{"_id":"64a8246d3d0b60c87306b1c4","slug":"muslims-oppose-uniform-civil-code-bill-at-any-rate-2023-07-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"विरोध: जुमा की नमाज तक पहुंचा यूनीफॉर्म सिविल कोड का मुद्दा, कहा गया ये बदलाव मनुष्य के बस का नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विरोध: जुमा की नमाज तक पहुंचा यूनीफॉर्म सिविल कोड का मुद्दा, कहा गया ये बदलाव मनुष्य के बस का नहीं
Fri, 07 Jul 2023 08:41 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
अमर उजाला सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Fri, 07 Jul 2023 08:41 PM IST
सार
यूनीफॉर्म सिविल कोड का मुद्दा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। लखनऊ में जुमा की नमाज के दौरान यह मुद्दा उठाया गया। उलेमाओं ने कहा कि मुसलमानों के लिए पर्सनल लॉ इस्लामी शरीअत का अटूट हिस्सा।
विज्ञापन
muslim
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के आवाहन पर शुक्रवार को जुमा की नमाज के खुतबे में यूनिफॉर्म सिविल कोड का विरोध करने की अपील की गई। उलमा ने मुस्लिम पर्सनल लॉ की बुनियाद कुरआन और हदीस को बताते हुए कहा कि इसमें किसी भी प्रकार का बदलाव किसी मनुष्य के बस में नहीं है।
विज्ञापन
दरअसल, ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तमाम मस्जिदों के इमामों से ये अपील की थी कि जुमे के खुत्बे में मुसलमानों को पर्सनल लॉ के महत्व से अवगत करायें और यूसीसी के विरूद्ध लॉ कमीशन ऑफ इण्डिया को अपनी राय भेजें। ऐशबाग ईदगाह स्थित जामा मस्जिद में जुमा की नमाज से पहले ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि इस्लाम ने जो आदेश दिये हैं उसको स्वीकार करना और उस पर अमल करना हर मुसलमान के लिये अनिवार्य है।
विज्ञापन
निकाह व तलाक से सम्बन्धित आदेश कुरआन की पांच सूरत और विरासत के आदेश सूरह निसा में विस्तार से बयान हुए हैं। मौलाना फरंगी महली ने कहा कि जो लोग अपने धार्मिक मामले पर अमल करने के लिये तैयार नहीं हैं उनके लिये पहले से स्पेशल मैरिज एक्ट और दूसरे बहुत सारे कानून मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि हमारे देश को विश्व में सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश होने का गौरव प्राप्त है। उन्होंने कहा कि हमारा संविधान ने इस देश में रहने वाले हर नागरिक के अधिकार की रक्षा की जिम्मेदारी ली है, उसमें हर नागरिक को अपने धर्म और अपने अपने कल्चर पर अमल करने की पूरी आजादी मिली है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि आजादी से पहले से हमेशा मुल्क के सियासतदां मुस्लिम पर्सनल लॉ की रक्षा और उसमें हस्तक्षेप न करने का आश्वासन दिलाते रहे। महात्मा गांधी ने स्वयं गोल मेज कान्फ्रेंस लन्दन में 1931 में कहा था "मुस्लिम पर्सनल लॉ को किसी भी कानून के द्वारा नहीं छेड़ा जायेगा । मौलाना ने कहा कि ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने युनिफार्म सिविल कोड को सिरे से नकार दिया है और बोर्ड ने ये निर्णय लिया है कि उसके विरूद्ध सड़क पर कोई प्रदर्शन नहीं किया जायेगा।
बोर्ड ने देश के हित में आम लोगों से भी इसका विरोध करने की अपील की है। मौलाना ने कहा कि बोर्ड ने अपने विरोध पर आधारित दस्तावेज लॉ कमीशन को भेज दिये हैं। नमाज के बाद अन्त में मौलाना ने देश में अमन व शान्ति कायम रहने की दुआ की।