{"_id":"6a6d12166b655495ec078f28","slug":"successful-hip-replacement-performed-on-a-heart-patient-at-pgi-lucknow-news-c-13-lko1096-1854661-2026-08-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: पीजीआई में दिल के रोगी के कूल्हे का सफल प्रत्यारोपण हुआ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: पीजीआई में दिल के रोगी के कूल्हे का सफल प्रत्यारोपण हुआ
विज्ञापन
पीजीआई में हुई सर्जरी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ। पीजीआई के डॉक्टरों ने एक जोखिम भरी सर्जरी कर बुजुर्ग की जान बचाई है। बुजुर्ग के दिल में दो स्टेंट लगे होने के बावजूद संस्थान के ऑर्थोपेडिक्स विभाग ने मरीज के कूल्हे का सफल ऑपरेशन किया। सर्जरी के तीन सप्ताह बाद मरीज सहारे से चलने-फिरने लगा है।
डॉक्टरों का कहना है कि दो माह पहले बुजुर्ग को गंभीर दिल का दौरा पड़ा था। इसके बाद हृदय रोग विभाग में उनकी दोनों कोरोनरी धमनियों में स्टेंट प्रत्यारोपित किए गए थे। स्टेंट में रक्त का थक्का न बने, इसके लिए मरीज को खून पतला करने वाली दवाएं दी जा रही थीं। इसी बीच मरीज के कुल्हे में गंभीर समस्या आ गई और ऑपरेशन जरूरी हो गया।
ऑर्थोपेडिक्स विभागाध्यक्ष डॉ. पुलक शर्मा ने बताया कि ऐसी स्थिति में सर्जरी बेहद चुनौतीपूर्ण होती है। यदि ऑपरेशन के समय खून पतला करने वाली दवाएं बंद की जातीं तो स्टेंट में क्लॉट बनकर जानलेवा स्थिति बन सकती थी। वहीं दवाएं जारी रखते तो सर्जरी के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा था। देरी करने पर निमोनिया और नसों में थक्का जमने जैसी जटिलताएं भी हो सकती थीं। जोखिम को देखते हुए ऑर्थोपेडिक्स, कार्डियोलॉजी और एनेस्थीसियोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम बनाई गई। गहन विचार-विमर्श के बाद सर्जरी का निर्णय लिया गया।
विज्ञापन
स्पाइनल एनेस्थीसिया से नियंत्रित रहा दिल
डॉ. पुलक शर्मा के नेतृत्व में हुई सर्जरी के दौरान मरीज को कंटीन्यूअस स्पाइनल एनेस्थीसिया दिया गया। एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. वंशप्रिया और डॉ. फुरकान ने अल्ट्रासाउंड की मदद से प्रक्रिया की। इससे ऑपरेशन के दौरान मरीज का ब्लड प्रेशर और हृदय की स्थिति नियंत्रित रही। इसके बाद सफलतापूर्वक ऑपरेशन हुआ। ऑपरेशन टीम में डॉ. सुजीत, डॉ. अभिषेक और डॉ. विकास समेत अन्य लोग शामिल रहे।
विज्ञापन
डॉक्टरों का कहना है कि दो माह पहले बुजुर्ग को गंभीर दिल का दौरा पड़ा था। इसके बाद हृदय रोग विभाग में उनकी दोनों कोरोनरी धमनियों में स्टेंट प्रत्यारोपित किए गए थे। स्टेंट में रक्त का थक्का न बने, इसके लिए मरीज को खून पतला करने वाली दवाएं दी जा रही थीं। इसी बीच मरीज के कुल्हे में गंभीर समस्या आ गई और ऑपरेशन जरूरी हो गया।
विज्ञापन
ऑर्थोपेडिक्स विभागाध्यक्ष डॉ. पुलक शर्मा ने बताया कि ऐसी स्थिति में सर्जरी बेहद चुनौतीपूर्ण होती है। यदि ऑपरेशन के समय खून पतला करने वाली दवाएं बंद की जातीं तो स्टेंट में क्लॉट बनकर जानलेवा स्थिति बन सकती थी। वहीं दवाएं जारी रखते तो सर्जरी के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा था। देरी करने पर निमोनिया और नसों में थक्का जमने जैसी जटिलताएं भी हो सकती थीं। जोखिम को देखते हुए ऑर्थोपेडिक्स, कार्डियोलॉजी और एनेस्थीसियोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम बनाई गई। गहन विचार-विमर्श के बाद सर्जरी का निर्णय लिया गया।
विज्ञापन
स्पाइनल एनेस्थीसिया से नियंत्रित रहा दिल
डॉ. पुलक शर्मा के नेतृत्व में हुई सर्जरी के दौरान मरीज को कंटीन्यूअस स्पाइनल एनेस्थीसिया दिया गया। एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. वंशप्रिया और डॉ. फुरकान ने अल्ट्रासाउंड की मदद से प्रक्रिया की। इससे ऑपरेशन के दौरान मरीज का ब्लड प्रेशर और हृदय की स्थिति नियंत्रित रही। इसके बाद सफलतापूर्वक ऑपरेशन हुआ। ऑपरेशन टीम में डॉ. सुजीत, डॉ. अभिषेक और डॉ. विकास समेत अन्य लोग शामिल रहे।