फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   special investigation team re create the crime scene of vivek tiwari murder

विवेक हत्याकांड: क्राइम सीन रीक्रिएशन के नाम पर हुई खानापूर्ति, एफआईआर में भी हुआ खेल

Tue, 02 Oct 2018 11:59 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 02 Oct 2018 11:59 PM IST
विज्ञापन
special investigation team re create the crime scene of vivek tiwari murder
मौके पर कल्पना व सना

एपल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की हत्या की जांच कर रही एसआईटी ने मंगलवार दोपहर गोमतीनगर विस्तार स्थित घटनास्थल पहुंचकर क्राइम सीन का रीक्रिएशन किया। हालांकि, वारदात के वक्त विवेक के साथ मौजूद एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी उसकी पूर्व सहकर्मी को कार में उसी जगह पर न बैठाने से यह महज खानापूर्ति साबित हुआ।

विज्ञापन


पूर्व सहकर्मी कार के सामने खड़ी होकर आरोपी सिपाही के गोली चलाने का स्थान और दिशा बताती रही। उससे मिली जानकारियों के आधार पर ही फॉरेंसिक टीम ने कार और बाइक के बीच की दूरी व गोली मारने की दूरी दर्ज की।
विज्ञापन


एसआईटी प्रभारी व लखनऊ रेंज के आईजी सुजीत पांडेय का कहना है कि, फॉरेंसिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर जांच किसी नतीजे पर पहुंचेगी। इस दौरान विवेक की पत्नी कल्पना, साला विष्णु शुक्ला समेत अन्य परिवारीजन भी मौजूद थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

17 मिनट चला क्राइम सीन का रीक्रिएशन

special investigation team re create the crime scene of vivek tiwari murder
एसआईटी

क्राइम सीन का रीक्रिएशन 17 मिनट तक चला। एसआईटी और फॉरेंसिक टीम ने दोपहर करीब तीन बजे ही घटनास्थल पहुंचकर क्राइम स्पॉट को घेर लिया था। इस रास्ते पर आने-जाने वाले वाहनों को दूसरी ओर से भेजा गया।

ठीक 3.45 बजे विवेक की पूर्व सहकमी, कल्पना और विष्णु शुक्ला एक ही कार से पहुंचे। पूर्व सहकर्मी ने एसआईटी टीम को कार के खड़े होने के स्थान, सिपाहियों के सामने से बाइक से आने और वाहन खड़ी कर गोली मारने तक के बारे में जानकारी दी। इसके बाद 4.02 मिनट पर कल्पना और उनके परिवारीजन व पूर्व सहकर्मी चले गए।

वारदात के वक्त जैसे वाहन थे, वैसे ही मंगाए

special investigation team re create the crime scene of vivek tiwari murder
क्राइम सीन क्रिएट करती एसआईटी

एसआईटी प्रभारी ने बताया कि वारदात के वक्त विवेक अपनी एक्सयूवी 500 में थे और सिपाहियों के पास अपाचे बाइक थी। क्राइम सीन के रीक्रिएशन में कोई चूक न हो, इसलिए वैसे ही वाहन मंगाए गए। पहले सहारागंज चौकी प्रभारी राहुल सोनकर से सिल्वर रंग की उसी मॉडल की एसयूवी मंगाई गई थी। बाद में गोमतीनगर के प्रभारी निरीक्षक ने काले रंग की एक्सयूवी 500 का इंतजाम होने की बात कही तो आईजी ने उसी का इस्तेमाल करने को कहा।

... तो एक्सीडेंट हुआ न ही कुचलने का प्रयास किया गया

special investigation team re create the crime scene of vivek tiwari murder
माप लेती एसआईटी

विवेक की पूर्व सहकर्मी ने एसआईटी के अधिकारियों को घटना के बारे में जो जानकारियां दीं, उसमें कार के बाइक में टक्कर मारने और सिपाहियों को कुचलने के प्रयास की बात सामने नहीं आई। पूर्व सहकर्मी का कहना था कि कार खड़ी थी और बाइक सामने से आकर रुक गई। 

बाइक रुकने के बाद एक सिपाही उसकी तरफ व एक सिपाही विवेक की तरफ खिड़की पर आ गया। सिपाहियों ने गाली-गलौज की। विवेक ने विरोध किया तो वह भड़क गए और सामने जाकर गोली चला दी। इससे साफ है कि पुलिस के अधिकारी शुरुआत से ही सिपाहियों की बाइक को टक्कर मारने और उन्हें कुचलने की फर्जी कहानी गढ़ रहे थे।

तहरीर में खेल करने की भी खुली पोल

special investigation team re create the crime scene of vivek tiwari murder
क्राइम सीन क्रिएट करती एसआईटी

हत्याकांड की एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी ने एफआईआर में लिखाया था कि उसने गोली चलने जैसी आवाज सुनी। यानी, उसने किसी को गोली चलाते नहीं देखा था। सिर्फ एक आवाज सुनी थी जिसे उसने फायर माना। गोली का अंदाजा उसे तब हुआ, जब मौके से भागे विवेक की कार कुछ दूर अंडरपास के खंभे से टकराकर रुकी। 

पूर्व सहकर्मी ने खून देखा तब उन्हें अहसास हुआ कि विवेक को गोली लगी है। हालांकि, मंगलवार को रीक्रिएशन के दौरान उन्होंने सिपाही के सीधे कार के सामने खड़े होकर गोली मारने की जानकारी दी। इससे स्पष्ट है कि पूर्व सहकर्मी ने जो एफआईआर लिखाई थी, वह पुलिस अधिकारियों का खेल था। उस वक्त उसने कागज पर जो भी लिखा था, अधिकारियों के कहने पर लिखा था।

विवेक की कार जहां टकराई, वहां पाला छूकर लौट गए

special investigation team re create the crime scene of vivek tiwari murder
विवेक की कार

क्राइम सीन के रीक्रिएशन में एसआईटी उस जगह को भूल गई, जहां विवेक की कार टकराकर रुकी थी। सिर्फ घटनास्थल पर कार और बाइक की पोजीशन, गोली चलाने वाले सिपाही की दूरी, पिस्टल की कार से दूरी व ऊंचाई के बारे में ही अध्ययन किया। उक्त स्थान पर ठोड़ी से घुसकर गोली के गले में फंसने और खून निकलने के बावजूद विवेक दो मोड़ मुड़कर करीब 400 मीटर दूर कैसे पहुंचे? यह जानने की एसआईटी ने कोशिश नहीं की। विवेक की पूर्व सहकर्मी को गोली मारने वाली जगह से ही घर भेज दिया गया। आगे सिर्फ एसआईटी प्रभारी, आईजी रेंज सुजीत पांडेय और अन्य पुलिस अधिकारी के अलावा विवेक के चचिया ससुर ही गए, वह भी कार के बगैर। करीब 10 मिनट घटनास्थल देखने के बाद सभी लौट गए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed