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लखनऊ: दीपक से मकान में लगी आग, मासूम की जलकर मौत.. बड़ी बहन झुलसी; घर में अकेली थीं दोनों बहनें
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Sat, 10 Jan 2026 10:07 PM IST
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सार
Fire in Lucknow: लखनऊ के इंदिरा नगर इलाके में शुक्रवार देर रात लगी आग की वजह से एक बच्ची की आग से झुलसकर मौत हो गई।
घर पर लगी आग। सांकेतिक फोटो।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
इंदिरानगर में शुक्रवार रात तकरोही में मकान में दीपक से आग लग गई। हादसे में पांच वर्षीय बच्ची अविका की जलकर मौत हो गई। वहीं, उसकी बड़ी बहन पंखुड़ी आंशिक रूप से झुलस गई। तकरोही स्थित हनुमंतपुरम कॉलोनी में कार चालक सुमित पत्नी शिल्पी, बेटी पंखुड़ी (7) और अविका (5) के साथ रहते हैं। पंखुड़ी कक्षा दो और अविका केजी की छात्रा थी। सुमित ने बताया कि शुक्रवार रात लगभग 9:30 बजे पत्नी दोनों बेटियों को सुलाकर उनके साथ घर के पास स्थित सब्जी मंडी गई थी। घर के मंदिर में दीपक जल रहा था। इसकी लौ से अचानक पर्दे में आग लग गई।
चीखती रही अविका, बेबस रहे लोग
देखते ही देखते आग विकराल हो गई। तपिश और धुएं के कारण पंखुड़ी की आंख खुल गई। खुद को आग की लपटों में घिरा देख वह चीखने चिल्लाने लगी। शोर सुनकर पड़ोसी घरों से बाहर निकले और दमकल को सूचना दी। पंखुड़ी किसी तरह से घर के बाहर आ गई, लेकिन उसका हाथ आंशिक रूप से जल गया। अविका अंदर ही फंसी रही। इस बीच आग और भीषण हो गई। वह मदद के लिए चीखती रही, मगर लोग बेबस होकर सिर्फ देखते रहे।
एक घंटे में बुझाई जा सकी आग
कुछ लोग आग बुझाने में जुट गए, जबकि कुछ लोग सुमित को घटना की जानकारी देने के लिए बच्ची के साथ बाजार पहुंचे। आनन-फानन भागते हुए सुमित घर पहुंचे। करीब एक घंटे में पड़ोसी आग बुझा सके। सुमित ने अविका को लोगों की मदद से लोहिया अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
हादसे ने छीन ली बेटी
बेटी की मौत की जानकारी होते ही दंपती फफक-फफक कर रोने लगे। सुमित ने रुंधे गले से कहा कि काश, मैं बाजार न जाता तो न ये हादसा होता और न मेरी बच्ची मुझसे दूर जाती। वहीं, शिल्पी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। वह कह रही थी कि हादसा मुझे जीवन भर का गम दे गया। इसने मेरी बेटी छीन ली। लोगों ने किसी तरह से उन्हें ढाढ़स बंधाया। एफएसओ इंंदिरानगर का कहना है कि घटना की जानकारी होते ही वह टीम के साथ दो गाड़ियों से निकले थे। उनके पहुंचने से पहले ही लोगों ने आग पर काबू पा लिया था।
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चीखती रही अविका, बेबस रहे लोग
देखते ही देखते आग विकराल हो गई। तपिश और धुएं के कारण पंखुड़ी की आंख खुल गई। खुद को आग की लपटों में घिरा देख वह चीखने चिल्लाने लगी। शोर सुनकर पड़ोसी घरों से बाहर निकले और दमकल को सूचना दी। पंखुड़ी किसी तरह से घर के बाहर आ गई, लेकिन उसका हाथ आंशिक रूप से जल गया। अविका अंदर ही फंसी रही। इस बीच आग और भीषण हो गई। वह मदद के लिए चीखती रही, मगर लोग बेबस होकर सिर्फ देखते रहे।
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एक घंटे में बुझाई जा सकी आग
कुछ लोग आग बुझाने में जुट गए, जबकि कुछ लोग सुमित को घटना की जानकारी देने के लिए बच्ची के साथ बाजार पहुंचे। आनन-फानन भागते हुए सुमित घर पहुंचे। करीब एक घंटे में पड़ोसी आग बुझा सके। सुमित ने अविका को लोगों की मदद से लोहिया अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
हादसे ने छीन ली बेटी
बेटी की मौत की जानकारी होते ही दंपती फफक-फफक कर रोने लगे। सुमित ने रुंधे गले से कहा कि काश, मैं बाजार न जाता तो न ये हादसा होता और न मेरी बच्ची मुझसे दूर जाती। वहीं, शिल्पी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। वह कह रही थी कि हादसा मुझे जीवन भर का गम दे गया। इसने मेरी बेटी छीन ली। लोगों ने किसी तरह से उन्हें ढाढ़स बंधाया। एफएसओ इंंदिरानगर का कहना है कि घटना की जानकारी होते ही वह टीम के साथ दो गाड़ियों से निकले थे। उनके पहुंचने से पहले ही लोगों ने आग पर काबू पा लिया था।