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Suna Hai Kya: 56 इंची सलाहकार की वाहवाही, अदृश्य शक्तियां कर रहीं परेशान, विशेषज्ञ बने फाइनेंस आफिसर

अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Wed, 29 Apr 2026 11:11 AM IST
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सार

यूपी की सियासत की तरह प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में हो रही घटनाएं भी खूब सुर्खियां बटोरती हैं। गंगा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट से जुड़े एक सलाहकार इस समय जमकर चर्चाएं बटोर रहे हैं। पढ़ें, ये कानाफूसी:

Suna Hai Kya: 56-inch advisor is praised, invisible forces are troubling him
- फोटो : amar ujala
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विस्तार

यूपी की सियासत की तरह प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में हो रही घटनाएं भी खूब सुर्खियां बटोरती हैं। गंगा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट से जुड़े एक सलाहकार इस समय जमकर चर्चाएं बटोर रहे हैं। वहीं, एक विश्वविद्यालय के मुखिया को लेकर चर्चा है कि उन्हें अदृश्य शक्तियां परेशान कर रही हैं। वहीं, अस्पतालों के विशेषज्ञ फाइनेंस अफसर बनकर घूम रहे हैं। पढ़ें, ये कानाफूसी: 

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रफ्तार पर सलाहकार
आखिर वो घड़ी आ ही गई जब गंगा एक्सप्रेस वे पर गाड़ियां फर्राटा भरेंगी। ढेर में दबी फाइल को दोबारा खोलने से लेकर एक्सप्रेस वे का फीता काटने तक के सफर में मुखिया जी के सलाहकार की भूमिका सबसे तगड़ी रही। बताते हैं कि ड्रीम प्लान को हकीकत की जमीन पर लाने के लिए उन्हें मन भर के बधाइयां मिली हैं। उद्घाटन की राह में आने वाले रोड़े भी उन्होंने हटाए और दिल्ली से समय लेने के लिए दिन रात एक कर दिया, तब 29 अप्रैल का समय मिला। इस परफार्मेस से मिली वाहवाही ने उनका भी सीना 56 इंच का कर दिया है। पर्दे के पीछे की उनकी इस भूमिका की व्यूरोक्रेसी में खासी चर्चा है।
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अदृश्य शक्तियां कर रहीं काम
प्रदेश के काफी पुराने व प्रमुख विश्वविद्यालय में कुछ दिनों पहले नए मुखिया ने कार्यभार संभाला है। उनके कार्यभार संभालने के साथ ही लगातार कभी छात्र, कभी शिक्षक तो अब कर्मचारी लामबंद, विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। मुखिया भी काफी परेशान हैं कि एक मामला शांत नहीं होता है और दूसरा उनके सामने खड़ा हो जाता है। वहीं परिसर में भी इसे लेकर चर्चा है कि कुछ अदृश्य शक्तियां काम कर रही हैं। जो मुखिया को शांत नहीं बैठने देना चाहती हैं। क्योंकि अगर उनका ध्यान इन मुद्दों से हटा तो वे असली मुद्दों पर काम करना शुरू करेंगे।

विशेषज्ञ बने फाइनेंस आफिसर
प्रदेश के अस्पतालों में बाल रोग विशेषज्ञों की कमी का रोना रोया जा रहा है। कभी एनएचएम से तो कभी सीधे संविदा के जरिए भर्ती की कोशिशें चल रही हैं, लेकिन महानिदेशालय में कार्यरत बाल रोग विशेषज्ञ नहीं दिख रहे हैं। क्योंकि यहां डटे बाल रोग विशेषज्ञ मुखियाओं के लिए फाइनेंस आफिसर का काम कर रहे हैं। कागज में बीमारी रोकने का नोडल बने हैं, लेकिन उनसे कुछ भी पूछा जाए तो सीधा जवाब होता है कि वे अर्थव्यवस्था की निगरानी में लगे हैं। ऐसे में महानिदेशालय में तरह तरह की चर्चाएं हैं।

आपके पास भी ऐसी कोई जानकारी या समाचार हो तो 8859108085 पर व्हाट्सएप करें।

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