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Lucknow News: कार्रवाई में सुस्ती से बढ़ा वसूली का खेल
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लखनऊ। पैसा लेकर अवैध निर्माण कराने के मामले में शनिवार को एलडीए के एक इंजीनियर को भले ही विजिलेंस ने पकड़ लिया हो, लेकिन ऐसे और भी हैं जो सालों से यही काम कर रहे हैं। ये डरते इसलिए नहीं हैं कि क्योंकि शासन इन पर मेहरबान रहता है। कार्रवाई की रिपोर्ट जाने के बाद भी वर्षों दबाए रहता है। हाल यह है कि इंजीनियर तबादला होने के बाद भी नहीं जाते हैं और तबादला रुकवाकर आ जाते हैं। ऐसे में पैसा लेकर अवैध निर्माण कराने का खेल थमेगा, इसके आसार नहीं हैं।
उदाहरण के लिए 14 साल पहले का मामला ही देखिए। बीते साल दो जनवरी को हाईकोर्ट ने शहर में बढ़ते अवैध निर्माण को लेकर साल 2012 में कर्नल अशोक कुमार की ओर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाते हुए प्रमुख सचिव आवास का निजी हलफनामा मांगा था। यह सुनवाई घरों को तोड़कर काॅम्प्लेक्स, अपार्टमेंट बनाए जाने के मामले में थे। याचिका में कहा गया था कि किस तरह घरों को तोड़कर काॅम्प्लेक्स बनाए गए और एलडीए ने उनको रोका नहीं।
जब यह मामला आया था तो उस समय एलडीए ने कोर्ट में 81 अवैध निर्माण चिह्नित किए जाने की जानकारी दी थी। अवैध निर्माण कराने के मामले में 26 इंजीनियरों पर आरोप तय किए गए थे। इसके बाद फिर जांच हुई तो और 17 इंजीनियरों को अवैध निर्माण कराने में आरोपी मानते हुए शासन को कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी गई थी लेकिन हुआ कुछ नहीं। फाइल शासन में जाकर डंप हो गई। साल भर पहले जो तेजी आई थी वह एक बार फिर ठंडे बस्ते में हैं। अब हाल यह है कि 12 साल पहले 26 इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एलडीए से शासन को जो रिपोर्ट भेजी गई थी। उसमें 15 रिटायर हो चुके थे, एक इस्तीफा देकर नौकरी छोड़ चुका था और एक दूसरे विकास प्राधिकरण मेंं तैनात था।
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इनकी भेजी गई थी रिपोर्ट
सहायक अभियंता सीजी शुक्ला, रसीद बेग, बीपी सिंह, साजिद हसन, मनोज कुमार उपाध्याय, चंद्रभानु, रवींद्र कुमार व अमर दीप कुमार (नौकरी से त्याग पत्र दे दिया था) थे। इसी तरह अवर अभियंता देवेंद्र नाथ मिश्र, आरके सिंह (2015 में वाराणसी में तैनात थें), रजनीश कुमार श्रीवास्तव, संजय गुप्ता, पौहारी यादव, अमर कुमार मिश्रा, पीएन पांडेय,, ओपी गुप्ता, सुनील कुमार, देशराज सिंह, एके सिंह, अरविंद त्यागी, आदर्श भटनागर, नवीन शर्मा, पीएन दुबे, गंगेश कुमार (2015 में अलीगढ़ में तैनात थे।
तबादले और आरोप लगने के बाद भी तैनात
एलडीए में कई इंजीनियर अभी भी लंबे समय से प्रवर्तन विभाग में तैनात हैं। इनमें कुछ के खिलाफ कई बार आरोप लगे। निलंबन के लिए शासन को रिपेार्ट भी गई मगर अपनी जुगाड़ से हिले नहीं। इनमें प्रवर्तन विभाग में तैनात विपिन बिहार राय, संजय शुक्ला (अलीगंज अग्निकांड में निलंबित), संजय वशिष्ठ, प्रमोद पांडेय (अलीगंज अग्निकांड में निलंबित), रवि राय आदि हैं। एलडीए के मुख्य नगर नियोजक केके गौतम का तबादला बीते माह हो चुका है मगर वह अभी एलडीए में डटे हैं। जानकारों का कहना है कि शासन की यही मेहरबानी अवैध निर्माण को बढ़ावा दे रही है।
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उदाहरण के लिए 14 साल पहले का मामला ही देखिए। बीते साल दो जनवरी को हाईकोर्ट ने शहर में बढ़ते अवैध निर्माण को लेकर साल 2012 में कर्नल अशोक कुमार की ओर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाते हुए प्रमुख सचिव आवास का निजी हलफनामा मांगा था। यह सुनवाई घरों को तोड़कर काॅम्प्लेक्स, अपार्टमेंट बनाए जाने के मामले में थे। याचिका में कहा गया था कि किस तरह घरों को तोड़कर काॅम्प्लेक्स बनाए गए और एलडीए ने उनको रोका नहीं।
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जब यह मामला आया था तो उस समय एलडीए ने कोर्ट में 81 अवैध निर्माण चिह्नित किए जाने की जानकारी दी थी। अवैध निर्माण कराने के मामले में 26 इंजीनियरों पर आरोप तय किए गए थे। इसके बाद फिर जांच हुई तो और 17 इंजीनियरों को अवैध निर्माण कराने में आरोपी मानते हुए शासन को कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी गई थी लेकिन हुआ कुछ नहीं। फाइल शासन में जाकर डंप हो गई। साल भर पहले जो तेजी आई थी वह एक बार फिर ठंडे बस्ते में हैं। अब हाल यह है कि 12 साल पहले 26 इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एलडीए से शासन को जो रिपोर्ट भेजी गई थी। उसमें 15 रिटायर हो चुके थे, एक इस्तीफा देकर नौकरी छोड़ चुका था और एक दूसरे विकास प्राधिकरण मेंं तैनात था।
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इनकी भेजी गई थी रिपोर्ट
सहायक अभियंता सीजी शुक्ला, रसीद बेग, बीपी सिंह, साजिद हसन, मनोज कुमार उपाध्याय, चंद्रभानु, रवींद्र कुमार व अमर दीप कुमार (नौकरी से त्याग पत्र दे दिया था) थे। इसी तरह अवर अभियंता देवेंद्र नाथ मिश्र, आरके सिंह (2015 में वाराणसी में तैनात थें), रजनीश कुमार श्रीवास्तव, संजय गुप्ता, पौहारी यादव, अमर कुमार मिश्रा, पीएन पांडेय,, ओपी गुप्ता, सुनील कुमार, देशराज सिंह, एके सिंह, अरविंद त्यागी, आदर्श भटनागर, नवीन शर्मा, पीएन दुबे, गंगेश कुमार (2015 में अलीगढ़ में तैनात थे।
तबादले और आरोप लगने के बाद भी तैनात
एलडीए में कई इंजीनियर अभी भी लंबे समय से प्रवर्तन विभाग में तैनात हैं। इनमें कुछ के खिलाफ कई बार आरोप लगे। निलंबन के लिए शासन को रिपेार्ट भी गई मगर अपनी जुगाड़ से हिले नहीं। इनमें प्रवर्तन विभाग में तैनात विपिन बिहार राय, संजय शुक्ला (अलीगंज अग्निकांड में निलंबित), संजय वशिष्ठ, प्रमोद पांडेय (अलीगंज अग्निकांड में निलंबित), रवि राय आदि हैं। एलडीए के मुख्य नगर नियोजक केके गौतम का तबादला बीते माह हो चुका है मगर वह अभी एलडीए में डटे हैं। जानकारों का कहना है कि शासन की यही मेहरबानी अवैध निर्माण को बढ़ावा दे रही है।