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2016 की भर्ती में बड़ा स्कैम: एक नाम पर कहीं छह तो कहीं चार लोग कर रहे नौकरी, खुली पोल तो अफसरों के उड़े होश
चंद्रभान यादव, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: Bhupendra Singh
Updated Mon, 25 May 2026 09:02 AM IST
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सार
यूपी में 2016 की भर्ती में बड़ा स्कैम हुआ है। एक नाम पर कहीं छह तो कहीं चार लोग नौकरी कर रहे हैं। पोल खुली तो अफसरों के भी होश उड़ गए। ये सभी स्वास्थ्य विभाग में डॉर्क रूम सहायक के रूप में 10 साल से नौकरी कर रहे हैं। स्वास्थ्य महानिदेशालय से लेकर सीएमओ कार्यालय की मिलीभगत से पूरा खेल हुआ। आगे पढ़ें पूरी खबर...
स्वास्थ्य विभाग में 2016 की भर्ती में बड़ा स्कैम।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
'सुधीर कुमार ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से डॉर्क रूम सहायक की परीक्षा पास की। वर्ष 2016 में स्वास्थ्य महानिदेशालय से नियुक्ति पत्र जारी हुआ, लेकिन इन दिनों प्रदेश में छह सुधीर कुमार नौकरी कर रहे हैं। हर साल करोड़ों रुपये का चूना लगा रहे हैं। इस तरह के दो दर्जन से ज्यादा मामले सामने आए हैं। यह खेल स्वास्थ्य महानिदेशालय और मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय की मिलीभगत से हुआ है।'
स्वास्थ्य विभाग में डॉर्क रूम सहायक की भर्ती में भी फर्जीवाड़ा हुआ है। यूपीएसएसएससी से जारी परीक्षा परिणाम के पास स्वास्थ्य महानिदेशालय से जारी सूची और मानव संपदा पोर्टल पर कार्यरत कर्मियों की सूची की पड़ताल में यह बात सामने आई है। अमर उजाला ने 36 नाम की पड़ताल की। इसमें 15 का नाम सूची में है। सुधीर की तरह की तरह ही अंशुल के नाम पर चार, मनोज सिंह, रजनीकांत के नाम पर तीन-तीन लोग नौकरी कर रहे हैं।
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स्वास्थ्य विभाग में डॉर्क रूम सहायक की भर्ती में भी फर्जीवाड़ा हुआ है। यूपीएसएसएससी से जारी परीक्षा परिणाम के पास स्वास्थ्य महानिदेशालय से जारी सूची और मानव संपदा पोर्टल पर कार्यरत कर्मियों की सूची की पड़ताल में यह बात सामने आई है। अमर उजाला ने 36 नाम की पड़ताल की। इसमें 15 का नाम सूची में है। सुधीर की तरह की तरह ही अंशुल के नाम पर चार, मनोज सिंह, रजनीकांत के नाम पर तीन-तीन लोग नौकरी कर रहे हैं।
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जन्म दिन में हेरफेर किया गया
इसी तरह धीरज कुमार सिंह, कीर्ति गुप्ता, नवनीत यादव, पवन कुमार, प्रदीप कुमार, पुष्पेंद्र कुमार, राहुल कुमार, सर्वेश कुमार, सौरव कुमार, विनीत सिंह के दो-दो लोग नौकरी कर रहे हैं। किसी के पिता के नाम की स्पेलिंग अलग है तो किसी के जन्म दिन में हेरफेर किया गया है। मानव संपदा पोर्टल पर इन सभी के कार्यभार ग्रहण करने की तिथि, वेतन खाता संख्या और ईएचआरएमएस आईडी अलग- अलग है।355 पद के सापेक्ष 337 की हुई थी भर्ती
वर्ष 2015 में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने 355 पद पर डॉर्क रूम सहायक के लिए आवेदन मांगे। 90 नंबर की परीक्षा और 10 नंबर का साक्षात्कार था। आयोग ने परीक्षा परिणाम जारी कर स्वास्थ्य महानिदेशालय को भेजा।272 लोगों की सूची जारी की गई
काउंसिलिंग के जरिए चयनितों को जिले आवंटित कर मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय भेजे गए। इसमें 16 जून 2016 को तत्कालीन महानिदेशक सुनील श्रीवास्तव और निदेशक पैरामेडिकल एससी त्रिपाठी के हस्ताक्षर से 272 लोगों की सूची जारी की गई। इसी तरह 15 जुलाई 2016 को 65 लोगों की सूची जारी की गई है। 18 लोगों ने नियुक्ति में हिस्सा नहीं लिया।मानव संपदा पोर्टल पर 36 लोगों का सूची से मिलाकर किया गया। यहां मौजूद डाटा और इस सूची का मिलान करने पर पता चला कि एक ही नाम से अलग- अलग लोग नौकरी कर रहे हैं। पूरे मामले की विस्तृत जांच हो तो प्रदेश में 337 की जगह पांच सौ से अधिक लोग नौकरी करते मिल सकते हैं।
केस 1
| नाम | पिता | वर्तमान तैनाती |
| सुधीर कुमार | जय प्रकाश | बलिया |
| सुधीर कुमार | जय प्रकाश | बाराबंकी |
| सुधीर कुमार | जय प्रकाश | इटावा |
| सुधीर कुमार | जय प्रकाश | इटावा |
| सुधीर कुमार | जय प्रकाश | आजमगढ़ |
| सुधीर कुमार | जय प्रकाश | शाहजहांपुर |
केस 2
| नाम | पिता | वर्तमान तैनाती |
| अंशुल कुमार | राम प्रकाश | अमेठी |
| अंशुल कुमार | श्रीराम प्रकाश | बदायूं |
| अंशुल कुमार | श्रीराम प्रकाश | इटावा |
| अंशुल कुमार | राम प्रकाश | हाथरस |
केस 3
| नाम | पिता | वर्तमान तैनाती |
| मनोज सिंह | देवकीनंदन सिंह | कानपुर देहात |
| मनोज सिंह | देवकीनंदन सिंह | लखनऊ |
| मनोज सिंह | देवकीनंदन सिंह | संत कबीर नगर |
अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग अमित कुमार घोष ने कहा कि मामला पुराना है। जानकारी में नहीं है। गलत नियुक्ति हुई है तो जांच कराई जाएगी। सभी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। विभाग में जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।