लाखों परिवारों की पीड़ा का इतिहास है विभाजन : मुख्यमंत्री योगी
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योगी ने कहा कि यह समझना जरूरी है कि विभाजन की परिस्थितियां क्यों पैदा हुईं। इसके लिए कौन जिम्मेदार था। दोषियों को कितनी सजा मिली। विभाजन में पंजाब और बंगाल के हिंदू बाहुल्य हिस्सों को भी पाकिस्तान को सौंप दिया गया। इस अवसर पर लगाई गई प्रदर्शनी की तस्वीरों और वीडियो का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें उस समय की भयावह परिस्थितियों की झलक मिलती है। यह देखना चाहिए कि किस तरह लोगों ने अपने जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी झेली। पंजाब में अकेले लाखों लोगों की जान गई।
आतंकवाद, नक्सलवाद और उग्रवाद जैसी चुनौतियों को भी अतीत की परिस्थितियों और देश के भीतर पैदा हुए विभाजनकारी तत्वों के संदर्भ में समझने की जरूरत है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, मंत्री डॉ. अरुण कुमार, महापौर सुषमा खर्कवाल, सांसद बृजलाल, पूर्व मंत्री एवं एमएलसी डॉ. महेंद्र सिंह, विधायक जयदेवी, डॉ. नीरज बोरा समेत अनेक नेता और विस्थापित परिवारों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
सीएम ने कहा कि विभाजन के बाद कांग्रेस शत्रु संपत्ति की रक्षा और उसमें बंदरबांट करने में मशगूल रही। ये लोग उसी संपत्ति को लूट-खसोट का आधार बनाकर अपनी निजी प्रॉपर्टी बना रहे थे। यह पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन लोगों में बंटनी चाहिए थी। महमूदाबाद के नवाब की पूरी प्रॉपर्टी को बचाने के लिए कांग्रेसियों ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। सपा भी ऐसे लोगों की पैरोकार बन रही है, जो देश की आजादी के खिलाफ थे।
सीएम ने राजनीतिक स्वार्थ और परिवारवाद को लेकर विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि अनेक संस्थाओं और योजनाओं का नामकरण एक परिवार विशेष से जोड़ा गया। क्रांतिकारियों को सम्मान नहीं मिला। वोट बैंक की राजनीति के लिए विपक्ष ने नागरिकता संशोधन कानून को लेकर भ्रम फैलाया जिससे कई जगहों पर आंदोलन और हिंसा की कोशिशें हुईं। प्रदेश में कानून-व्यवस्था मजबूत होने के कारण स्थिति काबू में रही। हमने पीलीभीत और लखीमपुर खीरी में बांग्लादेश से आए हजारों परिवारों के दस्तावेज दुरुस्त कर जमीन के कागजात और नागरिकता दिलाई। रामपुर में पाकिस्तान से आए लोगों के भी इसकी कवायद जारी है। विभाजन के समय विस्थापितों के पुनर्वास और उनकी संपत्ति के नुकसान की भरपाई के प्रयास होने चाहिए थे लेकिन तब सरकारों ने ध्यान नहीं दिया।

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर शुक्रवार को लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम।

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