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Lucknow News: मातृ मृत्यु दर को कम कर सकता है मिडवाइफ मॉडल
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केजीएमयू के कन्वेंशन सेंटर में ऑब्टोट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी की ओर से तीन दिवसीय काॅन्
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लखनऊ। केजीएमयू के कन्वेंशन सेंटर में चल रहे फॉग्सी आर्ट ऑफ बर्थिंग कॉन्क्लेव के दूसरे दिन शनिवार को विशेषज्ञों ने सुरक्षित मातृत्व और सामान्य प्रसव की चुनौतियों पर मंथन किया। ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में देश-विदेश के डॉक्टरों ने हिस्सा लिया। मातृ स्वास्थ्य भारत सरकार के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. पवन कुमार ने कहा कि सुरक्षित मातृत्व केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए प्रशिक्षित मिडवाइफ और सुदृढ़ स्वास्थ्य ढांचे का होना अनिवार्य है। केरल की तरह ही उत्तर भारत और अन्य राज्यों में भी मिडवाइफ मॉडल अपनाकर प्रसव के दौरान होने वाली मौतों को काफी कम किया जा सकता है।
वहीं, जयपुर से आईं पूर्व उपाध्यक्ष (फॉग्सी) डॉ. लीला व्यास ने कहा कि प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव (पीपीएच) सबसे अधिक चिंता का विषय है। कॉन्क्लेव में स्किल स्टेशन के जरिए हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग दी गई। इस आयोजन को यूनिसेफ और ग्लोबल हेल्थ स्ट्रैटेजीज जैसे संस्थानों का भी सहयोग प्राप्त हुआ। सोसाइटी की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति कुमार, डॉ. सीमा मेहरोत्रा, डॉ. सुवर्णा खाडिलकर,डॉ. चंद्रावती आदि विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
-जानें, क्या है मिडवाइफ मॉडल
यह मॉडल सिर्फ प्रसव के बारे में नहीं है। इसमें मां को एक सुरक्षित, सम्मानजनक वातावरण और देखभाल के साथ सर्जरी से दूर रखने पर जोर दिया जाता है। मिडवाइफ-नेतृत्व वाली देखभाल इकाइयां सामान्य प्रसव को अधिक सहज और सुरक्षित बना सकती हैं, जिससे डॉक्टरों का बोझ कम होता है।
-सामान्य प्रसव को दें प्राथमिकता
फॉग्सी अध्यक्ष डॉ. भास्कर पाल और कार्यक्रम की अध्यक्ष डॉ. प्रीति कुमार ने सिजेरियन डिलीवरी पर विचार रखे। डॉ. पाल ने कहा कि सिजेरियन सुरक्षित है, लेकिन चिकित्सकीय आवश्यकता पर ही इसका चुनाव करना चाहिए। वहीं, डॉ. प्रीति कुमार ने बताया कि देर से गर्भधारण करने की वजह से सिजेरियन के मामले बढ़े हैं, लेकिन इसके बाद भी प्राकृतिक प्रसव को ही प्राथमिकता देनी चाहिए।
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वहीं, जयपुर से आईं पूर्व उपाध्यक्ष (फॉग्सी) डॉ. लीला व्यास ने कहा कि प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव (पीपीएच) सबसे अधिक चिंता का विषय है। कॉन्क्लेव में स्किल स्टेशन के जरिए हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग दी गई। इस आयोजन को यूनिसेफ और ग्लोबल हेल्थ स्ट्रैटेजीज जैसे संस्थानों का भी सहयोग प्राप्त हुआ। सोसाइटी की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति कुमार, डॉ. सीमा मेहरोत्रा, डॉ. सुवर्णा खाडिलकर,डॉ. चंद्रावती आदि विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
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-जानें, क्या है मिडवाइफ मॉडल
यह मॉडल सिर्फ प्रसव के बारे में नहीं है। इसमें मां को एक सुरक्षित, सम्मानजनक वातावरण और देखभाल के साथ सर्जरी से दूर रखने पर जोर दिया जाता है। मिडवाइफ-नेतृत्व वाली देखभाल इकाइयां सामान्य प्रसव को अधिक सहज और सुरक्षित बना सकती हैं, जिससे डॉक्टरों का बोझ कम होता है।
-सामान्य प्रसव को दें प्राथमिकता
फॉग्सी अध्यक्ष डॉ. भास्कर पाल और कार्यक्रम की अध्यक्ष डॉ. प्रीति कुमार ने सिजेरियन डिलीवरी पर विचार रखे। डॉ. पाल ने कहा कि सिजेरियन सुरक्षित है, लेकिन चिकित्सकीय आवश्यकता पर ही इसका चुनाव करना चाहिए। वहीं, डॉ. प्रीति कुमार ने बताया कि देर से गर्भधारण करने की वजह से सिजेरियन के मामले बढ़े हैं, लेकिन इसके बाद भी प्राकृतिक प्रसव को ही प्राथमिकता देनी चाहिए।

केजीएमयू के कन्वेंशन सेंटर में ऑब्टोट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी की ओर से तीन दिवसीय काॅन्