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Lucknow: छाती में धंसे चाकू को निकालकर युवक की बचाई जान, दाहिने फेफड़े में धंसा हुआ था चाकू

Sat, 11 Jul 2026 08:13 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Sat, 11 Jul 2026 08:13 PM IST
सार

ट्रॉमा सर्जरी विभाग के डॉ. समीर मिश्र ने बताया कि एक्सरे में छाती के दाहिनी ओर भारी मात्रा में खून भरा हुआ था, भीतर फंसा चाकू भी साफ नजर आया। डॉक्टरों ने तत्काल इंटरकॉस्टल ड्रेन डालकर करीब 200 मिलीलीटर खून बाहर निकाला, जिससे मरीज की स्थिति में कुछ सुधार हुआ।

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Lucknow: Young man's life saved after removal of knife embedded in his chest
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने बेहद जटिल ऑपरेशन कर युवक की जान बचाने में सफलता हासिल की है। युवक की छाती में चाकू धंसा हुआ था, जो दाहिने फेफड़े के अत्यंत संवेदनशील हिस्से तक पहुंचकर प्रमुख रक्त वाहिकाओं को क्षतिग्रस्त कर चुका था। सफल ऑपरेशन के बाद फिलहाल मरीज की हालत स्थिर है। कुलपति ने इस सराहनीय कार्य के लिए ऑपरेशन करने वाली पूरी टीम को बधाई दी है।

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लखीमपुर खीरी निवासी सर्वेश पर चार जुलाई की रात करीब नौ बजे चाकू से हमला हुआ था। हमले में चाकू उनकी दाहिनी छाती में गहरे तक धंस गया। आनन-फानन में सर्वेश को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें तुरंत ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया।
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ट्रॉमा सेंटर में पांच जुलाई की सुबह सर्वेश का इलाज शुरू हुआ। डॉक्टरों ने रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी संबंधी जांच कराई। ट्रॉमा सर्जरी विभाग के डॉ. समीर मिश्र ने बताया कि एक्सरे में छाती के दाहिनी ओर भारी मात्रा में खून भरा हुआ था, भीतर फंसा चाकू भी साफ नजर आया।
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डॉक्टरों ने तत्काल इंटरकॉस्टल ड्रेन डालकर करीब 200 मिलीलीटर खून बाहर निकाला, जिससे मरीज की स्थिति में कुछ सुधार हुआ। इसके बाद किए गए सीटी स्कैन से पता चला कि चाकू दाहिने पल्मोनरी हिलम तक पहुंच चुका था और उसने पल्मोनरी आर्टरी (मुख्य संवेदनशील रक्त वाहिनी) की शाखा को गंभीर नुकसान पहुंचाया था।

खून की नस को सुरक्षित कर निकाला ब्लेड
डॉ. सौम्या सिंह ने बताया कि कॉर्डियो थौरेसिक वैस्कुलर सर्जरी विभाग की टीम ने राइट एंटेरोलैटरल थोराकोटॉमी कर पहले खून की नस को सुरक्षित किया, फिर प्रत्यक्ष निगरानी में चाकू निकाला। वहीं, डॉ. वैभव जायसवाल ने बताया कि क्षतिग्रस्त रक्तवाहिनी की सफल मरम्मत कर खून का बहाव रोका गया। ऑपरेशन के दौरान मरीज को तीन यूनिट खून और चार यूनिट फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा चढ़ाया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज को आईसीयू में भर्ती किया गया। फिलहाल उसका ब्लड प्रेशर, पल्स और ऑक्सीजन स्तर सामान्य है।

ये बरतें सावधानी: डॉ. यादवेंद्र धीर ने बताया कि छाती में धंसे किसी भी धारदार हथियार को अस्पताल पहुंचने से पहले या ऑपरेशन थियेटर के बाहर कभी नहीं निकालना चाहिए। कई बार वही हथियार अस्थायी रूप से रक्तस्राव को रोकता है। ऐसे मामलों में पहले मरीज को स्थिर कर जरूरी जांच करानी चाहिए। ऑपरेशन थियेटर में पूरी तैयारी के साथ ही हथियार निकालना सुरक्षित और जीवनरक्षक होता है।


डॉक्टरों की टीम: डॉ. वैभव जायसवाल, डॉ. यदुवेंद्र धीर, डॉ. समीर मिश्र, सीटीवीएस विभाग के सीनियर रेजिडेंट डॉ. अनीकेश, डॉ. अर्पिता, डॉ. ताहिर, डॉ. प्रज्ज्वल, डॉ. महेश, डॉ. धैर्य, डॉ. मोहतास्सिन, डॉ. सागर।

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