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Lucknow News: देशभक्ति ने पहुंचाया भारतीय वायुसेना में, अब पर्दे पर उतारी कारगिल योद्धा की सच्ची कहानी
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फिल्म डायरेक्टर कुशल श्रीवास्तव। अमर उजाला
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अभिषेक सहज
लखनऊ। कारगिल युद्ध के दौरान सेना से प्रभावित होकर लखनऊ के कुशल श्रीवास्तव भारतीय वायुसेना में भर्ती हो गए थे। कई साल वहां कार्य करने के बाद उन्होंने फिल्म निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा। अपनी पहली ही फिल्म वोदका डायरीज का निर्देशन कर चर्चा में आए कुशल अब एक वेब सीरीज में वीरचक्र विजेता स्क्वॉड्रन लीडर शहीद अजय आहूजा की सच्ची कहानी लेकर आ रहे हैं। इन दिनों लखनऊ आए कुशल ने अमर उजाला के साथ बातचीत में कई मुद्दों पर बेबाकी से बात की।
वोदका डायरीज, द बैटल ऑफ अयोध्या, स्पीड डायल, लव बर्ड्स, स्पीड डायल, काफिर और द जॉब जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुके कुशल ने बताया कि कारगिल युद्ध के दौरान वायुसेना के मिशन का नाम था ऑपरेशन सफेद सागर। इसी नाम से वेब सीरीज आ रही है जिसमें शहीद अजय आहूजा की वीरगाथा पर्दे पर उतरेगी। कुशल ने बताया कि वायुसेना से वापस आने के बाद से जब उन्होंने निर्देशन शुरू किया, तभी से उनके मन में इस विषय पर काम करने की चाह थी जिसे उन्होंने लंबे समय तक रिसर्च के बाद अंजाम तक पहुंचाया है। इसके लिए वायुसेना में अजय आहूजा के साथियों व ऑफिसर्स के साथ ही उनके परिवार से भी जानकारियां जुटाई गईं। सभी ने इस विषय पर उनकी खुलकर मदद की। कोशिश की गई है शूटिंग में रियल लोकेशंस को ज्यादा से ज्यादा शामिल किया जाए। राजस्थान, ग्वालियर और चंडीगढ़ में शूट किया है। कुशल निर्देशक के अलावा पटकथा लेखक, संवाद लेखक व निर्माता भी हैं। उन्होंने विज्ञापन फिल्मों से कॅरिअर की शुरुआत की थी। फिर जेपी दत्ता के साथ सहायक निर्देशन का काम भी किया।
सुनाए चाचा स्व. राजू श्रीवास्तव और जॉनी लीवर के किस्से
कुशल ने बताया कि उनके चाचा हास्य कलाकार स्व. राजू श्रीवास्तव उनके प्रेरणास्रोत हैं। बताया, जब वह पहली बार अपने चाचा के साथ मुंबई गए तो उनके दोस्त जॉनी लीवर के घर पर रुके। बताया, वहां से एक टूर के सिलसिले में राजू चाचा विदेश चले गए और मुझे वहीं छोड़ गए। इस दौरान जॉनी लीवर जहां जाते मुझे भी साथ ले जाते। मैं उनसे बहुत प्रभावित हुआ लेकिन एक दिन वे जब मुझे अपने साथ शूटिंग पर ले गए तो मैंने देखा कि डायरेक्टर सभी कलाकारों को डांट रहे थे। मैंने जॉनी लीवर से पूछा कि ये कौंन हैं तो उन्होंने बताया कि यह फिल्म के निर्देशक हैं और जो वे कहते हैं सभी को वैसा ही करना होता है। बस यहीं से मेरे मन में निर्देशक बनने की इच्छा जाग उठी और मैं जुट गया। उन्होंने कहा कि मेरे चाचा राजू श्रीवास्तव स्क्रीन व मंच पर भले ही लोगों को खूब हंसाते हाें लेकिन वास्तविक जिंदगी में वे काफी गंभीर इंसान थे। हम सभी को उनसे डर लगता था।
लखनऊ। कारगिल युद्ध के दौरान सेना से प्रभावित होकर लखनऊ के कुशल श्रीवास्तव भारतीय वायुसेना में भर्ती हो गए थे। कई साल वहां कार्य करने के बाद उन्होंने फिल्म निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा। अपनी पहली ही फिल्म वोदका डायरीज का निर्देशन कर चर्चा में आए कुशल अब एक वेब सीरीज में वीरचक्र विजेता स्क्वॉड्रन लीडर शहीद अजय आहूजा की सच्ची कहानी लेकर आ रहे हैं। इन दिनों लखनऊ आए कुशल ने अमर उजाला के साथ बातचीत में कई मुद्दों पर बेबाकी से बात की।
वोदका डायरीज, द बैटल ऑफ अयोध्या, स्पीड डायल, लव बर्ड्स, स्पीड डायल, काफिर और द जॉब जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुके कुशल ने बताया कि कारगिल युद्ध के दौरान वायुसेना के मिशन का नाम था ऑपरेशन सफेद सागर। इसी नाम से वेब सीरीज आ रही है जिसमें शहीद अजय आहूजा की वीरगाथा पर्दे पर उतरेगी। कुशल ने बताया कि वायुसेना से वापस आने के बाद से जब उन्होंने निर्देशन शुरू किया, तभी से उनके मन में इस विषय पर काम करने की चाह थी जिसे उन्होंने लंबे समय तक रिसर्च के बाद अंजाम तक पहुंचाया है। इसके लिए वायुसेना में अजय आहूजा के साथियों व ऑफिसर्स के साथ ही उनके परिवार से भी जानकारियां जुटाई गईं। सभी ने इस विषय पर उनकी खुलकर मदद की। कोशिश की गई है शूटिंग में रियल लोकेशंस को ज्यादा से ज्यादा शामिल किया जाए। राजस्थान, ग्वालियर और चंडीगढ़ में शूट किया है। कुशल निर्देशक के अलावा पटकथा लेखक, संवाद लेखक व निर्माता भी हैं। उन्होंने विज्ञापन फिल्मों से कॅरिअर की शुरुआत की थी। फिर जेपी दत्ता के साथ सहायक निर्देशन का काम भी किया।
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सुनाए चाचा स्व. राजू श्रीवास्तव और जॉनी लीवर के किस्से
कुशल ने बताया कि उनके चाचा हास्य कलाकार स्व. राजू श्रीवास्तव उनके प्रेरणास्रोत हैं। बताया, जब वह पहली बार अपने चाचा के साथ मुंबई गए तो उनके दोस्त जॉनी लीवर के घर पर रुके। बताया, वहां से एक टूर के सिलसिले में राजू चाचा विदेश चले गए और मुझे वहीं छोड़ गए। इस दौरान जॉनी लीवर जहां जाते मुझे भी साथ ले जाते। मैं उनसे बहुत प्रभावित हुआ लेकिन एक दिन वे जब मुझे अपने साथ शूटिंग पर ले गए तो मैंने देखा कि डायरेक्टर सभी कलाकारों को डांट रहे थे। मैंने जॉनी लीवर से पूछा कि ये कौंन हैं तो उन्होंने बताया कि यह फिल्म के निर्देशक हैं और जो वे कहते हैं सभी को वैसा ही करना होता है। बस यहीं से मेरे मन में निर्देशक बनने की इच्छा जाग उठी और मैं जुट गया। उन्होंने कहा कि मेरे चाचा राजू श्रीवास्तव स्क्रीन व मंच पर भले ही लोगों को खूब हंसाते हाें लेकिन वास्तविक जिंदगी में वे काफी गंभीर इंसान थे। हम सभी को उनसे डर लगता था।