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Lucknow News: बुजुर्गों की राह आसान करेगा मल्टी इंटरवेंशन मॉडल
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डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय
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लखनऊ। बुजुर्गों की समस्याओं के समाधान और उनकी देखभाल को बेहतर बनाने के उद्देश्य से डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के एक शिक्षक ने खास शोध मॉडल विकसित किया है। इस मॉडल को केंद्र सरकार के प्रतिलिप्याधिकार कार्यालय से कॉपीराइट मिल गया है।
विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग के सहायक आचार्य डॉ. श्याम सिंह ने जेरोंटोलॉजिकल सोशल वर्क मल्टी इंटरवेंशन मॉडल तैयार किया है। यह मॉडल बुजुर्गों से जुड़ी सामाजिक, स्वास्थ्य और देखभाल संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है।
इस मॉडल के माध्यम से वृद्धजनों से संबंधित मुद्दों की ओर सरकार और समाज का ध्यान आकर्षित किया जा सकेगा। साथ ही सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाएं इस प्रारूप को अपनाकर अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों में बुजुर्गों के लिए बेहतर सेवाएं और सुविधाएं शामिल कर सकेंगी। यह मॉडल वृद्धावस्था से जुड़े विषयों पर शोध करने वाले शोधकर्ताओं को भी व्यापक स्तर पर काम करने की नई दिशा देगा।
पांच साल में तैयार हुआ मॉडल
डॉ. श्याम सिंह ने बताया कि इस मॉडल को शोध के साथ विकसित करने में करीब पांच वर्ष का समय लगा। करीब 50 पृष्ठों के इस मॉडल में ऐसे कई बिंदु और सुझाव शामिल किए गए हैं, जिनके आधार पर बुजुर्गों के लिए बनाई जाने वाली सरकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारा जा सकता है।
कोट
यह मॉडल वृद्धजनों की समस्याओं के समाधान की दिशा में उपयोगी साबित होगा। इस तरह के शोध विश्वविद्यालय की अकादमिक गुणवत्ता को मजबूत करते हैं और समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी दर्शाते हैं।
- आचार्य संजय सिंह, कुलपति, पुनर्वास विश्वविद्यालय
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इस मॉडल के माध्यम से वृद्धजनों से संबंधित मुद्दों की ओर सरकार और समाज का ध्यान आकर्षित किया जा सकेगा। साथ ही सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाएं इस प्रारूप को अपनाकर अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों में बुजुर्गों के लिए बेहतर सेवाएं और सुविधाएं शामिल कर सकेंगी। यह मॉडल वृद्धावस्था से जुड़े विषयों पर शोध करने वाले शोधकर्ताओं को भी व्यापक स्तर पर काम करने की नई दिशा देगा।
पांच साल में तैयार हुआ मॉडल
डॉ. श्याम सिंह ने बताया कि इस मॉडल को शोध के साथ विकसित करने में करीब पांच वर्ष का समय लगा। करीब 50 पृष्ठों के इस मॉडल में ऐसे कई बिंदु और सुझाव शामिल किए गए हैं, जिनके आधार पर बुजुर्गों के लिए बनाई जाने वाली सरकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारा जा सकता है।
कोट
यह मॉडल वृद्धजनों की समस्याओं के समाधान की दिशा में उपयोगी साबित होगा। इस तरह के शोध विश्वविद्यालय की अकादमिक गुणवत्ता को मजबूत करते हैं और समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी दर्शाते हैं।
- आचार्य संजय सिंह, कुलपति, पुनर्वास विश्वविद्यालय
