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संभल हिंसा : 199 गवाहों ने खोलीं परतें तो सामने आई हिंसा की पूरी कहानी, रिपोर्ट में हुए बड़े खुलासे

Thu, 06 Aug 2026 08:59 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Thu, 06 Aug 2026 08:59 AM IST
सार

संभल हिंसा की रिपोर्ट को यूपी विधानमंडल के दोनों सदनों में पेश किया गया। रिपोर्ट में कई बड़े खुलासे हुए हैं। वहीं, पूरे मामले में पुलिस को क्लीन चिट दी गई है। देखें, पूरे बवाल की टाइमलाइन: 

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Sambhal Violence Report: Major revelations emerge as 199 witnesses peel back the layers, unveiling the full s
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

विधानमंडल के दोनों सदनों में रखी गई संभल हिंसा जांच आयोग की रिपोर्ट में कई अहम खुलासे किए गए हैं। आयोग ने जांच में हिंसा को अचानक हुई घटना नहीं, बल्कि पहले से रची गई साजिश बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, 90 वर्षों के सांप्रदायिक इतिहास, एएसआई के अभिलेख, बैलेस्टिक और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ 199 गवाहों के बयान के आधार पर निष्कर्ष तैयार किए गए हैं।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि 21 नवंबर 2024 को संभल सांसद के नाम से बने एक व्हाट्सएप ग्रुप में लोगों से शाही जामा मस्जिद में बड़ी संख्या में नमाज अदा करने की अपील की गई। इसी तरह के संदेश अन्य ग्रुपों में भी प्रसारित हुए। अगले दिन सांसद रिजाउर्रहमान बर्क के मीडिया में दिए गए बयान, यह मस्जिद है, मस्जिद थी और मस्जिद रहेगी... के वायरल होने के बाद माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।
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इसके बाद हिंसक भीड़ ने सर तन से जुदा जैसे नारे लगाए और पुलिस बल पर हमला कर दिया। पथराव, आगजनी और फायरिंग के दौरान पुलिसकर्मियों की पिस्टलें और मैगजीन भी लूट ली गईं। इन पिस्टलों से फायरिंग की गई, जिसमें सात पुलिसकर्मी घायल हुए। हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी। रिपोर्ट में सांसद बर्क के साथ जामा मस्जिद इंतेजामिया कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट जफर अली, सचिव मशहूद अली फारूकी और स्थानीय विधायक प्रतिनिधि सुहेल इकबाल की भूमिका का भी उल्लेख है।

आयोग का कहना है कि अदालत के आदेश का वास्तविक स्वरूप लोगों से छिपाया गया और मस्जिद के अस्तित्व पर खतरा बताकर उकसाया गया। रिपोर्ट में संभल के इतिहास का भी उल्लेख है। आयोग ने कहा कि शहर पहले भी कई बार सांप्रदायिक हिंसा का गवाह रहा है। इसमें 1978 का दंगा सबसे विनाशकारी था। आयोग ने ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कई सुझाव दिए। कहा, कोर्ट के आदेशों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।

पुलिस को क्लीन चिट: आयोग ने यह भी कहा कि हिंसक भीड़ में आपराधिक तत्व शामिल थे, जिन्होंने सुनियोजित तरीके से पुलिस को निशाना बनाया। रिपोर्ट में पुलिस और जिला प्रशासन की कार्रवाई को परिस्थितियों के अनुरूप बताते हुए कहा गया है कि संयमित एवं प्रभावी कार्रवाई के कारण भीड़ हिंदू बहुल इलाकों तक नहीं पहुंच सकी, जिससे संभावित बड़े सांप्रदायिक दंगे को टालने में सफलता मिली।

आयोग की प्रमुख सिफारिशें

- सोशल मीडिया पर अफवाह, फर्जी वीडियो और भड़काऊ पोस्ट फैलाने वालों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।
- भड़काऊ बयान देने वाले जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक नेताओं पर कानूनी कार्रवाई की जाए।
- विवादित धार्मिक स्थलों के कोर्ट सर्वे से पहले विस्तृत खुफिया आकलन और सुरक्षा योजना तैयार की जाए।
- सर्वे से पहले दोनों पक्षों के संभ्रांत नागरिकों, धर्मगुरुओं और शांति समिति के सदस्यों से संवाद स्थापित किया जाए तथा सर्वे दिन के समय ड्रोन, बॉडी कैमरे और पर्याप्त सुरक्षा बल की मौजूदगी में कराया जाए।
- संवेदनशील जिलों में लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (एलआईयू) को मजबूत किया जाए और थाना स्तर पर आधुनिक दंगा-रोधी उपकरण व पर्याप्त रिजर्व पुलिस बल उपलब्ध कराया जाए।
- एएसआई संरक्षित स्मारकों में बिना अनुमति निर्माण या बदलाव पर तत्काल कानूनी कार्रवाई हो तथा जिला प्रशासन और एएसआई की संयुक्त टीम नियमित निरीक्षण कर अतिक्रमण व अवैध निर्माण रोके।
- सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए नियमित शांति समिति की बैठकें और नागरिक संवाद आयोजित किए जाएं।

ऐसे शुरू हुआ बवाल

19 नवंबर 2024- हिंदू पक्ष ने जामा मस्जिद के हरिहर मंदिर होने का दावा पेश किया।
19 नवंबर 2024-संभल के चंदौसी स्थित सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य कुमार सिंह ने दावा स्वीकृत किया।
19 नवंबर 2024- कोर्ट कमिश्रर नियुक्त किया, सर्वे के आदेश किए।
19 नवंबर 2024- शाम करीब 7 बजे कोर्ट कमिश्रर रमेश सिंह राघव जामा मस्जिद सर्वे के लिए पहुंचे।
22 नवंबर 2024-शुक्रवार की दोपहर सांसद बर्क ने जामा मस्जिद के बाहर खड़े होकर मीडिया से बातचीत की और मस्जिद है और मस्जिद ही रहेगी। यह भाषण दिया था।
24 नवंबर 2024- सुबह 7 बजे कोर्ट कमिश्रर सर्वे के लिए पहुंचे थे, इसके बाद ही बवाल हुआ था।

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