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ऊर्जा भंडारण में यूपी रचेगा इतिहास: यहां बनेगा देश का सबसे बड़ा 'वॉटर बैटरी' हब, 80 हजार करोड़ का होगा निवेश

Wed, 15 Jul 2026 09:04 AM IST
Bhupendra Singh अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Wed, 15 Jul 2026 09:04 AM IST
सार

यूपी का सोनभद्र देश का बड़ा वाटर बैटरी हब बनेगा। यहां 8 कंपनियां 80 हजार करोड़ का निवेश करेंगी। डाटा सेंटर और हरित ऊर्जा की बढ़ती मांग पूरी करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही 13 हजार मेगावाट से ज्यादा की बिजली क्षमता बढ़ेगी। आगे पढ़ें पूरी खबर...

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Sonbhadra to become country major water battery hub 8 companies to invest 80 thousand crore
सोनभद्र। - फोटो : संवाद

विस्तार

यूपी का सोनभद्र जिला आने वाले वर्षों में देश के सबसे बड़े पम्प्ड स्टोरेज पॉवर (पीएसपी) केंद्रों में शामिल होगा। इन्वेस्ट यूपी के अनुसार जिले में प्रस्तावित पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं के लिए जेएसडब्ल्यू, अडाणी, एएम ग्रीन्स समेत आठ निजी कंपनियों ने करीब 80 हजार करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है। इनमें से ज्यादातर परियोजनाएं स्वीकृति एवं डीपीआर के विभिन्न चरणों में हैं। पर्यावरण सहित तीन विभागों की क्लियरेंस के बाद काम शुरू हो जाएगा। इन परियोजनाओं का उद्देश्य रात के समय ग्रिड और डाटा सेंटरों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति देना है।

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एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग और बड़े डाटा सेंटर चौबीसों घंटे चलते हैं। दिन के समय सौर ऊर्जा और अन्य स्रोतों का उत्पादन अधिक होता है, लेकिन रात में उसकी उपलब्धता नहीं रहती। ऐसे में पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाएं बिजली व्यवस्था के लिए वाटर बैटरी की तरह काम करेंगी और रात में भी स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करेंगी।
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प्रदेश में अब तक स्वीकृत और प्रस्तावित परियोजनाओं में सबसे ज्यादा क्षमता सोनभद्र पर केंद्रित है। इन्वेस्ट यूपी और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के आंकड़ों के अनुसार सोनभद्र में विभिन्न चरणों में आठ पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। इनकी कुल क्षमता लगभग 13130 मेगावाट है।

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औद्योगिक इकाइयों और शहरों को मिलेगी भरपूर बिजली

वर्तमान में ज्यादातर परियोजनाएं विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर), सर्वेक्षण, पर्यावरणीय एवं अन्य वैधानिक स्वीकृतियों की प्रक्रिया में हैं। हालांकि, जेएसडब्ल्यू की कंधौरा परियोजना के लिए उप्र पॉवर कॉर्पोरेशन के साथ 1500 मेगावाट क्षमता की ऊर्जा भंडारण खरीद का समझौता पहले ही हो चुका है। इससे यह परियोजना सबसे आगे मानी जा रही है। इतनी बड़ी क्षमता विकसित होने से ग्रिड की स्थिरता बढ़ेगी तथा प्रदेश में विकसित हो रहे डाटा सेंटरों, औद्योगिक इकाइयों और शहरी क्षेत्रों को चौबीसों घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना आसान होगा।

प्रमुख परियोजनाएं

कंपनी   परियोजना  क्षमता
जेएसडब्ल्यू एनर्जी कंधौरा 1680 मेगावाट
टोरेंट पॉवर सशनई 1750 मेगावाट
अडाणी समूह पनौरा 1500 मेगावाट
अवाडा वाटर चिचलिक 1120 मेगावाट
अमुनरा इन्फ्राटेक झरिया 1620 मेगावाट
टीएचडीसी बासुहारी/बडेला 1200 मेगावाट

पम्प्ड स्टोरेज प्लांट

पम्प्ड स्टोरेज प्लांट को सरल भाषा में पानी से चलने वाली विशाल बैटरी कहा जा सकता है। दिन में जब सौर या अन्य स्रोतों से अतिरिक्त बिजली उपलब्ध होती है तब उसी बिजली से पानी को निचले जलाशय से ऊपर स्थित जलाशय में पम्प किया जाता है। रात या अधिक मांग के समय यही पानी ऊपर से नीचे छोड़ा जाता है। गिरते हुए पानी से टरबाइन घूमती है और बिजली पैदा होती है। इससे ग्रिड को तत्काल बिजली मिलती है। पीएसपी संयंत्रों का जीवनकाल लंबा होता है और बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण के लिए इन्हें दुनिया की सबसे विश्वसनीय तकनीकों में माना जाता है।
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