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सुना है क्या: 'चर्चा में बड़े साहब की माला' की कहानी, साथ ही 'कटौती के पीछे कौन और माया मिली न राम' के किस्से

अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Wed, 10 Jun 2026 12:30 PM IST
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सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...

suna hai kya Bade Saheb garland in discussion as well as tales of Who is behind cuts and Maya or Ram
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

चर्चा में बड़े साहब की माला

प्रदेश में एक पुराने विश्वविद्यालय में बड़े साहब की माला आजकल काफी चर्चा में है। यूं तो विश्वविद्यालय में आर्थिक संकट चल रहा है लेकिन गुरुजी लोगों की एकमुश्त हुई पदोन्नति सभी के बीच चर्चा में है। अब जब तोहफा मिला है तो जश्न तो बनता है लेकिन इस आयोजन में बड़े साहब को पहनाई गई माला सबसे ज्यादा चर्चा में है। अक्सर इस तरह की माला राजनीतिक कार्यक्रमों में ही दिखती है। ऐसे में परिसर में यह कुछ ज्यादा ही चर्चा का विषय है कि बड़े साहब की कहीं बड़ी उम्मीदें तो नहीं हैं जो इसके द्वारा परवान चढ़ रही हैं।

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कटौती के पीछे कौन

एक कद्दावर माननीय के अधिकारों में कटौती की चर्चा जितनी राजनीति के गलियारों में है, उतनी ही ब्यूरोक्रेसी में। जितने मुंह...उतनी बातें। एक तरफ अधिकारों में कटौती वाले माननीय से मन ही मन खुन्नस रखने वाले दो माननीय इतने प्रसन्न हैं कि मुखिया के फैसले की न केवल तारीफ कर रहे हैं बल्कि कालिदास मार्ग तक ब्रांडिंग करने में कसर नहीं छोड़ रहे हैं। दूसरी तरफ विभाग और पूर्व विभाग में दबे मुंह चर्चा है कि अफसरों ने काम न कर पाने का दुखड़ा रोया था, जिसके बाद एक अहम विभाग बहुत बारीकी से निकल गया।

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माया मिली न राम

सेहत महकमे में एक अफसर ने वरिष्ठ पद पर पदोन्नति लेने से इन्कार कर दिया। उनका सपना था कि भले ही छोटे पद पर रहें लेकिन रहेंगे बाल बच्चों के साथ। इसके बाद उनका तबादला पूर्वांचल में हो गया। अब वह पूर्वांचल की गद्दी संभालने से इन्कार कर रहे हैं लेकिन विभाग उन्हें गद्दी सौंप रहा है। ऐसे में वह विभाग में घूम-घूमकर कह रहे हैं कि माया मिली न राम। हम तो बुरे फंस गए हैं। अब वह सभी से इस मुसीबत से बचने का रास्ता पूछ रहे हैं। देखना यह है कि नया रास्ता मिलता है या नहीं।

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