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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: ट्रस्ट का सख्त फैसला, चंपत राय की हुई विदाई; कृष्ण मोहन देखेंगे मंदिर की व्यवस्था

Mon, 06 Jul 2026 06:49 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: रोहित मिश्र Updated Mon, 06 Jul 2026 06:49 PM IST
सार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर ट्रस्ट की करीब सवा तीन घंटे चली बैठक के बाद चंपत राय को पद से हटा दिया गया है। 

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Ram Temple offering theft: Trust takes strict action, Chapant Rai is dismissed; not allowed to attend meeting
राम मंदिर चढ़ावा चोरी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक महत्वपूर्ण और लंबी बैठक सोमवार को संपन्न हुई, जिसमें ट्रस्ट का लगभग पूरा कोरम मौजूद रहा। बैठक में ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास सहित सभी प्रमुख सदस्य, निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेंद्र दास और ट्रस्ट के संविधान का प्रारूप तैयार करने वाले 99 वर्षीय वरिष्ठ अधिवक्ता के. परासरन भी उपस्थित रहे। कुछ सदस्यों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़कर कोरम पूरा किया। बैठक के बाद ट्रस्ट ने कहा कि राम मंदिर निर्माण 500 वर्षों के लंबे संघर्ष, असंख्य बलिदानों और करोड़ों रामभक्तों की अगाध आस्था का प्रतिफल है। ऐसे में दानपात्रों से चढ़ावा चोरी होने का मामला पूरे समाज के लिए अत्यंत पीड़ादायक और शर्मनाक है। ट्रस्ट इस घटना से गहरा आहत है और उसका मानना है कि दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।

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चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार
बैठक के दौरान ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा द्वारा दिए गए इस्तीफों पर विस्तृत चर्चा हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता के. परासरन ने ट्रस्ट के संविधान के प्रावधानों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि इस्तीफा दिए जाने के बाद वह स्वतः प्रभावी माना जाता है और ट्रस्ट के पास इसे अस्वीकार करने का कोई विकल्प नहीं है। इसके बाद दोनों के इस्तीफे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिए गए। हालांकि, ट्रस्ट ने चंपत राय द्वारा वर्षों तक राम मंदिर निर्माण में निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका की सराहना करते हुए उनके अमूल्य योगदान का सम्मान किया।
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कृष्ण मोहन को मिली अंतरिम जिम्मेदारी, कीमती सामान गायब होने की बात भ्रामक
चंपत राय के इस्तीफे के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने का दायित्व अंतरिम रूप से कृष्ण मोहन को सौंपा गया है। उन्हें अपनी नई टीम गठित कर सभी व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही ट्रस्ट ने मीडिया और सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों का खंडन किया है, जिनमें मंदिर से अन्य कीमती वस्तुओं के गायब होने का दावा किया जा रहा था। ट्रस्ट ने साफ किया कि ये बातें पूरी तरह भ्रामक हैं; मंदिर में भेंट स्वरूप प्राप्त लगभग 2,800 प्रकार की सामग्रियों का पूरा रजिस्टर पूरी तरह सुरक्षित है और सभी वस्तुएं अपनी जगह पर हैं। आवश्यकता पड़ने पर इस रिकॉर्ड को सार्वजनिक भी किया जाएगा।
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पारदर्शी व्यवस्था के लिए बनेगी समिति, 22 जुलाई को अगली बैठक
भविष्य में मंदिर की व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और त्रुटिरहित बनाने के लिए बैठक में एक छोटी समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है। ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को निर्धारित की गई है, जिसमें एसआईटी (SIT) की जांच रिपोर्ट की प्रगति की समीक्षा की जाएगी, नए न्यासियों की नियुक्ति पर विचार होगा और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। ट्रस्ट ने दोटूक शब्दों में कहा कि चोरी में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और एसआईटी निष्पक्ष जांच कर उन्हें कानून के तहत कठोर दंड दिलाएगी। इसके साथ ही ट्रस्ट ने चिंता जताई कि कुछ असामाजिक तत्व इस घटना की आड़ में देश भर में राम मंदिर और रामभक्तों की छवि को धूमिल करने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं, इसलिए समाज को ऐसी किसी भी तरह की अफवाहों और भ्रामक प्रचार से पूरी तरह सावधान रहना चाहिए।

बैठक से बाहर रहे चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक सोमवार को राम मंदिर परिसर में हुई। इस बैठक के सबसे बड़े घटनाक्रम में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा बैठक से बाहर रहे। वहीं, मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़े गोपाल राव को भी बैठक में शामिल होने की अनुमति नहीं मिली।

सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के कुछ सदस्यों ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि यदि चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा बैठक में मौजूद रहेंगे तो वे बैठक का हिस्सा नहीं बनेंगे। सदस्यों के इसी रुख के बाद दोनों बैठक में शामिल नहीं हुए। बताया जा रहा है कि यह फैसला बैठक की निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया था। 

चंपत राय के बचाव में उतरी वीएचपी

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने सोमवार को कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अपने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर जो भी निर्णय लेगा, वह उसका सम्मान करेगी। वीएचपी ने जोर देकर कहा कि केवल आरोपों से किसी का दोष सिद्ध नहीं हो जाता।

संतों के विवेक पर पूरा भरोसा
आरएसएस के इस सहयोगी संगठन ने यह भी कहा कि राम मंदिर में दान के कथित गबन (घोटाले) की चल रही जांच को अपने निष्कर्ष तक पहुंचने दिया जाना चाहिए। वीएचपी के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि संगठन इस बैठक के नतीजों पर कोई कयास नहीं लगाएगा और उन्हें ट्रस्ट के विवेक पर पूरा भरोसा है। ट्रस्ट खुद ही फैसला करेगा और इसकी घोषणा करेगा। वह जो भी फैसला लेगा, हम उसका सम्मान करेंगे। ट्रस्ट से जुड़े संतों के विवेक पर हमें पूरा भरोसा है।

जब तक दोष साबित न हो जाए, तब तक किसी को अपराधी न समझें
सुरेंद्र जैन ने चंपत राय और अनिल मिश्रा का बचाव करते हुए कहा कि केवल आरोप लगने से कोई व्यक्ति दोषी नहीं हो जाता। उन्होंने कहा कि जब तक दोष साबित न हो जाए, तब तक किसी को अपराधी न समझें। जांच एजेंसी को अपना काम करने दें और जांच के नतीजों का इंतजार करें। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने जांच पूरी होने से पहले ही चंपत राय को दोषी ठहराने की कोशिश की है।

कई आरोप जांच में टिक नहीं पाए
जैन ने दावा किया कि चंपत राय के खिलाफ लगाए गए कई आरोप जांच में टिक नहीं पाए हैं। उन्होंने कहा कि वीएचपी नेता ने जांच से बचने की कोशिश नहीं की है, बल्कि उन्होंने एसआईटी के गठन का समर्थन किया है और जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआती निष्कर्ष सामने आने के तुरंत बाद मंदिर ट्रस्ट ने तत्परता दिखाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई और किसी को भी बचाने का प्रयास नहीं किया।

विश्वास बहाल करना पहली चुनौती

Ram Temple offering theft: Trust takes strict action, Chapant Rai is dismissed; not allowed to attend meeting
कृष्ण मोहन। - फोटो : amar ujala

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है, जिसके तहत चंपत राय की विदाई के बाद अब कृष्ण मोहन को ट्रस्ट की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिम्मेदारी संभालते ही कृष्ण मोहन ने अपनी पहली औपचारिक पत्रकार वार्ता को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने मुख्य रूप से ट्रस्ट की साख और जनता के भरोसे को बहाल करने पर जोर दिया। 

उन्होंने खुले तौर पर स्वीकार किया कि हाल के दिनों में समाज के मन में कुछ बातों को लेकर संशय और अविश्वास का माहौल बना है, जिसे दूर करना ही उनकी सबसे पहली और मुख्य प्राथमिकता होगी। 

उन्होंने राम भक्तों को भरोसा दिलाया कि इस अविश्वास के भाव को समाप्त करने के लिए जो भी आवश्यक और कड़े कदम उठाने की जरूरत होगी, ट्रस्ट वह सारे कार्य पूरी निष्ठा के साथ करेगा। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करते हुए एक महत्वपूर्ण घोषणा की कि दर्शन के दौरान दर्शनार्थियों द्वारा किए जाने वाले दान को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए एक पुख्ता, पारदर्शी और अभेद्य व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।

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