ही अदालतों में 50 हजार फाइनल रिपोर्टें लंबित, आपराधिक मामलों पर हाईकोर्ट चिंतित
Thu, 30 Jul 2026 09:18 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Thu, 30 Jul 2026 09:18 AM IST
सार
अदालत ने सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को निर्देश दिया कि वे समय-समय पर इन मामलों की समीक्षा करें। पुराने मामलों और उन मामलों को प्राथमिकता दी जाए जिनमें शिकायतकर्ता को पहले ही नोटिस जारी हो चुका है।
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- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश में आपराधिक मामलों की अंतिम रिपोटों के लंबित रहने पर चिंता जताई है। एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा, लखनऊ की अदालतों में ही करीब 50 हजार फाइनल रिपोर्ट लंबित हैं। कोर्ट ने पीठासीन अधिकारियों की उदासीनता का हवाला देते हुए प्रदेश के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों से 20 अगस्त तक रिपोर्ट तलब की है। इसमें लंबित फाइनल रिपोर्टों की संख्या, कारण और अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा देना होगा।
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न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की एकल पीठ ने यह आदेश असित वर्मा व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। मामला लखनऊ जिले के गोसाईगंज थाने से संबंधित है। याचिका में जालसाजी के एक मामले में फाइनल रिपोर्ट के जल्द निस्तारण की मांग की गई थी। याचियों के अधिवक्ता ने बताया कि पुलिस ने जुलाई 2020 में रिपोर्ट दाखिल की थी, लेकिन अब तक उसका निस्तारण नहीं हुआ। इसके कारण याचियों को पासपोर्ट नवीनीकरण और विदेश यात्रा में परेशानी हो रही है।
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कोर्ट ने कहा कि समस्या सिर्फ एक मामले की नहीं है। कई जिलों में फाइनल रिपोर्ट लंबे समय से अटकी हैं। अदालत ने सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को निर्देश दिया कि वे समय-समय पर इन मामलों की समीक्षा करें। पुराने मामलों और उन मामलों को प्राथमिकता दी जाए जिनमें शिकायतकर्ता को पहले ही नोटिस जारी हो चुका है। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी।
करने होंगे गंभीर प्रयास: कोर्ट ने जिला न्यायाधीशों, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेटों को लंबित मामलों के जल्द निस्तारण के लिए गंभीर प्रयास करने के निर्देश दिए। कहा, रिपोर्ट में निस्तारण की कार्ययोजना भी बतानी होगी।