Lucknow News : विनय पाठक की याचिका पर अब 10 नवंबर को सुनवाई, हाईकोर्ट से नहीं मिली कोई अंतरिम राहत
प्रो. पाठक की ओर से दाखिल उक्त याचिका में इंदिरा नगर थाने में उनके व एक अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद् करने की मांग की गई है, साथ ही गिरफ़्तारी पर तत्काल रोक लगाने की भी याचना की गई है।
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कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय पाठक की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खण्डपीठ में गुरूवार को आदेश नहीं आ सका। गुरूवार को न्यायालय द्वारा आदेश सुनाना था लेकिन कोर्ट के शुरू होते ही प्रो. विनय पाठक के अधिवक्ता ने मामले में पूरक हलफनामा दाखिल करने की अनुमति मांगी, जिसे न्यायालय ने मंजूर करते हुए राज्य सरकार को भी जवाबी हलफ़नामा दाखिल करने के लिए समय प्रदान करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 नवम्बर की तिथि नियत की। न्यायालय द्वारा फिलहाल कोई भी अंतरिम राहत याची को नहीं दिया गया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति राजेश सिंह व न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की खंडपीठ ने प्रो. पाठक की याचिका पर दिया। गुरूवार को याची के अधिवक्ता एलपी मिश्रा ने न्यायालय से अनुरोध किया कि उन्हें मामले में पूरक हलफनामा दाखिल करने के लिए कुछ समय दिया जाये, वहीं राज्य सरकार की ओर से इसका विरोध किया गया व कहा गया कि यदि याची को समय दिया जाता है तो सरकार को भी जवाबी हलफनामे के लिए समय दिया जाए। न्यायालय ने दोनों पक्षों के अनुरोध को स्वीकार करते हुए याची को 5 नवम्बर तक पूरक हलफनामा की प्रति राज्य सरकार के अधिवक्ता को उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है।
उल्लेखनीय है कि प्रो. पाठक की ओर से दाखिल उक्त याचिका में इंदिरा नगर थाने में उनके व एक अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद् करने की मांग की गई है, साथ ही गिरफ़्तारी पर तत्काल रोक लगाने की भी याचना की गई है। उल्लेखनीय है कि प्रो. पाठक व प्राइवेट कम्पनी के मालिक अजय मिश्रा पर 29 अक्टूबर को इंदिरा नगर थाने में डेविड मारियो डेनिस ने एफआईआर दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि प्रो. पाठक के आगरा विश्वविद्यालय के कुलपति रहने के दौरान उसके कम्पनी द्वारा की गए कार्यों के भुगतान के लिए अभियुक्तों ने 15 प्रतिशत कमीशन वसूला। उससे कुल एक करोड़ 41 लाख रुपये की वसूली अभियुक्तों द्वारा जबरन की जा चुकी है। एफआईआर में यह भी कहा गया है कि वादी को उक्त अभियुक्तों से अपनी जान को खतरा है।