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पसमांदा मुसलमानों को भाषण नहीं, आरक्षण दे सरकार: मौलाना रशादी
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अनुच्छेद 341 से धार्मिक प्रतिबंध हटाने की मांग, बोले- अब मुसलमान वोट बैंक नहीं, अधिकार और हिस्सेदारी की लड़ाई लड़ेगा
लखनऊ। राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी ने कहा कि अगर केंद्र सरकार वास्तव में पसमांदा मुसलमानों की हितैषी है तो इसका सबूत भाषणों से नहीं, उन्हें आरक्षण देकर दे। उन्होंने अनुच्छेद 341 में लगे धार्मिक प्रतिबंध को हटाने की मांग की।
सोमवार को हुसैनगंज स्थित रीजेंसी टावर में राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में मौलाना रशादी ने कहा कि 10 अगस्त 1950 को अनुसूचित जाति की सूची में लगाए गए धार्मिक प्रतिबंध से पसमांदा मुसलमानों और ईसाइयों के साथ ऐतिहासिक अन्याय हुआ। कौंसिल इस प्रतिबंध के खिलाफ लंबे समय से संघर्ष कर रही है और 10 अगस्त को ‘अन्याय दिवस’ के रूप में मनाती है।
उन्होंने कहा कि पसमांदा मुसलमानों के नाम पर भाषण, सम्मेलन और राजनीतिक नैरेटिव तो तैयार किए जा रहे हैं, लेकिन आरक्षण के सवाल पर सरकार खामोश है। केंद्र और प्रदेश में अब तक बनी सरकारों ने किसी न किसी रूप में मुसलमानों के वोट का इस्तेमाल किया। कभी मुसलमानों का हितैषी होने का दावा कर सत्ता हासिल की गई तो कभी मुसलमानों के नाम पर लोगों को डराकर सत्ता हासिल की गई। अब मुसलमान केवल वोट बैंक बनकर नहीं रहेगा, बल्कि अपने अधिकार, हिस्सेदारी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की लड़ाई खुद लड़ेगा।
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मौलाना रशादी ने कहा कि आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल पूरी ताकत से हिस्सा लेगी। कौंसिल मुसलमानों, वंचित समाज और कमजोर वर्गों के अधिकार, सम्मान, न्याय और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे को चुनावी विमर्श के केंद्र में लाएगी।
सम्मेलन में पदाधिकारी रहे मौजूद
इस मौके पर सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मौलाना मुक्तादा हुसैन खैरी, प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह, राष्ट्रीय महासचिव एडवोकेट तलहा रशादी, राष्ट्रीय सचिव मो. नसीम के अलावा शहाब आलम, नोमान अहमद, सरवर कासमी, अंसार अहमद आदि मौजूद रहे।
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लखनऊ। राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी ने कहा कि अगर केंद्र सरकार वास्तव में पसमांदा मुसलमानों की हितैषी है तो इसका सबूत भाषणों से नहीं, उन्हें आरक्षण देकर दे। उन्होंने अनुच्छेद 341 में लगे धार्मिक प्रतिबंध को हटाने की मांग की।
सोमवार को हुसैनगंज स्थित रीजेंसी टावर में राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में मौलाना रशादी ने कहा कि 10 अगस्त 1950 को अनुसूचित जाति की सूची में लगाए गए धार्मिक प्रतिबंध से पसमांदा मुसलमानों और ईसाइयों के साथ ऐतिहासिक अन्याय हुआ। कौंसिल इस प्रतिबंध के खिलाफ लंबे समय से संघर्ष कर रही है और 10 अगस्त को ‘अन्याय दिवस’ के रूप में मनाती है।
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उन्होंने कहा कि पसमांदा मुसलमानों के नाम पर भाषण, सम्मेलन और राजनीतिक नैरेटिव तो तैयार किए जा रहे हैं, लेकिन आरक्षण के सवाल पर सरकार खामोश है। केंद्र और प्रदेश में अब तक बनी सरकारों ने किसी न किसी रूप में मुसलमानों के वोट का इस्तेमाल किया। कभी मुसलमानों का हितैषी होने का दावा कर सत्ता हासिल की गई तो कभी मुसलमानों के नाम पर लोगों को डराकर सत्ता हासिल की गई। अब मुसलमान केवल वोट बैंक बनकर नहीं रहेगा, बल्कि अपने अधिकार, हिस्सेदारी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की लड़ाई खुद लड़ेगा।
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मौलाना रशादी ने कहा कि आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल पूरी ताकत से हिस्सा लेगी। कौंसिल मुसलमानों, वंचित समाज और कमजोर वर्गों के अधिकार, सम्मान, न्याय और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे को चुनावी विमर्श के केंद्र में लाएगी।
सम्मेलन में पदाधिकारी रहे मौजूद
इस मौके पर सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मौलाना मुक्तादा हुसैन खैरी, प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह, राष्ट्रीय महासचिव एडवोकेट तलहा रशादी, राष्ट्रीय सचिव मो. नसीम के अलावा शहाब आलम, नोमान अहमद, सरवर कासमी, अंसार अहमद आदि मौजूद रहे।