Ratan Tata: रतन टाटा ने यूपी के 1.5 लाख से ज्यादा गरीब, किसान, महिलाओं और युवाओं का किया उद्धार
टाटा ट्रस्ट ने कुपोषण दर को कम करने और मातृ स्वास्थ्य में सुधार के लिए राज्य सरकार के साथ काम किया है। राष्ट्रीय पोषण मिशन (पोषण अभियान) के साथ साझेदारी में ट्रस्ट ने 1200 से ज्यादा फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया।
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टाटा ट्रस्ट प्रदेश में स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, आजीविका और बुनियादी ढांचे के विकास के साथ विभिन्न सामाजिक कल्याण और विकास परियोजनाओं में सक्रिय रूप से शामिल है। राज्य सरकार के साथ शुरू इन योजनाओं का असर 1.5 लाख से ज्यादा गरीबों, वंचितों, किसानों, महिलाओं और युवाओं पर पड़ा है। इससे उनके जीवनस्तर में व्यापक बदलाव आए।
कुपोषण से लेकर कैंसर तक के इलाज में मदद
टाटा ट्रस्ट ने कुपोषण दर को कम करने और मातृ स्वास्थ्य में सुधार के लिए राज्य सरकार के साथ काम किया है। राष्ट्रीय पोषण मिशन (पोषण अभियान) के साथ साझेदारी में ट्रस्ट ने 1200 से ज्यादा फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया। इससे बहराइच और बलरामपुर जैसे जिलों में बच्चों में कुपोषण में उल्लेखनीय कमी आई। यही नहीं कैंसर देखभाल के लिए संस्थानों के साथ साझेदारी कर अत्याधुनिक सुविधाएं दी हैं। पूर्वी यूपी और पड़ोसी राज्यों के लोगों को सस्ती कैंसर देखभाल सेवाओं के लिए वाराणसी में 150 बेड का कैंसर अस्पताल स्थापित कर रहा है।
शिक्षा एवं कौशल विकास पर भी ध्यान
सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार का मिशन तैयार किया। इसका उद्देश्य हाशिए पर रहने वाले समुदायों के बीच सीखने और स्कूल जाने की इच्छा पैदा करना है। इसके लिए वाराणसी और लखनऊ में 800 से अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षित किया। इस मुहिम के सहारे 50,000 से अधिक छात्रों को स्कूल तक लाया गया। ट्रस्ट युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर उन्हें हुनरमंद भी बना रहा है। प्रदेश में 5,000 से अधिक युवाओं को इसके तहत प्रशिक्षित किया गया है।
किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर रहा ट्रस्ट
टाटा ट्रस्ट ने ग्रामीण किसानों को फसल विविधीकरण और कुशल जल उपयोग जैसी स्थायी कृषि प्रणाली अपनाने में मदद की है। सीतापुर, बहराइच और बाराबंकी जैसे जिलों में 50,000 से अधिक किसानों ने टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाया है। इससे किसानों की आय में 20-30% की वृद्धि देखी गई है। राज्य में 15,000 से अधिक महिलाओं के स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं। मुर्गीपालन, हस्तशिल्प और छोटे पैमाने के उद्यमों में प्रशिक्षित किया गया है। इस पहल से महिलाओं की आय में 30-40% की वृद्धि हुई है।
20 हजार से ज्याद घरों तक पहुंचाया शुद्ध जल
वाराणसी और मिर्जापुर में ट्रस्ट ने 20,000 से अधिक घरों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाया है। डायरिया और हैजा जैसी जलजनित बीमारियों में 50% की कमी दर्ज की गई है। विभिन्न जिलों में 5,000 से अधिक शौचालयों का निर्माण कराके 10,000 से ज्यादा परिवारों की मदद की।
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