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Lucknow News: यूनिफॉर्म के नाम पर अभिभावकों पर दोहरी मार
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सदर और कैंट में दुकानों पर खरीदारी करते अभिभावक।
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लखनऊ। राजधानी के निजी विद्यालयों में यूनिफॉर्म को लेकर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। यहां विद्यार्थियों के लिए दो तरह की यूनिफॉर्म अनिवार्य कर दी गई है। एक सामान्य दिनों के लिए और दूसरी हाउस ड्रेस के रूप में। स्थिति यह है कि हाउस ड्रेस की कीमत सामान्य यूनिफॉर्म से अधिक रखी जा रही है।
शुक्रवार को कैंट और अमीनाबाद स्थित बुक स्टॉल व यूनिफॉर्म दुकानों पर की गई पड़ताल में अभिभावकों की परेशानी साफ नजर आई। कई अभिभावक एक हाथ में किताब-कॉपी और दूसरे हाथ में महंगी यूनिफॉर्म लिए नजर आए। नर्सरी कक्षा के छात्रों के लिए भी दो तरह की ड्रेस लेना अनिवार्य किया गया है।
पैरेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के संयोजक प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी विद्यालयों में सभी कक्षाओं के लिए एक समान यूनिफॉर्म होती है, जबकि निजी स्कूलों में हर दो-तीन कक्षाओं के बाद ड्रेस बदल दी जाती है। उन्होंने जिला शुल्क नियामक समिति से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
जिला शुल्क नियामक समिति की नोडल अधिकारी एडीएम ज्योति गौतम ने बताया कि उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र (शुल्क विनियमन) अधिनियम का पालन करना सभी विद्यालयों को अनिवार्य है। स्कूल के अंदर हाउस के आधार पर अलग-अलग ड्रेस हो लेकिन यह ड्रेस पांच वर्ष से पहले नहीं बदले जा सकते हैं। शिकायत सही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कैंट क्षेत्र की एक यूनिफॉर्म दुकान पर पहुंचे अभिभावक राजेश मौर्या ने बताया कि उनके बेटे की सातवीं कक्षा के लिए स्कूल ने दो यूनिफॉर्म खरीदना जरूरी किया है। सामान्य यूनिफॉर्म की कीमत 900 रुपये है, जबकि हाउस ड्रेस 1200 रुपये में मिल रही है।
अमीनाबाद में खरीदारी कर रहीं रेखा सिंह ने बताया कि एक बेटा छठी कक्षा में पढ़ता है और दूसरा बेटा पांचवीं में है। दो साल पहले खरीदी गई यूनिफॉर्म अब बेकार हो गई, क्योंकि कक्षा बदलते ही स्कूल ने ड्रेस का पैटर्न बदल दिया।
ड्रेस व किताब पर मनमानी वसूली पर प्रधानाचार्य को पहले करें शिकायत
एडीएम ज्योति गौतम ने कहा कि शुल्क विनियमन के तहत जिला स्तरीय कमेटी बनाई गई है। यदि कोई विद्यालय या दुकानदार ड्रेस और किताब के मूल्य से अधिक वसूली कर रहा है तो पहले इसकी शिकायत प्रधानाचार्य से करें। सुनवाई न होने की स्थिति में गठित समिति से करें। जांच में सही पाए जाने पर पहली बार विद्यालय के खिलाफ एक लाख का जुर्माना लगेगा, दूसरी बार पांच लाख रुपये। इसके बाद भी शिकायत मिलती है तो अधिनियम के तहत उचित कार्रवाई होगी। अधिनियम के तहत विद्यालय में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी को केवल एक बार पंजीकरण व प्रवेश शुल्क देना होगा। प्रत्येक विद्यालय को नए सत्र शुरू होने से पहले ही फीस की जानकारी वेबसाइट पर अपडेट करना अनिवार्य है।
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शुक्रवार को कैंट और अमीनाबाद स्थित बुक स्टॉल व यूनिफॉर्म दुकानों पर की गई पड़ताल में अभिभावकों की परेशानी साफ नजर आई। कई अभिभावक एक हाथ में किताब-कॉपी और दूसरे हाथ में महंगी यूनिफॉर्म लिए नजर आए। नर्सरी कक्षा के छात्रों के लिए भी दो तरह की ड्रेस लेना अनिवार्य किया गया है।
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पैरेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के संयोजक प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी विद्यालयों में सभी कक्षाओं के लिए एक समान यूनिफॉर्म होती है, जबकि निजी स्कूलों में हर दो-तीन कक्षाओं के बाद ड्रेस बदल दी जाती है। उन्होंने जिला शुल्क नियामक समिति से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
जिला शुल्क नियामक समिति की नोडल अधिकारी एडीएम ज्योति गौतम ने बताया कि उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र (शुल्क विनियमन) अधिनियम का पालन करना सभी विद्यालयों को अनिवार्य है। स्कूल के अंदर हाउस के आधार पर अलग-अलग ड्रेस हो लेकिन यह ड्रेस पांच वर्ष से पहले नहीं बदले जा सकते हैं। शिकायत सही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कैंट क्षेत्र की एक यूनिफॉर्म दुकान पर पहुंचे अभिभावक राजेश मौर्या ने बताया कि उनके बेटे की सातवीं कक्षा के लिए स्कूल ने दो यूनिफॉर्म खरीदना जरूरी किया है। सामान्य यूनिफॉर्म की कीमत 900 रुपये है, जबकि हाउस ड्रेस 1200 रुपये में मिल रही है।
अमीनाबाद में खरीदारी कर रहीं रेखा सिंह ने बताया कि एक बेटा छठी कक्षा में पढ़ता है और दूसरा बेटा पांचवीं में है। दो साल पहले खरीदी गई यूनिफॉर्म अब बेकार हो गई, क्योंकि कक्षा बदलते ही स्कूल ने ड्रेस का पैटर्न बदल दिया।
ड्रेस व किताब पर मनमानी वसूली पर प्रधानाचार्य को पहले करें शिकायत
एडीएम ज्योति गौतम ने कहा कि शुल्क विनियमन के तहत जिला स्तरीय कमेटी बनाई गई है। यदि कोई विद्यालय या दुकानदार ड्रेस और किताब के मूल्य से अधिक वसूली कर रहा है तो पहले इसकी शिकायत प्रधानाचार्य से करें। सुनवाई न होने की स्थिति में गठित समिति से करें। जांच में सही पाए जाने पर पहली बार विद्यालय के खिलाफ एक लाख का जुर्माना लगेगा, दूसरी बार पांच लाख रुपये। इसके बाद भी शिकायत मिलती है तो अधिनियम के तहत उचित कार्रवाई होगी। अधिनियम के तहत विद्यालय में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी को केवल एक बार पंजीकरण व प्रवेश शुल्क देना होगा। प्रत्येक विद्यालय को नए सत्र शुरू होने से पहले ही फीस की जानकारी वेबसाइट पर अपडेट करना अनिवार्य है।

सदर और कैंट में दुकानों पर खरीदारी करते अभिभावक।

सदर और कैंट में दुकानों पर खरीदारी करते अभिभावक।

सदर और कैंट में दुकानों पर खरीदारी करते अभिभावक।