{"_id":"69ccc93036c89172e6062f39","slug":"psychologists-develop-new-tool-to-identify-suicidal-syndrome-2026-04-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Suicide: आत्महत्या के ख्याल को पहचान लेंगे सात सवाल, सिंड्रोम की जांच के लिए विकसित किया गया नया टूल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Suicide: आत्महत्या के ख्याल को पहचान लेंगे सात सवाल, सिंड्रोम की जांच के लिए विकसित किया गया नया टूल
मनीषा गोस्वामी, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Wed, 01 Apr 2026 12:58 PM IST
विज्ञापन
सार
आत्महत्या के जोखिम को मापने वाले 61 सवालों के लंबे फॉर्म को घटाकर मात्र सात सवालों का संक्षिप्त संस्करण तैयार किया है। यह नया टूल कम समय में आत्महत्या के जोखिम की पहचान कर लोगों की जान की रक्षा करेगा।
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
विस्तार
अस्पतालों और आपातकालीन वार्डों में समय की कमी की वजह से कई बार आत्महत्या के जोखिम वाले गंभीर मरीज की सही पहचान नहीं हो पाती है। इसके समाधान के लिए मनोवैज्ञानिकों ने एक नया टूल विकसित किया है। इस टूल में मात्र सात सवालों के जवाब से पता चल सकेगा कि मरीज में आत्महत्या का जोखिम कितना है।
Trending Videos
एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने आत्महत्या के जोखिम को मापने वाले 61 सवालों के लंबे फॉर्म को घटाकर मात्र सात सवालों का संक्षिप्त संस्करण तैयार किया है। यह नया टूल कम समय में आत्महत्या के जोखिम की पहचान कर लोगों की जान की रक्षा करेगा। एशियन जर्नल ऑफ साइकेट्री में प्रकाशित अध्ययन में यह दावा किया गया है। अध्ययन में किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के मनोचिकित्सक डॉ. सुजीत कुमार कर, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान जोधपुर (एम्स) के मनोचिकित्सक नरेश नेभीनानी, पुष्पागिरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस थिरुवल्ला (केरल) व अन्य सेंटरों के मनोचिकित्सक मनोवैज्ञानिक शामिल हैं। डॉ. सुजीत के अनुसार प्रश्नों की तालिका को पेटेंट कराने की प्रक्रिया चल रही है जिसकी वजह से उन्हें सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन
ये भी पढ़ें - सीएम योगी ने 250 इलेक्ट्रिक व सीएनजी वाहनों को दिखाई हरी झंडी, बोले- बीते नौ साल में लखनऊ में जीवनस्तर बढ़ा
ये भी पढ़ें - अनुमान के उलट मौसम का यू-टर्न, लखनऊ सहित अवध के कई जिलों में सुबह से बारिश; पूर्वानुमान जारी
इस तरह सात सवालों की हुई पहचान
शोधकर्ताओं ने 24 बड़े अस्पतालों से 1196 मरीजों (तीव्र अवसाद से पीड़ित) और 1067 स्वस्थ व्यक्तियों को इस अध्ययन में शामिल किया। आधुनिक सांख्यिकीय मॉडल (आईआरटी विश्लेषण) का उपयोग कर उन सात महत्वपूर्ण सवालों की पहचान की जो 61 सवालों के बराबर ही प्रभावी जानकारी प्रदान करते हैं। इसमें साबित हुआ कि नया संक्षिप्त टूल मूल स्केल की तरह ही काम करता है। साथ ही, मूल पांच-कारक संरचना को बरकरार रखता है। तीन अलग-अलग सैंपल समूहों में इसकी आंतरिक स्थिरता बहुत मजबूत मिली। यह संक्षिप्त टूल किसी व्यक्ति के भीतर चल रहे सुसाइड क्राइसिस सिंड्रोम (एससीएस) की पहचान करने में काफी हद तक सफल रहा।
इसलिए महत्वपूर्ण है यह टूल: अस्पताल के इमरजेंसी रूम या ओपीडी में डॉक्टरों के पास इतना समय नहीं होता कि वे मरीज से 61 सवाल पूछ सके। ऐसे में अक्सर मरीज में आत्महत्या का जोखिम नजरअंदाज हो जाता है। नए टूल से कम समय में सुसाइड क्राइसिस को पहचान कर लोगों की जान की रक्षा की जा सकेगी।