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Suna Hai Kya: "सोशल मीडिया पर भिड़े माफिया", "माननीय की चुगली से साहब चित","साहब बने नया पॉवर सेंटर"
Fri, 31 Jul 2026 02:10 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Fri, 31 Jul 2026 02:10 PM IST
सार
सुना है क्या... कॉलम में आज चर्चा यूपी के दो माफिया की जो कि सोशल मीडिया पर ही भिड़ गए और पुलिस तमाशा ही देखती रही। वहीं, एक ऐसे साहब की चर्चा जिन्हें माननीय ने भरी मीटिंग में खरी खोटी सुना दी। पढ़ें, ये किस्से:
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सुना है क्या... कॉलम में आज चर्चा यूपी के दो माफिया की जो कि सोशल मीडिया पर ही भिड़ गए और पुलिस तमाशा ही देखती रही। वहीं, एक ऐसे साहब की चर्चा जिन्हें माननीय ने भरी मीटिंग में खरी खोटी सुना दी। वहीं, एक और साहब भी चर्चा में हैं जिनका प्रमोशन होते ही वो एक पावर सेंटर बन गए। पढ़ें, ये किस्से:
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सोशल मीडिया पर भिड़े माफिया
दो माफिया आजकल एक-दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहा रहे हैं। मामला गन पॉवर से बनना नहीं है तो सोशल मीडिया पर समर्थकों के जरिए लड़ रहे हैं। पुराना इतिहास याद दिलाकर फजीहत करने की कोशिश जारी है। ज्यादा तेवर उनके हैं जो कभी दूसरे की शागिर्दी करते थे। उनके समर्थकों की बेअंदाजी अब गंभीर हो चुकी है। दोनों ही सत्ता के नजदीक हैं, इसलिए खाकी भी चुपचाप तमाशा देख रही है और ऊंट के करवट लेने का इंतजार कर रही है। हालांकि हालात कुछ ऐसे बन रहे हैं कि मामला फिर गन पॉवर की ओर मुड़ सकता है।
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माननीय की चुगली से साहब चित
घूमने-फिरने वाले महकमे के बड़े साहब का तेवर अब ढीला पड़ गया है। चर्चा है कि जब से महकमे के मालिक माननीय ने साहब के तौर-तरीके को लेकर लेकर अपने मुखिया से शिकायत की, तभी से साहब सही रास्ते पर लौट आए हैं। दरअसल, ऊपर से माननीय को निर्देश मिला था कि साहब के साथ मंडल स्तर पर समीक्षा करके कार्ययोजना तैयार कराएं। माननीय तो निकल पड़े मंडल-मंडल, लेकिन साहब राजधानी की रंगीन रात से दूर नहीं हुए। एक दिन मुखिया ने माननीय से भरी मीटिंग में पूछा तो माननीय ने पोल खोल दी कि साहब जाते ही नहीं। इसके बाद तो मुखिया ने भरी मीटिंग में साहब की ऐसी-तैसी कर दी। तभी से साहब अब सही रास्ते पर आ गए हैं।
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साहब बने नया पॉवर सेंटर
खाकी महकमे में तीन दिन पहले बड़ा फेरबदल हुआ। प्रोन्नति पाए एक साहब को उस इकाई की कमान दे दी गई, जिसे सत्ता प्रमुख की आंख-कान माना जाता है। अब इस इकाई के मुखिया के तौर पर ताजपोशी से उन्हें नया पॉवर सेंटर माना जाने लगा है। वहीं दूसरी ओर महकमे के और दावेदार हैरान भी हैं। उनका मानना है कि चुनाव से कुछ महीने पहले साहब को इस इकाई का मुखिया बनाया जाना इस बात का संकेत है कि आमतौर पर शांत और तटस्थ रहने वाले साहब की पकड़ कितनी मजबूत है। वैसे भी साहब चर्चा में हैं कि उन पर पहले से ही वरदहस्त है। इसलिए साहब दिल्ली से लौटने के बाद से लगातार प्राइम पोस्टिंग पर रहे हैं।
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