Lucknow: गृहकर दाखिल खारिज शुल्क पांच गुना तक कम हाने का फायदा अप्रैल से मिलेगा, नगर निगम ने दी मंजूरी
इस मामले में नई दरों को लागू करने के लिए चार दिसंबर को सार्वजनिक सूचना जारी कर आपत्ति सुझाव मांगे गए थे। इसके लिए 15 दिन का मौका दिया गया था। पूरी अवधि में एक ही आपत्ति आई थी, जिसका निस्तारण समिति ने कर दिया। ऐसे में अब दरों के प्रकाशन की मंजूरी नगर निगम सदन ने दे दी।
विस्तार
गृहकर दाखिल खारिज शुल्क पांच गुना तक कम होने का फायदा भवनस्वामियों को एक अप्रैल से मिलने लगेगा। आपत्ति सुझाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दाखिल खारिज की नई नियमावली के प्रकाशन की मंजूरी मंगलवार को नगर निगम सदन ने दे दी। ऐसे में प्रकाशन की कार्यवाही पूरे दो महीने में पूरी हो जाएगी।
करीब पांच महीने पहले नगर निगम सदन और कार्यकारिणी ने गृहकर दाखिल खारिज शुल्क में कमी की थी। नई दरों को लागू करने के लिए चार दिसंबर को सार्वजनिक सूचना जारी कर आपत्ति सुझाव मांगे गए थे। इसके लिए 15 दिन का मौका दिया गया था। पूरी अवधि में एक ही आपत्ति आई थी, जिसका निस्तारण समिति ने कर दिया। ऐसे में अब दरों के प्रकाशन की मंजूरी मंगलवार को नगर निगम सदन ने दे दी।
ये भी पढ़ें - राज्य चुनाव आयोग ने की राजनीतिक दलों के साथ बैठक, सूची के नाम मलयालम भाषा में छपने पर हुआ विवाद
ये भी पढ़ें - अखिलेश बोले: ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग सरकार के संगठन, जहां लड़ नहीं पाती भाजपा उन्हें आगे कर देती
बैनामा और वसीयत दोनों के आधार पर मिलेगा फायदा
नगर निगम अभी पारिवारिक संपत्ति के नामांतरण पर तय 5000 रुपये फीस लेता है। यह फीस ईडब्ल्यूएस मकान से लेकर बड़े मकान वालों तक के लिए समान है। इस पर लोग आपत्ति कर रहे थे। उसके बाद शासन ने इसे कम किया, जिसके बाद नगर निगम सदन ने भी शुल्क कम कर दिया। इसी तरह बैनामे के आधार पर खरीदी जाने वाले संपत्तियों का भी दाखिल खारिज शुल्क और कम किया गया है। पहले यह एक प्रतिशत था। शासन की नई नियमावली जारी होने के बाद इसे और कम किया गया।
हाउस टैक्स वसूलने वाले आएं तो देखें पहचान पत्र
नगर निगम सदन में यह मामला उठा कि कुछ बाहरी लोगों को टैक्स इंस्पेक्टर पद पर रखा गया है, जो भवनस्वामियों के पास जाकर उगाही और अभद्रता करते हैं। अफसरों ने बताया कि वसूली बढ़ाने को लेकर नगर निगम ने हर वार्ड में सिर्फ एक ही कर्मचारी जेम पोर्टल के जरिये रखा है। महापौर ने कहा कि भवनस्वामी टैक्स वसूली के लिए आने वालों का पहचान पत्र जरूर देखें।
बैनामे के आधार पर संपत्ति नामांतरण पर अभी है यह शुल्क
| 5 लाख रुपये कीमत तक की संपत्ति पर | 3500 |
| 5 लाख से अधिक से और 10 लाख रुपये कीमत तक | 5500 |
| 10 से अधिक और 20 लाख रुपये कीमत तक | 7500 |
| 20 लाख से अधिक और 30 लाख रुपये कीमत तक | 9500 |
| 30 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली सभी संपत्तियों पर | 10000 |
अब यह शुल्क हुआ तय
| 5 लाख रुपये कीमत तक | 1000 |
| 5 से 10 लाख कौमत तक | 2000 |
| 10 से 15 लाख कीमत तक | 3000 |
| 15 से 50 लाख कीमत तक | 5000 |
| 50 लाख से अधिक कीमत पर | 10000 |
उत्तराधिकार और वसीयत के मामलों में अब तय हुआ शुल्क
| 1000 वर्ग फीट तक के मकान पर | 1000 |
| 1001 से 2000 वर्ग फीट तक के मकान | 2000 |
| 2001 से 3000 वर्ग फीट तक के मकान | 3000 |
| 3000 वर्ग फिट से अधिक के मकान | 5000 |
पुनरीक्षित बजट के बजाय सामान्य सदन बुलाने पर हंगामा
नगर निगम सदन की कार्यवाही शुरू होते हुए सपा पार्षद यावर हुसैन रेशू और ममता चौधरी ने कहा कि यह पुनरीक्षित बजट सदन की बैठक के बजाय सामान्य सदन की बैठक बुलाना सही नहीं है। पहले पुनरीक्षित बजट की बैठक बुलाई जानी चाहिए थी। इस पर महापौर ने कहा कि उन्होंने तो नगर निगम को पत्र लिखकर पुनरीक्षित बजट सदन और सामान्य सदन की बैठक एक साथ बुलाने के लिए कहा था, मगर अधिकारियों ने कहा कि एक साथ बैठक नहीं हो सकती। इस पर रेशू ने कहा कि इस तरह तो नई पंरपरा शुरू कर दी गई है, क्योंकि पिछली बार भी ऐसा ही किया गया था।
भाजपा पार्षद अमित चौधरी रोते हुए चले गए
पेयजल पर चर्चा के दौरान महात्मा गांधी जियामऊ वार्ड के भाजपा पार्षद अमित चौधरी का सदन में महापौर से बहस हो गई। बहस के बीच रोते हुए अमित सदन से बाहर चले गए। हालांकि, कई पार्षदों ने उनहें रोकने की कोशिश की, मगर वह नहीं माने। उन्होंने कहा कि वह दलित हैं, इसलिए उनकी उपेक्षा की जा रही है।
चौराहे के नामकरण विवाद में कांग्रेस-भाजपा पार्षद भिड़े
कांग्रेस पार्षद मुकेश सिंह चौहान ने चौक चौराहे के दोहरे नामकरण पर सवाल किया। उन्होंने भाजपा पर पूर्व राज्यपाल स्व. लालजी टंडन का अपमान करने का आरोप लगाया। भाजपा पार्षद रंजीत सिंह व दूसरे पार्षदों ने विरोध किया। हंगामा इस कदर बढ़ा कि हाथापाई की नौबत आ गई। इस बीच महापौर ने 30 मिनट तक सदन स्थगित कर दी। सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर फिर इसी मुद्दे पर हंगामा शुरू हो गया। हालांकि, महापौर ने कहा कि दो अलग-अलग चौराहों के नामकरण किए गए हैं। अभियंत्रण विभाग की रिपोर्ट भी सदन में पड़ी गई।
पार्षद ने की जांच की मांग
पार्षद रंजीत सिंह ने कहा कि अपर नगर आयुक्त ललित कुमार पर लगे आरोपों की जांच निम्नस्तरीय अधिकारी कर रहे हैं। उन्होंने जांच उच्च अधिकारी से कराकर रिपोर्ट शासन को भेजने की मांग की।
