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Lucknow News: ऑपरेशन सिंदूर से बदली भारत के प्रति दुनिया की सोच
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सेना, नौसेना, वायुसेना के सेवानिवृत्त अफसरों ने युद्घनीति, शैली व बदलाव पर की चर्चा
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्घ से सबक लेने की जरूरत है। युद्घ की स्थिति में सेना की क्विक तैनाती हो और लक्ष्य पूरा हो जाते ही युद्घ समाप्त कर देना जरूरी है। इतना ही नहीं ऑपरेशन सिंदूर ने भी देश के प्रति दुनिया की सोच बदली है। स्वदेशी ड्रोन की मदद से यह युद्घ जीता गया है। छोटे-छोटे स्टार्टअप्स ने इसमें हिस्सा लिया। विश्व हमसे सीख रहा है कि युद्घ जीत भी लिया जाए और अर्थव्यवस्था भी बढ़ती रहे।
ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका निभाने वाले नायकों ने यह बातें सोमवार को होटल सेंट्रम में अमर उजाला संवाद के मंच से कहीं। रणनीतिक शक्ति से आर्थिक समृद्घि तक विषय पर पैनल डिस्कशन हुआ। नौसेना के सेवानिवृत्त कमोडोर निशांत कुमार व वायुसेना से रिटायर हुए विंग कमांडर डॉ. मनोज कुमार सहित सेना से सेवानिवृत्त मेजर जनरल अश्विनी कुमार चानन शामिल हुए। ऑपरेशन सिंदूर से क्या बदला, इस सवाल पर सेवानिवृत्त मेजर जनरल अश्विनी कुमार चानन ने कहाकि उरी, बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर जीरो टॉलरेंस व रेस्पांस स्ट्रेटजी का परिणाम है। पहले इंडस्ट्रियल एज वॉर होते थे, लेकिन अब इंफॉर्मेशन एज वॉर होते हैं। अब ताकतवर नहीं उन्नत तकनीक वाले देश जीतते हैं। वहीं सेवानिवृत्त विंग कमांडर डॉ. मनोज कुमार ने पाकिस्तान की रीति-नीति बदली या नहीं, इस सवाल पर जवाब दिया कि ऑपरेशन सिंदूर ने पूरी अवधारणा बदल दी है। विश्व हमसे सीख रहा है कि कैसे कम समय में युद्घ खत्म कर अर्थव्यवस्था को भी बढ़ाया जाता है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव से भारत क्या सीख सकता है, इस सवाल पर सेवानिवृत्त कमोडोर निशांत कुमार ने कहाकि नौसेना मौके पर तैनात है। स्ट्रेट ऑफ होर्मूज से शिप बाहर निकालने में मदद कर रही है। युद्घ के हालात में क्विक सेना की तैनाती और लक्ष्य हासिल होते ही युद्घ खत्म करना जरूरी है।
अब होते हैं मल्टी फ्रंट वॉर
दो फ्रंट यानी चीन व पाकिस्तान से एक साथ युद्घ होने पर देश की सैन्य शक्ति कहां पर है, इस सवाल पर सेवानिवृत्त विंग कमांडर मनोज कुमार ने कहाकि अब युद्घ मल्टी फ्रंट ही होते हैं। ईरान व अमेरिका की लड़ाई को ही ले लीजिए। युद्घ अब मल्टी फ्रंट ही होते हैं। युद्घग्रस्त सभी देश कई फ्रंट पर लड़ रहे हैं। वहीं सेवानिवृत्त कमोडोर निशांत कुमार ने कहाकि हम युद्घ की स्थिति में भयंकरतम स्थिति सोचकर ही तैयारियां करते हैं।
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निरंतर बदल रही है युद्घशैली
सेवानिवृत्त विंग कमांडर डॉ. मनोज कुमार ने बदलती युद्घशैली पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहाकि अब जमीन पर ही नहीं, साइबर व स्पेस वॉर भी होते हैं। इसके लिए देश तैयार है। डिफेंस साइबर व स्पेस एजेंसियां बनाई जा चुकी हैं। युद्घशैली निरंतर बदल रही है। थिएटर कमान पर उन्होंने कहाकि यह वक्त की जरूरत है। थिएटर कमान को लेकर लखनऊ को अहम जिम्मेदारी भी मिलेगी।
डरें नहीं, युद्घ तो होंगे ही...
वायुसेना से सेवानिवृत्त विंग कमांडर डॉ. मनोज कुमार ने कार्यक्रम के दौरान दर्शकों से तीस सेकेंड मांगे। उन्होंने कहाकि युद्घ वास्तविकता हैं। युद्घ तो होंगे ही। ऐसे में हमें आधारभूत रूप से मजबूत होना होगा। पांच आतंकवादी आकर 25 लोगों को मारकर चले जाते हैं तो ऐसी घटनाओं से डरें नहीं। इस पर हमें सोचने की जरूरत है। हमें खुद को मानसिक रूप से तैयार रखना होगा। इस पर दर्शकों की तालियों से माहौल में गर्मी पैदा हो गई।
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्घ से सबक लेने की जरूरत है। युद्घ की स्थिति में सेना की क्विक तैनाती हो और लक्ष्य पूरा हो जाते ही युद्घ समाप्त कर देना जरूरी है। इतना ही नहीं ऑपरेशन सिंदूर ने भी देश के प्रति दुनिया की सोच बदली है। स्वदेशी ड्रोन की मदद से यह युद्घ जीता गया है। छोटे-छोटे स्टार्टअप्स ने इसमें हिस्सा लिया। विश्व हमसे सीख रहा है कि युद्घ जीत भी लिया जाए और अर्थव्यवस्था भी बढ़ती रहे।
ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका निभाने वाले नायकों ने यह बातें सोमवार को होटल सेंट्रम में अमर उजाला संवाद के मंच से कहीं। रणनीतिक शक्ति से आर्थिक समृद्घि तक विषय पर पैनल डिस्कशन हुआ। नौसेना के सेवानिवृत्त कमोडोर निशांत कुमार व वायुसेना से रिटायर हुए विंग कमांडर डॉ. मनोज कुमार सहित सेना से सेवानिवृत्त मेजर जनरल अश्विनी कुमार चानन शामिल हुए। ऑपरेशन सिंदूर से क्या बदला, इस सवाल पर सेवानिवृत्त मेजर जनरल अश्विनी कुमार चानन ने कहाकि उरी, बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर जीरो टॉलरेंस व रेस्पांस स्ट्रेटजी का परिणाम है। पहले इंडस्ट्रियल एज वॉर होते थे, लेकिन अब इंफॉर्मेशन एज वॉर होते हैं। अब ताकतवर नहीं उन्नत तकनीक वाले देश जीतते हैं। वहीं सेवानिवृत्त विंग कमांडर डॉ. मनोज कुमार ने पाकिस्तान की रीति-नीति बदली या नहीं, इस सवाल पर जवाब दिया कि ऑपरेशन सिंदूर ने पूरी अवधारणा बदल दी है। विश्व हमसे सीख रहा है कि कैसे कम समय में युद्घ खत्म कर अर्थव्यवस्था को भी बढ़ाया जाता है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव से भारत क्या सीख सकता है, इस सवाल पर सेवानिवृत्त कमोडोर निशांत कुमार ने कहाकि नौसेना मौके पर तैनात है। स्ट्रेट ऑफ होर्मूज से शिप बाहर निकालने में मदद कर रही है। युद्घ के हालात में क्विक सेना की तैनाती और लक्ष्य हासिल होते ही युद्घ खत्म करना जरूरी है।
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अब होते हैं मल्टी फ्रंट वॉर
दो फ्रंट यानी चीन व पाकिस्तान से एक साथ युद्घ होने पर देश की सैन्य शक्ति कहां पर है, इस सवाल पर सेवानिवृत्त विंग कमांडर मनोज कुमार ने कहाकि अब युद्घ मल्टी फ्रंट ही होते हैं। ईरान व अमेरिका की लड़ाई को ही ले लीजिए। युद्घ अब मल्टी फ्रंट ही होते हैं। युद्घग्रस्त सभी देश कई फ्रंट पर लड़ रहे हैं। वहीं सेवानिवृत्त कमोडोर निशांत कुमार ने कहाकि हम युद्घ की स्थिति में भयंकरतम स्थिति सोचकर ही तैयारियां करते हैं।
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सेवानिवृत्त विंग कमांडर डॉ. मनोज कुमार ने बदलती युद्घशैली पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहाकि अब जमीन पर ही नहीं, साइबर व स्पेस वॉर भी होते हैं। इसके लिए देश तैयार है। डिफेंस साइबर व स्पेस एजेंसियां बनाई जा चुकी हैं। युद्घशैली निरंतर बदल रही है। थिएटर कमान पर उन्होंने कहाकि यह वक्त की जरूरत है। थिएटर कमान को लेकर लखनऊ को अहम जिम्मेदारी भी मिलेगी।
डरें नहीं, युद्घ तो होंगे ही...
वायुसेना से सेवानिवृत्त विंग कमांडर डॉ. मनोज कुमार ने कार्यक्रम के दौरान दर्शकों से तीस सेकेंड मांगे। उन्होंने कहाकि युद्घ वास्तविकता हैं। युद्घ तो होंगे ही। ऐसे में हमें आधारभूत रूप से मजबूत होना होगा। पांच आतंकवादी आकर 25 लोगों को मारकर चले जाते हैं तो ऐसी घटनाओं से डरें नहीं। इस पर हमें सोचने की जरूरत है। हमें खुद को मानसिक रूप से तैयार रखना होगा। इस पर दर्शकों की तालियों से माहौल में गर्मी पैदा हो गई।